मध्यप्रदेश में वन संरक्षण पर CM मोहन यादव का बड़ा प्लान, बढ़ेगा फॉरेस्ट टूरिज्म

Published : Jun 19, 2026, 09:26 AM IST
mohan yadav big decisions on tiger force

सार

MP News: क्या मध्यप्रदेश में बनेगी नई राज्य स्तरीय टास्क फोर्स? क्या मानव-वन्यजीव संघर्ष को आपदा घोषित किया जाएगा? क्या राजस्थान से आने वाली सोन चिड़िया जंगलों की तस्वीर बदलेगी? क्या वन्य पर्यटन के लिए सफारी और होम स्टे बढ़ेंगे? क्या 52 चीतों वाला मध्यप्रदेश वन्यजीव संरक्षण में नया रिकॉर्ड बनाएगा?

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 18 जून को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में वन विभाग की योजनाओं और गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की पहचान उसकी समृद्ध वन संपदा, प्राकृतिक धरोहर और जैव विविधता से है। ऐसे में इन संसाधनों के संरक्षण और संवर्धन के लिए दीर्घकालिक एवं प्रभावी प्रयास किए जाने चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जैविक और वानस्पतिक विविधताओं की रक्षा केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वन क्षेत्रों के विस्तार, बड़े पैमाने पर पौधरोपण, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और स्थानीय समुदायों की सहभागिता को प्राथमिकता दी जाए।

वन्य पर्यटन बढ़ाने के लिए सुविधाओं के विस्तार के निर्देश

डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में वन्य पर्यटन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं मौजूद हैं। इसे तेजी से विकसित करने के लिए पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने होम-स्टे जैसी पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने और सफारी वाहनों की संख्या बढ़ाने पर भी विचार करने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि बेहतर सुविधाओं से अधिक पर्यटक प्रदेश के वन क्षेत्रों और अभ्यारण्यों की ओर आकर्षित होंगे।

वन्य जीव संरक्षण के लिए आधुनिक प्रबंधन व्यवस्था अपनाने पर जोर

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यानों और अभ्यारण्यों में वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए आधुनिक प्रबंधन प्रणाली अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नए वन्य प्राणियों को उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाए ताकि प्रदेश की वन संपदा और अधिक समृद्ध हो सके।

उन्होंने जंगल क्षेत्रों में स्थित जनजातीय समुदायों के देवस्थानों को उनकी परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुरूप विकसित करने पर भी जोर दिया। अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष 300 देवस्थानों का विकास किया जाएगा, जबकि अब तक 1421 देवस्थलों का विकास किया जा चुका है।

राज्य स्तरीय टास्क फोर्स और कमांड कंट्रोल रूम को मंजूरी

बैठक में मुख्यमंत्री ने बताया कि आंध्रप्रदेश सरकार ने मध्यप्रदेश से बाघ और गौर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। उन्होंने अधिकारियों को आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए। साथ ही बदले में आंध्रप्रदेश से वाइल्ड डॉग्स अथवा अन्य वन्य जीव प्राप्त करने की संभावनाएं तलाशने को कहा। इसी तरह राजस्थान सरकार द्वारा सोन चिड़िया उपलब्ध कराने पर सहमति दी गई है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जल्द से जल्द सोन चिड़िया प्राप्त करने की कार्रवाई पूरी की जाए।

वन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए मुख्यमंत्री ने राज्य टाइगर स्ट्राइक फोर्स की तर्ज पर ‘राज्य स्तरीय टास्क फोर्स’ गठित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसके अलावा वन एवं वन्यजीव सुरक्षा को मजबूत करने के लिए वन मुख्यालय स्तर पर ‘कमांड एवं कंट्रोल रूम’ स्थापित करने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान की गई।

मानव-वन्यजीव संघर्ष को आपदा घोषित करने की तैयारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव और वन्य जीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को राज्य आपदा की श्रेणी में शामिल करने के प्रयास किए जाएंगे। ऐसा होने पर प्रशासन, पुलिस, वन विभाग और आपदा प्रबंधन बल मिलकर ऐसे मामलों का अधिक प्रभावी तरीके से समाधान कर सकेंगे। इसके साथ ही खनिज परिवहन से संबंधित वन विभाग के ‘परिवहन अनुज्ञा शुल्क’ में वृद्धि के प्रस्ताव को भी मंजूरी प्रदान की गई।

राजस्थान से आएगी सोन चिड़िया, गांधीसागर में छोड़े जाएंगे चीते

बैठक में प्रमुख सचिव वन संदीप यादव ने जानकारी दी कि राजस्थान से प्राप्त होने वाली सोन चिड़ियों को मुख्यमंत्री के हाथों घाटीगांव और गांधीसागर के जंगलों में छोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में मध्यप्रदेश में कुल 52 चीते हैं, जिनमें से 32 का जन्म कूनो राष्ट्रीय उद्यान में हुआ है। सागर जिले के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को चीतों के तीसरे बड़े आवास के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा मंदसौर जिले के गांधीसागर अभ्यारण्य में जुलाई 2026 के दौरान एक नर और एक मादा चीते को छोड़ने की तैयारी की जा रही है।

बाघ, चीता, तेंदुआ और गिद्ध संरक्षण में देश में अग्रणी मध्यप्रदेश

प्रमुख सचिव ने बताया कि बाघ, चीता, तेंदुआ, भेड़िया, घड़ियाल और गिद्धों की संख्या तथा संरक्षण के मामले में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी राज्य बना हुआ है। वन्यजीव संरक्षण को मजबूत बनाने के लिए कान्हा, बांधवगढ़, पेंच और पन्ना राष्ट्रीय उद्यानों के आसपास पांच वाइल्ड लाइफ रेस्क्यू सेंटर विकसित किए जा रहे हैं।

हाथियों की निगरानी और संरक्षण के लिए बढ़ेंगे संसाधन

उन्होंने बताया कि जंगली हाथियों के बेहतर प्रबंधन की जानकारी प्राप्त करने के लिए वन विभाग की एक टीम पश्चिम बंगाल का दौरा कर चुकी है। केंद्र सरकार ने प्रदेश की सीमा में मौजूद छह हाथियों को रेडियो कॉलर लगाने की अनुमति भी दे दी है। हाथियों के संरक्षण और देखभाल के लिए सहायक महावतों के पदों की संख्या बढ़ाई जाएगी। साथ ही वन एवं राजस्व भूमि से जुड़े सीमा विवादों के त्वरित समाधान के लिए वन व्यवस्थापन अधिकारी के पद को अधिक अधिकार देने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।

साल बोरर बीमारी से निपटने के लिए विशेष बजट की तैयारी

प्रमुख सचिव ने बताया कि अनूपपुर और डिंडौरी जिलों के जंगलों में साल बोरर नामक बीमारी का प्रकोप देखा गया है। यह समस्या लगभग 30 वर्षों में एक बार सामने आती है। इससे पहले वर्ष 1997 में यह बीमारी दर्ज की गई थी। बीमारी से प्रभावित वृक्षों के प्रबंधन और नियंत्रण के लिए अतिरिक्त बजट उपलब्ध कराया जाएगा तथा आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

तेंदूपत्ता संग्राहकों को मिलेगा 710 करोड़ रुपये से अधिक बोनस

वन विभाग के अनुसार वर्ष 2026 में प्रदेश में कुल 17.76 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहित किया गया है। इसके बदले तेंदूपत्ता संग्राहकों को 710.71 करोड़ रुपये की बोनस राशि वितरित की जाएगी। इसके अलावा प्रदेश के लगभग 700 वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने की दिशा में भी कार्य तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।

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