मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को मजबूत बनाने के लिए IITs समेत 30 संस्थानों से एमओयू हुए। फोकस रोजगार, कौशल और आधुनिक शिक्षा पर है।
भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 4 अगस्त को प्रशासन अकादमी में आयोजित "उभरते ज्ञान क्षेत्र, उन्नत पाठ्यक्रम: दृष्टि, दिशा एवं क्रियान्वयन" विषयक कार्यशाला में शामिल हुए। इस अवसर पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल भी मौजूद रहे। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रमों को वर्तमान और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना था।
कार्यक्रम में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा देश के प्रतिष्ठित आईआईटी संस्थानों सहित कई प्रमुख संस्थाओं के साथ विभिन्न उद्देश्यों को लेकर एमओयू भी किए गए। इस दौरान भारतीय मौसम विभाग के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्रा और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी भी उपस्थित रहे।
राज्यपाल मंगुभाई पटेल बोले- रोजगार और संस्कार आधारित शिक्षा समय की जरूरत
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण और संस्कारयुक्त शिक्षा ही समाज और राष्ट्र के विकास की मजबूत नींव है। विकसित भारत के निर्माण में शिक्षा की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आज के समय में युवाओं को ऐसी शिक्षा की आवश्यकता है जो कौशल, रोजगार और नैतिक मूल्यों से जुड़ी हो। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं को इस दिशा में गंभीरता से विचार करना चाहिए।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों से अधिक रोजगारपरक एवं कौशल आधारित पाठ्यक्रम शुरू करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के लिए बेहतर प्लेसमेंट व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। साथ ही स्थानीय उद्योगों की जरूरतों के अनुसार पाठ्यक्रम तैयार किए जाएं ताकि पढ़ाई पूरी करने के बाद युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें। उन्होंने शिक्षण संस्थानों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों के बीच समन्वय बढ़ाने तथा जरूरत के अनुसार नए पाठ्यक्रम विकसित करने पर भी जोर दिया।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया युवाओं के भविष्य का रोडमैप
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से युवाओं को न केवल आधुनिक शिक्षा मिल रही है बल्कि वे भारतीय नैतिक मूल्यों से भी जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा व्यवस्था युवाओं को समय की मांग के अनुरूप प्रशिक्षित कर रही है, जिससे वे राज्य और देश दोनों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होने के बाद मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने इसके विभिन्न आयामों को आगे बढ़ाने में उल्लेखनीय कार्य किया है। इसके लिए विभाग के अधिकारी और कर्मचारी बधाई के पात्र हैं।
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार बोले- सबसे पहले MP ने लागू की थी नई शिक्षा नीति
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को सबसे पहले लागू करने वाले राज्यों में मध्यप्रदेश अग्रणी रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने भारतीय ज्ञान परंपरा को भी पाठ्यक्रमों में शामिल करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में कौशल विकास को भी बढ़ावा देना है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार विभिन्न संस्थानों और भारत सरकार के सहयोग से कई पहल कर रही है।
परमार ने कहा कि विद्यार्थियों की पढ़ाई पूरी होने के बाद उनके प्लेसमेंट पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आधुनिक उद्योगों और रोजगार बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रमों को लगातार अपडेट किया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि कार्यशाला से निकलने वाले सुझाव भविष्य के बेहतर पाठ्यक्रम तैयार करने में मददगार साबित होंगे।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में अग्रणी बना मध्यप्रदेश
उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने के मामले में मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। राज्य सरकार इसे और अधिक प्रभावी बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में कृषि शिक्षा से जुड़े पाठ्यक्रमों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंजीनियरिंग और आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षा को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
अनुपम राजन ने कहा कि पिछले दो वर्षों में हजारों सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति की गई है, जिससे महाविद्यालयों में फैकल्टी की कमी काफी हद तक दूर हुई है। संकाय विकास और क्षमता निर्माण के लिए लगातार प्रशिक्षण कार्यक्रम और कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं।
उन्होंने बताया कि कार्यशाला के पांच अलग-अलग सत्रों में उच्च शिक्षा के विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही उच्च शिक्षा विभाग और 30 संस्थानों के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए, जिनके माध्यम से युवाओं के लिए शिक्षा और कौशल विकास का मजबूत रोडमैप तैयार किया जाएगा।
IIT बॉम्बे से IIT मद्रास तक, कई संस्थानों के साथ हुए रणनीतिक एमओयू
कार्यक्रम में उच्च शिक्षा विभाग ने देश के कई प्रमुख शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों के साथ समझौते किए। आईआईटी बॉम्बे के साथ डिजिटल स्किल्स और ओपन सोर्स टेक्नोलॉजी आधारित रोजगार क्षमता विकास, आईआईटी मद्रास के साथ भविष्य की तकनीकों और वैश्विक गुणवत्ता शिक्षा, आईआईटी गुवाहाटी के साथ एआई आधारित उच्च शिक्षा, आईआईटी बीएचयू वाराणसी के साथ उन्नत तकनीकी शिक्षा और अनुसंधान तथा आईआईटी रुड़की के साथ नेतृत्व, सतत विकास और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग को लेकर समझौते हुए।
इसके अलावा आईआईटी इंदौर के साथ नवाचार, स्टार्टअप और उद्यमिता संस्कृति को बढ़ावा देने, अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के साथ सुशासन अध्ययन, मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के साथ वैज्ञानिक अनुसंधान, भारत मौसम विज्ञान विभाग के साथ जलवायु साक्षरता और मौसम विज्ञान अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए एमओयू किए गए।
वैज्ञानिक अनुसंधान, पर्यावरण और साइबर सुरक्षा पर भी रहेगा फोकस
जबलपुर स्थित ट्रॉपिकल फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट, एडवांस्ड मैटेरियल्स एंड प्रोसेसेस रिसर्च इंस्टीट्यूट (AMPRI), भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (IIFM), भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान (IISS) और केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान सहित कई संस्थानों ने उच्च शिक्षा विभाग के साथ साझेदारी की है।
इसी तरह राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय साइबर सुरक्षा और फोरेंसिक विज्ञान आधारित कौशल विकास में सहयोग करेगा। वहीं मध्यप्रदेश पुलिस विद्यार्थियों में सुरक्षित और जिम्मेदार नागरिकता की भावना विकसित करने के लिए कार्य करेगी। श्रम विभाग रोजगारोन्मुख शिक्षा और कौशल विकास, राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान तकनीकी दक्षता और संकाय विकास, जबकि क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान भोपाल शिक्षक शिक्षा और शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार के क्षेत्र में सहयोग प्रदान करेगा।
रोजगार, कौशल और तकनीक आधारित शिक्षा पर MP सरकार का बड़ा फोकस
पूरे कार्यक्रम का सार यही रहा कि मध्यप्रदेश सरकार उच्च शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उसे रोजगार, कौशल, तकनीक, अनुसंधान और नवाचार से जोड़कर युवाओं के लिए बेहतर अवसर तैयार करना चाहती है। IITs और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ हुए ये समझौते आने वाले वर्षों में प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।


