
मध्य प्रदेश में निवेश को लेकर सरकार की कोशिशों को गुजरात में आयोजित निवेश संवाद से बड़ी मजबूती मिली है। अहमदाबाद में हुए मेगा निवेश संवाद के दौरान अलग-अलग उद्योगों से जुड़े 8,635 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव सामने आए हैं। सरकार के मुताबिक, इन प्रस्तावों के धरातल पर उतरने से 5,785 रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।
खास बात यह रही कि कार्यक्रम में गुजरात के अहमदाबाद, सूरत, भावनगर, राजकोट और वडोदरा जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों से 500 से ज्यादा उद्योगपति, निवेशक और कॉरपोरेट प्रतिनिधि शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निवेशकों को मध्य प्रदेश की औद्योगिक संभावनाओं से अवगत कराया और उन्हें आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 में शामिल होने का न्योता भी दिया।
अहमदाबाद निवेश संवाद में सामने आए प्रस्तावों में सीमेंट, पैकेजिंग, फूड प्रोसेसिंग, फार्मा, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग, केमिकल, एयरोस्पेस और डिफेंस जैसे कई क्षेत्र शामिल हैं। सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, गोल्डक्रेस्ट सीमेंट ने 3,000 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया है। इससे करीब 1,500 रोजगार के अवसर बनने की संभावना जताई गई है। वहीं एजियोस पॉलीफिल्म्स के 2,500 करोड़ रुपये के प्रस्ताव से करीब 1,000 रोजगार मिलने की उम्मीद है।
फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र में गुजरात अंबुजा एक्सपोर्ट्स की ओर से 1,200 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव की जानकारी दी गई है, जिससे 500 रोजगार के अवसर बनने की संभावना है। फार्मास्युटिकल क्षेत्र में एरिस लाइफसाइंसेज का 500 करोड़ रुपये का प्रस्ताव है, जिससे करीब 800 रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। इसके अलावा टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग, केमिकल, पैकेजिंग, फूड प्रोसेसिंग और एयरोस्पेस-डिफेंस से जुड़े कई अन्य निवेश प्रस्ताव भी सामने आए हैं। सरकार के अनुसार, सभी प्रस्तावों को मिलाकर निवेश का आंकड़ा 8,635 करोड़ रुपये और संभावित रोजगार 5,785 तक पहुंचता है।
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मध्य प्रदेश सरकार ने निवेशकों के सामने प्रदेश की उन सुविधाओं को प्रमुखता से रखा, जिन्हें उद्योग स्थापित करने के लिए जरूरी माना जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि निवेशकों को बिजली, पानी और जमीन जैसी बुनियादी जरूरतों को लेकर चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। सरकार के मुताबिक, औद्योगिक जमीन रियायती दरों पर लीज पर उपलब्ध है। इसके अलावा पर्याप्त जल उपलब्धता, बिजली की उपलब्धता और नए प्लग एंड प्ले इंडस्ट्रियल जोन विकसित किए जा रहे हैं। करीब 19 हजार एकड़ क्षेत्र में 48 नए इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किए जाने की जानकारी भी दी गई।
निवेशकों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम को भी सरकार ने अपनी प्रमुख सुविधाओं में गिनाया। दावा है कि उद्योग से जुड़ी अलग-अलग मंजूरियों और प्रक्रियाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए आसान बनाने की कोशिश की गई है।
औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने निवेशकों को मध्य प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर और लैंड बैंक की जानकारी दी। उनके अनुसार, राज्य में उद्योग स्थापित करने के लिए एक लाख एकड़ से ज्यादा का लैंड बैंक उपलब्ध है। कनेक्टिविटी के लिहाज से प्रदेश में 8 एयरपोर्ट, 22 रेल जंक्शन और तेजी से विकसित हो रहे लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर का उल्लेख किया गया। सरकार ने अलग-अलग क्षेत्रों के लिए डेडिकेटेड इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने की योजना भी बताई, जिनमें मुरैना का फुटवियर पार्क, उज्जैन का मेडिकल डिवाइस पार्क और रायसेन का प्लास्टिक पार्क शामिल हैं।
अहमदाबाद का निवेश संवाद सिर्फ निवेश प्रस्तावों तक सीमित नहीं रहा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुजरात और मध्य प्रदेश की औद्योगिक क्षमताओं को एक-दूसरे का पूरक बताया। उनके मुताबिक, गुजरात के पास तकनीक, व्यापार और औद्योगिक अनुभव है, जबकि मध्य प्रदेश के पास पर्याप्त जल, लैंड बैंक और देश के मध्य में स्थित होने का लॉजिस्टिक्स फायदा है। पेट्रोकेमिकल, केमिकल, टेक्सटाइल, फार्मा, फूड प्रोसेसिंग और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में दोनों राज्यों के बीच सहयोग की बड़ी संभावना बताई गई।
मध्य प्रदेश सरकार ने बीना की पेट्रोकेमिकल रिफाइनरी, उज्जैन के मेडिकल डिवाइस पार्क, धार के पीएम मित्र पार्क और पीथमपुर के ऑटोमोबाइल क्लस्टर को भी निवेश के प्रमुख अवसरों के तौर पर सामने रखा।
मध्य प्रदेश की निवेश रणनीति सिर्फ पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं है। सरकार ने IT, ड्रोन, स्पेस टेक और सेमीकंडक्टर जैसे उभरते क्षेत्रों में भी निवेश की संभावनाओं पर जोर दिया। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव एम. सेल्वेंद्रन ने बताया कि इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में IT सेक्टर के लिए सुविधाएं उपलब्ध हैं। इंदौर में TCS की यूनिट में 16 हजार से ज्यादा कर्मचारियों के काम करने का उल्लेख किया गया, जबकि इंफोसिस के विस्तार की जानकारी भी दी गई।
सरकार भोपाल में ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग और ड्रोन टेस्टिंग से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। स्पेस टेक पॉलिसी के तहत 40 से 60 प्रतिशत तक कैपिटल सब्सिडी देने की बात भी निवेशकों के सामने रखी गई।
निवेश संवाद के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रमुख उद्योग समूहों के प्रतिनिधियों के साथ 15 से ज्यादा वन-टू-वन बैठकें कीं। इनमें निवेश प्रस्तावों, औद्योगिक विस्तार और मध्य प्रदेश में उपलब्ध सुविधाओं पर चर्चा हुई। अरविंद लिमिटेड के साथ पीएम मित्र पार्क में प्रस्तावित 1,200 करोड़ रुपये के निवेश को जल्द लागू करने पर बातचीत हुई। वहीं टोरेंट पावर के साथ अनूपपुर में प्रस्तावित 1,600 मेगावाट की ताप विद्युत परियोजना पर चर्चा की गई। इसके अलावा चिरपाल ग्रुप, गोल्डक्रेस्ट सीमेंट, गुजरात अंबुजा, एजियोस पॉलीफिल्म्स और एरिस लाइफसाइंसेज समेत कई उद्योग समूहों के निवेश प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई।
मध्य प्रदेश सरकार के अनुसार, पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश को अलग-अलग क्षेत्रों में 34 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें से 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं, ऐसा सरकार की ओर से बताया गया है। नवीकरणीय ऊर्जा, पंप्ड हाइड्रो और बायोमास जैसे क्षेत्रों में भी बड़े निवेश प्रस्ताव मिलने की जानकारी दी गई है। सरकार का जोर अब इन प्रस्तावों को वास्तविक औद्योगिक परियोजनाओं में बदलने और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर है।
अहमदाबाद में मिले 8,635 करोड़ रुपये के प्रस्ताव मध्य प्रदेश के लिए निश्चित तौर पर एक सकारात्मक संकेत हैं। हालांकि, किसी भी निवेश प्रस्ताव और वास्तविक निवेश के बीच जमीन अधिग्रहण, मंजूरियां, वित्तीय व्यवस्था, निर्माण और उत्पादन शुरू होने जैसी कई प्रक्रियाएं होती हैं।
इसलिए इन प्रस्तावों का वास्तविक असर तब दिखाई देगा, जब परियोजनाएं जमीन पर उतरेंगी और इनमें रोजगार के अवसर वास्तव में पैदा होंगे। फिलहाल सरकार का फोकस निवेशकों को आकर्षित करने के साथ-साथ अपने पुराने वादों और निवेश प्रोत्साहनों को समय पर पूरा करने पर भी है। सरकार का दावा है कि बड़े उद्योगों और MSME इकाइयों की पिछली निवेश प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जा चुका है। आने वाले समय में मध्य प्रदेश के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि निवेश के इन बड़े आंकड़ों को वास्तविक फैक्ट्रियों, उत्पादन और स्थायी रोजगार में कितनी तेजी से बदला जाता है। इसके लिए अब उद्योग जगत की नजर ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 और उससे पहले प्रस्तावित परियोजनाओं की प्रगति पर रहेगी।
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