MP News: IIT की रिपोर्ट में पास हुई ओंकारेश्वर की 'एकात्मता की मूर्ति', 500 साल तक रहेगी सुरक्षित

Published : Jul 10, 2026, 08:52 AM IST
omkareshwar katmata ki murti iit delhi report

सार

ओंकारेश्वर में स्थापित 108 फीट ऊंची 'एकात्मता की मूर्ति' IIT के परीक्षणों में पूरी तरह सुरक्षित पाई गई। इसकी डिजाइन लाइफ 500 वर्ष से अधिक बताई गई है।

मध्यप्रदेश के पवित्र तीर्थ ओंकारेश्वर स्थित 'एकात्म धाम' में स्थापित आदिगुरु शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची बहुधातु प्रतिमा 'एकात्मता की मूर्ति' पूरी तरह सुरक्षित और मजबूत है। संस्कृति विभाग के 'आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास' द्वारा वर्ष 2023 में स्थापित इस प्रतिमा का निर्माण आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुसार किया गया है।

प्रतिमा के निर्माण, डिजाइन और सुरक्षा मूल्यांकन के लिए देश और विदेश की प्रतिष्ठित विशेषज्ञ संस्थाओं की सेवाएं ली गईं, ताकि इसकी गुणवत्ता और दीर्घकालिक मजबूती सुनिश्चित की जा सके।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी बनाने वाली कंपनी L&T ने किया निर्माण

मुख्य अभियंता एवं परियोजना संचालक एकात्म धाम राजीव श्रीवास्तव ने बताया कि इस ऐतिहासिक प्रतिमा का निर्माण मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के माध्यम से देश की अग्रणी कंपनी एल एंड टी (L&T) ने किया है। यही कंपनी दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' का भी निर्माण कर चुकी है। प्रतिमा की कास्टिंग का कार्य भी उसी विशेषज्ञ कंपनी जेटीक्यू ने किया, जिसने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी जैसी विश्वस्तरीय परियोजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और बड़ी संस्थाओं ने तैयार किया डिजाइन

परियोजना प्रबंधन सलाहकार के रूप में अंतरराष्ट्रीय कंपनी माइनहार्ट सिंगापुर को जिम्मेदारी सौंपी गई, जिसे बड़े और जटिल निर्माण कार्यों का वैश्विक अनुभव है। वहीं, प्रतिमा का डिजाइन देश की प्रतिष्ठित फर्म सी.पी. कुकरेजा एसोसिएट्स ने तैयार किया। यह संस्था यशोभूमि, भारत मंडपम् और वल्लभ भवन एनेक्सी जैसी कई प्रमुख राष्ट्रीय परियोजनाओं का डिजाइन भी तैयार कर चुकी है।

IIT मद्रास और IIT दिल्ली ने किया सुरक्षा परीक्षण

प्रतिमा की मजबूती और संरचनात्मक स्थायित्व सुनिश्चित करने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास और IIT दिल्ली से विस्तृत तकनीकी परीक्षण और परामर्श लिया गया। IIT मद्रास ने प्रतिमा का मिक्स डिजाइन और अत्याधुनिक सीजमिक एनालिसिस यानी भूकंप संबंधी परीक्षण किए। वहीं IIT दिल्ली के तकनीकी मूल्यांकन में इस प्रतिमा की डिजाइन लाइफ 500 वर्ष या उससे अधिक आंकी गई है। इससे स्पष्ट होता है कि यह संरचना लंबे समय तक सुरक्षित रहने के लिए तैयार की गई है।

भूकंप और तेज आंधी-तूफान का भी कर सकती है सामना

हालांकि ओंकारेश्वर क्षेत्र सीजमिक जोन-3 में आता है, लेकिन प्रतिमा की पूरी संरचनात्मक डिजाइनिंग अधिक संवेदनशील सीजमिक जोन-4 के मानकों के अनुसार तैयार की गई है। परीक्षणों में यह डिजाइन पूरी तरह सुरक्षित पाई गई।

इसके अलावा जर्मनी की प्रसिद्ध विंड इंजीनियरिंग कंपनी वर्नर सोबेक एजी ने प्रतिमा का विंड टनल परीक्षण किया। जहां क्षेत्र के लिए 140 किलोमीटर प्रति घंटे की हवा को मानक माना जाता है, वहीं इस प्रतिमा का परीक्षण 169 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज हवा को ध्यान में रखकर किया गया। इससे यह प्रतिमा अत्यधिक खराब मौसम में भी सुरक्षित रहने में सक्षम है।

आधुनिक सॉफ्टवेयर परीक्षण में भी साबित हुई पूरी तरह सुरक्षित

विश्वस्तरीय स्ट्रक्चरल सॉफ्टवेयर ETABS के माध्यम से किए गए विश्लेषण में भी प्रतिमा पूरी तरह सुरक्षित पाई गई। जहां अनुमेय स्ट्रेस रेशियो की सीमा 0.85 निर्धारित है, वहीं इस प्रतिमा का वास्तविक स्ट्रेस रेशियो केवल 0.4 दर्ज किया गया, जो तय सुरक्षा मानकों से काफी बेहतर है।

कई सदियों तक श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहेगी प्रतिमा

परियोजना से जुड़े तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, प्रतिमा का पेडेस्टल और मुख्य ढांचा पूरी तरह संतुलित और मजबूत स्थिति में है। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार की गई यह 108 फीट ऊंची 'एकात्मता की मूर्ति' आने वाली कई सदियों तक देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आस्था, संस्कृति और प्रेरणा का प्रमुख केंद्र बनी रहेगी।

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