
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 10 अगस्त को मंत्रालय में प्रदेश में कम वर्षा की स्थिति और उससे पैदा हुए हालात की समीक्षा की। बैठक में मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बारिश, जलभराव, बांधों में पानी और खेती से जुड़े हालात पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मानसून प्रदेश में औसत से करीब 15 प्रतिशत कम बारिश हुई है। कुछ जिलों में बारिश कम रही है, जबकि आने वाले दिनों में कुछ क्षेत्रों में ज्यादा बारिश होने का अनुमान है। फिलहाल प्रदेश के करीब आधे जिलों में सामान्य वर्षा हुई है।
डॉ. यादव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि मौसम की इस असामान्य स्थिति का असर किसानों और आम नागरिकों पर न पड़े। कम बारिश वाले इलाकों में अभी से जरूरी इंतजाम किए जाएं और जहां ज्यादा बारिश की संभावना है, वहां भी प्रशासन पूरी तरह तैयार रहे।
बैठक में मुख्यमंत्री को बताया गया कि 1 जून से 10 अगस्त के बीच प्रदेश में सामान्य तौर पर 571 मिलीमीटर बारिश होती है। इस अवधि में इस साल 483 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई है। यानी बारिश सामान्य से करीब 15 प्रतिशत कम रही है। क्षेत्रवार आंकड़ों के मुताबिक पूर्वी मध्यप्रदेश में 513.20 मिलीमीटर और पश्चिमी मध्यप्रदेश में 459.80 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई है। प्रदेश की कुल औसत वर्षा 949.50 मिलीमीटर बताई गई है। फसल बोवनी की स्थिति पर बताया गया कि प्रदेश में अब तक 84 प्रतिशत धान की बोवनी पूरी हो चुकी है।
कम बारिश की स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री ने आने वाली रबी फसल के लिए भी अभी से तैयारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को ऐसी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाए, जिनमें कम सिंचाई की जरूरत होती है। मुख्यमंत्री ने खासतौर पर चना फसल के लिए पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा। उनका जोर इस बात पर रहा कि कम पानी की स्थिति का असर अगली फसल पर कम से कम पड़े और किसानों को समय पर जरूरी संसाधन मिलते रहें।
बैठक में प्रदेश के बांधों और जलाशयों की स्थिति की भी जानकारी दी गई। 10 अगस्त तक प्रदेश के बांधों में करीब 49 प्रतिशत जलभराव है। यह औसत से लगभग 10 प्रतिशत कम है। पिछले पांच वर्षों में प्रदेश में इस समय तक औसतन 59 प्रतिशत जलभराव रहा है। वहीं पिछले वर्ष 10 अगस्त तक बांधों में जलभराव करीब 75 प्रतिशत था। प्रदेश में 36 ऐसे जलाशय हैं, जिनमें 50 प्रतिशत या उससे कम पानी है। वहीं 18 जलाशयों में जलभराव 50 से 90 प्रतिशत के बीच है।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि बारिश की स्थिति और जल संग्रहण की लगातार निगरानी की जाए। तालाबों और अन्य प्रमुख जल स्रोतों के जलस्तर पर भी नियमित नजर रखी जाए। राज्य और जिला स्तर पर आपदा कंट्रोल रूम लगातार सक्रिय रहें। जलभराव और बारिश से हुए नुकसान की जानकारी तुरंत दर्ज की जाए। साथ ही बाढ़ या जलभराव की आशंका वाले क्षेत्रों से लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की योजना तैयार रखी जाए। अतिवृष्टि होने की स्थिति में जरूरत के अनुसार राहत शिविरों की व्यवस्था भी पहले से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने किसानों से जुड़े इंतजामों को लेकर भी अधिकारियों को कई निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खाद और बीज की उपलब्धता में किसी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए। किसानों को फसल बीमा योजना से अधिक से अधिक जोड़ा जाए, ताकि मौसम की मार से होने वाले नुकसान की स्थिति में उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
सिंचाई के समय किसानों को पर्याप्त और सुचारू बिजली मिले, इसकी व्यवस्था भी सुनिश्चित करने को कहा गया। इसके साथ ही बारिश के बाद खराब होने वाली सड़कों के संधारण का काम भी तेजी से कराने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर किसी बांध से पानी छोड़ा जाता है तो निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को समय रहते इसकी सूचना मिलनी चाहिए। प्रशासन को पहले से चेतावनी जारी कर लोगों को सतर्क करने की व्यवस्था मजबूत रखने के निर्देश दिए गए। बारिश के मौसम में संक्रामक बीमारियों की रोकथाम पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया। सभी जिलों में पर्याप्त मात्रा में जरूरी दवाइयां उपलब्ध रहें और स्वास्थ्य विभाग किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहे।
अतिवृष्टि या जलभराव से जिन किसानों की फसल प्रभावित होती है, उनका सर्वेक्षण राजस्व विभाग की टीमें पारदर्शिता के साथ करेंगी। मुख्यमंत्री ने फसल नुकसान का सही आकलन कराने और पात्र किसानों को आपदा राहत कोष से मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नुकसान का सर्वे समय पर और वास्तविक स्थिति के आधार पर किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने अब तक हुई मूंग खरीदी की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिया कि जहां गुणवत्ता को लेकर शिकायत हो या किसी तरह की बेईमानी सामने आए, वहां तुरंत कार्रवाई की जाए। जहां खरीदी प्रक्रिया में कोई अड़चन आ रही है, वहां जरूरत के अनुसार विशेष टीम गठित कर काम पूरा कराया जाए। कालाबाजारी की शिकायतों पर भी तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों से किसानों और किसान संगठनों के साथ लगातार संवाद बनाए रखने को कहा, ताकि जमीनी स्तर की समस्याओं की जानकारी समय पर मिल सके और उनका समाधान किया जा सके।
बैठक में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, सामाजिक न्याय मंत्री नारायण सिंह कुशवाह और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके मौजूद रहीं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर और कृषि मंत्री एन्दल सिंह कंषाना वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक से जुड़े। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहे।
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