
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 10 अगस्त को मंत्रालय में स्वतंत्रता दिवस समेत आने वाले पर्वों की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में उन्होंने कहा कि बलराम कृषि महोत्सव सिर्फ किसानों तक सीमित आयोजन नहीं है, बल्कि यह भारतीय कृषि संस्कृति का उत्सव है। इसलिए इसे सांस्कृतिक पर्व के रूप में मनाया जाना चाहिए।
प्रदेश के सभी जिलों में इन दिनों बलराम कृषि महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। महोत्सव में उन्नत कृषि तकनीकों और आधुनिक खेती पर आधारित प्रदर्शनियां भी लगाई जा रही हैं। बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण इन आयोजनों में शामिल हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की यह भागीदारी बताती है कि वे स्वप्रेरणा से इस महोत्सव से जुड़ रहे हैं।
डॉ. यादव ने संस्कृति विभाग को निर्देश दिए कि महोत्सव के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। इन आयोजनों के जरिए किसानों को मनोरंजन के साथ प्रदेश की संस्कृति और सरकार की उपलब्धियों की जानकारी भी दी जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस सहित आने वाले सभी पर्व पूरे उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाए जाएं। अपर मुख्य सचिव गृह विभाग संजय कुमार शुक्ल ने बैठक में बताया कि 14 अगस्त को वंदेमातरम् के 150 वर्ष पूरे होने और भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर भोपाल के शौर्य स्मारक में चित्र प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदर्शनी का शुभारंभ करेंगे और उसका अवलोकन भी करेंगे। इसी अवसर पर शौर्य स्मारक में ‘प्रवासी सेनानी वीथी’ का लोकार्पण भी किया जाएगा। इसमें प्रवासी भारतीयों और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उनके महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया जाएगा।
इसी स्थान से मुख्यमंत्री पुलिस बल की तिरंगा बाइक रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। रैली शौर्य स्मारक से शुरू होकर शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरेगी और वापस शौर्य स्मारक पहुंचकर समाप्त होगी।
स्वतंत्रता दिवस पर 15 अगस्त की सुबह 8:30 बजे शौर्य स्मारक, भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शहीद स्तंभ पर पुष्पचक्र अर्पित करेंगे। इसके बाद भारत माता की प्रतिमा पर भी पुष्पांजलि अर्पित की जाएगी। वहीं शाम 6:30 बजे रवीन्द्र भवन के हंसध्वनि सभागार में ‘आजादी का महापर्व’ कार्यक्रम आयोजित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मौजूदगी में होने वाले इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध पार्श्व गायिका कविता कृष्णमूर्ति और उनका दल सांगीतिक प्रस्तुति देगा।
बैठक में मुख्यमंत्री ने श्रावण मास के दौरान चल रही कांवड़ यात्रा को लेकर भी अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कांवड़िये लगातार शिवालयों की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे में उनके सुगम आवागमन के साथ भोजन, पानी और सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि कांवड़ियों को यात्रा के दौरान किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। संबंधित विभाग और जिला प्रशासन इस बात को सुनिश्चित करें कि मार्गों पर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध रहें।
अपर मुख्य सचिव संस्कृति शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि 28 अगस्त को रक्षाबंधन को रक्षा पर्व के रूप में मनाया जाएगा। इस वर्ष इसे सामाजिक संबंधों के राष्ट्रीय पर्व के तौर पर मनाने की तैयारी है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री निवास में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लाड़ली बहनों से रक्षा सूत्र बंधवाएंगे। इसके साथ ही प्रदेश के वरिष्ठजन समाज के कमजोर वर्गों, जरूरतमंदों और निराश्रित लोगों की रक्षा का संकल्प लेते हुए उनसे रक्षा सूत्र बंधवाएंगे।
अपर मुख्य सचिव संस्कृति ने बताया कि 2 सितंबर को बलराम जयंती मनाई जाएगी। इस दौरान संस्कृति विभाग की ओर से कृषि से जुड़े पारंपरिक कलारूपों की प्रस्तुतियां होंगी। खेल एवं युवा कल्याण विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतियोगिताएं आयोजित करेगा। वहीं किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग आधुनिक कृषि उपकरण, खाद, बीज और औषधियों पर केंद्रित प्रदर्शनियां लगाएगा। इन आयोजनों के साथ सह-संवाद कार्यक्रम भी होंगे।
संस्कृति विभाग की ओर से 29 अगस्त से 6 सितंबर तक प्रदेश में ‘श्रीकृष्ण पर्व’ मनाया जाएगा। इसके तहत 29 अगस्त से 4 सितंबर तक रवीन्द्र भवन में सात दिवसीय श्री रासलीला समारोह समेत कई कार्यक्रम होंगे। प्रदेश के 101 स्थानों पर भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं पर आधारित सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रीकृष्ण पर्व से जुड़े आयोजनों में स्कूल शिक्षा विभाग, जनजातीय कार्य विभाग और नगरीय निकायों को भी शामिल करने के निर्देश दिए हैं।
श्रीकृष्ण पर्व के दौरान प्रदेश के 25 ऐसे स्थलों को भी शामिल किया जाएगा, जो भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और उनसे जुड़े प्रसंगों से संबंधित हैं। इन स्थानों पर संबंधित प्रसंग और आख्यान के अनुसार कलाकार प्रस्तुतियां देंगे। यहां लीला पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण पर केंद्रित गतिविधियां, विभिन्न प्रसंगों पर नृत्य-नाट्य प्रस्तुतियां और भगवान बलराम-श्रीकृष्ण केंद्रित भक्ति गायन कार्यक्रम भी होंगे।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर प्रदेश के सभी श्रीकृष्ण मंदिरों, मठों और देवालयों का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। इसके साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता अभियान भी चलाया जाएगा। प्रत्येक जिले के महत्वपूर्ण स्थलों पर संस्कृति विभाग की ओर से विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों को लेकर कलेक्टरों को निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
जन्माष्टमी के दौरान श्रीकृष्ण मंदिरों में होने वाले कार्यक्रमों में तीर्थ स्थान एवं मेला प्राधिकरण का सहयोग भी लिया जाएगा। सरकार की कोशिश है कि इन आयोजनों के जरिए धार्मिक आस्था के साथ प्रदेश की सांस्कृतिक परंपराओं को भी व्यापक रूप से सामने लाया जाए।
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