
मध्यप्रदेश सोयाबीन उत्पादन के साथ खाद्य प्रसंस्करण और उद्योग के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में आयोजित 9वें अंतर्राष्ट्रीय सोया कॉन्क्लेव-2026 में कहा कि सोयाबीन प्रदेश की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण विकास का बड़ा आधार है। इससे किसानों की आय बढ़ाने, युवाओं को रोजगार देने और निवेश के नए अवसर तैयार करने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सोया कॉन्क्लेव में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को देश में सोया स्टेट के रूप में पहचान मिली है। यहां पैदा होने वाला सोयाबीन अब देश के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी जगह बना रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, एमएसएमई और अन्य उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रही है। सरकार का लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ प्रदेश में निवेश और रोजगार के नए अवसर तैयार करना है।
सीएम डॉ. यादव के मुताबिक, देश में सोयाबीन की खेती के कुल क्षेत्रफल का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा मध्यप्रदेश में है। वहीं, देश के कुल उत्पादन में प्रदेश की हिस्सेदारी 35 प्रतिशत से अधिक बताई गई। पिछले साल मध्यप्रदेश में करीब 53 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की खेती हुई और लगभग 56 लाख मीट्रिक टन उत्पादन हुआ।
प्रदेश के 50 से अधिक जिलों में सोयाबीन की खेती होती है। मालवा और निमाड़ क्षेत्र इसके प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों में शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिकूल मौसम और अल नीनो जैसी चुनौतियों के बावजूद किसानों ने अच्छा काम किया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित किए गए हैं। इन आयोजनों से स्थानीय संसाधनों के इस्तेमाल और रोजगार के नए अवसर तैयार करने में मदद मिली है।
उन्होंने कहा कि पिछले ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में करीब 30 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले थे। इनमें से 30 प्रतिशत से अधिक प्रस्तावों के जमीन पर उतरने की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार निवेश प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, प्रदेश में उपलब्ध जमीन, बिजली और पानी जैसी सुविधाएं उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर रही हैं।
सीएम डॉ. यादव ने कहा कि सोयाबीन की प्रोसेसिंग, भंडारण और मार्केटिंग को मजबूत करना जरूरी है। इससे कृषि उपज का बेहतर इस्तेमाल होगा और किसानों को अपने उत्पादों का अच्छा दाम मिलने की संभावनाएं बढ़ेंगी।
उन्होंने खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता और पोषण सुरक्षा पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक शोध और बेहतर प्रोसेसिंग के जरिए सोयाबीन से जुड़े उद्योगों को आगे बढ़ाया जा सकता है। इससे खाद्य तेल के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए भोपाल, इंदौर और जबलपुर क्षेत्र को जोड़ने वाले इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की घोषणा कैबिनेट में की गई है। इसका उद्देश्य प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना और स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाना है।
उन्होंने कहा कि सोयाबीन और खाद्य तेल उद्योग मध्यप्रदेश को कृषि आधारित उद्योगों का प्रमुख केंद्र बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
सोया उद्योग से जुड़े कारोबारियों का सम्मान
सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) की ओर से आयोजित इस कॉन्क्लेव का विषय 'आत्मनिर्भर भारत – पावरिंग द ऑयल एंड प्रोटीन विजन' रहा। इसमें देश-विदेश के 500 से अधिक प्रतिनिधियों, कृषि वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, उद्योगपतियों और किसानों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोयाबीन के उत्पादन, प्रोसेसिंग, मैन्युफैक्चरिंग, निर्यात और रिफाइंड ऑयल के विपणन सहित विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाली कंपनियों के करीब 15 उद्योगपतियों और प्रतिनिधियों को सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक, बेहतर गुणवत्ता और नए बाजारों पर ध्यान देकर सोया उद्योग को मजबूत बनाया जा सकता है। इससे किसानों की आय, रोजगार और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
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