
भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 8 जुलाई को हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के विकास, शिक्षा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, सिंचाई, स्वास्थ्य, पर्यावरण और निवेश को बढ़ावा देने से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगी। मंत्रिपरिषद ने करोड़ों रुपये की विभिन्न योजनाओं को मंजूरी देते हुए कई नई नीतियों और संशोधनों को भी स्वीकृति प्रदान की।
बैठक में मुख्यमंत्री स्कूटी योजना को वर्ष 2031 तक जारी रखने, स्टेट डेटा सेंटर 3.0 परियोजना, नमो हरित-नगर योजना, विज्ञान पार्क, बायोटेक पार्क, एकल नागरिक डेटाबेस और सिंचाई परियोजनाओं के पुनर्वास पैकेज सहित अनेक प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इसके अलावा ईएसडीएम इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी-2023 में संशोधन और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (मध्यप्रदेश संशोधन) विधेयक-2026 को भी कैबिनेट की स्वीकृति मिली।
कैबिनेट बैठक में राज्यभर में अधोसंरचना विकास और पुनर्वास कार्यों के लिए लगभग 2300 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत स्वामित्व योजना में तैयार किए गए हस्तांतरण अभिलेखों पर अतिरिक्त स्टांप शुल्क से छूट देने का भी निर्णय लिया गया।
इसके साथ ही खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की मध्यप्रदेश उपार्जित गेहूं, चना, ज्वार और बाजरा निस्तारण नीति-2026 को मंजूरी दी गई। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के प्रस्ताव के अनुसार प्रदेश के 65 नगरीय निकायों में नगर वन विकसित करने के लिए 'नमो हरित-नगर योजना' के तहत 100 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए।
कैबिनेट ने मध्यप्रदेश स्टेट डेटा सेंटर (एसडीसी) 3.0 परियोजना को मंजूरी देते हुए इसके विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए 800 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। इस परियोजना के तहत राज्य के डेटा सेंटर को नई तकनीकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा। आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के साथ-साथ डिजास्टर रिकवरी सिस्टम का विस्तार और आवश्यक नॉन-आईटी सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा।
भोपाल स्थित स्टेट डेटा सेंटर वर्ष 2012 से लगातार संचालित हो रहा है और राज्य सरकार के विभिन्न विभागों की डिजिटल सेवाओं और आईटी एप्लिकेशन की होस्टिंग का प्रमुख केंद्र है। नागरिकों को ऑनलाइन सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
सरकार का कहना है कि डिजिटल सेवाओं की लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए डेटा सेंटर को भविष्य की तकनीकों के अनुरूप विकसित करना जरूरी हो गया है। एसडीसी 3.0 परियोजना को तीन चरणों में लागू किया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य राज्य में सुरक्षित, स्केलेबल और हाई-एफिशिएंसी डेटा सेंटर तैयार करना है।
कैबिनेट ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं को भी मंजूरी दी। इनमें विज्ञान पार्क, एकल नागरिक डेटाबेस परियोजना और बायोटेक्नोलॉजी पार्क की स्थापना और संचालन शामिल है। इन योजनाओं के लिए कुल 123 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस राशि में विज्ञान पार्क के लिए 39.39 करोड़ रुपये, एकल नागरिक डेटाबेस के लिए 75 करोड़ रुपये तथा बायोटेक पार्क के लिए 8.59 करोड़ रुपये शामिल हैं।
उज्जैन स्थित आचार्य वराहमिहिर न्यास परिसर में अत्याधुनिक तारामंडल और खगोलीय वेधशाला विकसित की जा रही है। यहां एक मीटर का ऑप्टिकल टेलीस्कोप और 4.5 मीटर का रेडियो टेलीस्कोप स्थापित किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और विज्ञान के क्षेत्र में काम करने वाले युवाओं को उच्चस्तरीय अध्ययन और अनुसंधान का अवसर मिलेगा।
सरकार का मानना है कि यह परियोजना खगोल विज्ञान के अध्ययन को बढ़ावा देने के साथ-साथ वैज्ञानिक सोच विकसित करने और अंधविश्वासों को कम करने में भी मदद करेगी। साथ ही उज्जैन को राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख विज्ञान एवं खगोलीय अनुसंधान केंद्र के रूप में विकसित करने में यह महत्वपूर्ण साबित होगी।
राज्य सरकार एकल नागरिक डेटाबेस परियोजना पर भी तेजी से काम कर रही है। इस परियोजना के तहत प्रदेश के सभी नागरिकों का एकीकृत डेटाबेस तैयार किया जाएगा, जिससे सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ पहले से अधिक तेज, पारदर्शी और आसान तरीके से मिल सकेगा।
इस व्यवस्था से अलग-अलग विभागों में बार-बार पंजीकरण कराने की जरूरत कम होगी। प्रमाणित जानकारी के आधार पर नागरिकों को कई सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म से उपलब्ध कराई जा सकेंगी। इसके साथ "परिचय" परियोजना के माध्यम से आधार आधारित प्रमाणीकरण और ई-केवाईसी सेवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे डीबीटी प्रणाली और अधिक प्रभावी होगी।
कैबिनेट ने स्कूल शिक्षा विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए मुख्यमंत्री स्कूटी योजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने का फैसला किया है। इस योजना के संचालन के लिए कुल 495 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
इस योजना का लाभ स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग के तहत संचालित शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूलों के उन विद्यार्थियों को मिलेगा, जो पहली बार नियमित परीक्षार्थी के रूप में शामिल होकर कम से कम 70 प्रतिशत अंक प्राप्त करेंगे और अपने स्कूल में प्रथम स्थान हासिल करेंगे।
सरकार के अनुसार इस योजना का उद्देश्य मेधावी छात्राओं के साथ-साथ छात्रों को भी प्रोत्साहित करना और उच्च शिक्षा के लिए बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है।
मंत्रिपरिषद ने मध्यप्रदेश उपार्जित गेहूं, चना, ज्वार एवं बाजरा निस्तारण नीति-2026 को भी मंजूरी दे दी है। इस नीति के तहत सरकारी उपार्जन के बाद खाद्यान्नों की बिक्री अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से की जाएगी, ताकि किसानों की उपज का बेहतर मूल्य सुनिश्चित किया जा सके।
इसके लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक राज्य स्तरीय समिति गठित होगी। यह समिति उपलब्ध स्टॉक का आकलन करेगी, रिजर्व प्राइस तय करेगी और ई-टेंडर या ई-ऑक्शन के माध्यम से बिक्री प्रक्रिया पूरी कराएगी। प्राप्त दरों की जांच और अंतिम स्वीकृति भी यही समिति देगी।
कैबिनेट ने मध्यप्रदेश आईटी, आईटीईएस एवं ईएसडीएम इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी-2023 में संशोधन को मंजूरी दे दी है। सरकार का उद्देश्य इस नीति को अधिक निवेशक-अनुकूल बनाना है ताकि इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी और डेटा सेंटर क्षेत्र में नए निवेश आकर्षित किए जा सकें।
संशोधित नीति के तहत पहले से कार्यरत आईटी या डेटा सेंटर कंपनियों को विस्तार के लिए अपने मौजूदा निवेश में कम से कम 30 प्रतिशत अतिरिक्त निवेश करना होगा या अपने परिसर का क्षेत्रफल 30 प्रतिशत बढ़ाना होगा।
इसी तरह इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद बनाने वाली ईएसडीएम कंपनियों को मशीनरी में न्यूनतम 30 प्रतिशत या कम से कम 15 करोड़ रुपये (या 50 करोड़ रुपये, जो भी कम हो) का नया निवेश करना होगा। साथ ही उन्हें उत्पादन क्षमता में कम से कम 20 प्रतिशत वृद्धि भी करनी होगी।
इन शर्तों को पूरा करने वाली कंपनियों को नई इकाइयों की तरह सरकारी प्रोत्साहन और सुविधाएं मिलेंगी।
नई व्यवस्था के तहत उद्योगों को जमीन आवंटित करने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। सभी आवेदन डिजिटल माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। यदि किसी एक भूखंड के लिए एक से अधिक कंपनियां आवेदन करती हैं तो ई-बिडिंग के जरिए जमीन आवंटित की जाएगी।
हालांकि, बड़े निवेश वाले मेगा प्रोजेक्ट्स को ई-बिडिंग से छूट दी गई है। ऐसे प्रोजेक्ट्स को 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर जमीन आवंटित की जा सकेगी। कंपनियां एमपीआईडीसी के अलावा अन्य सरकारी विभागों की भूमि भी निर्धारित नियमों के अनुसार प्राप्त कर सकेंगी।
कैबिनेट ने स्वामित्व योजना के तहत तैयार किए गए अभिलेखों के पंजीयन पर देय अतिरिक्त स्टांप शुल्क और उपकर से छूट देने का फैसला किया है। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के दस्तावेजों का पंजीयन आसान होगा और लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम पड़ेगा।
मंत्रिपरिषद ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (मध्यप्रदेश संशोधन) विधेयक-2026 को भी मंजूरी प्रदान की है। अब इस विधेयक को आगे की विधायी प्रक्रिया के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।
कैबिनेट ने लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम योजना को वर्ष 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण कानूनी सहायता उपलब्ध कराना है।
योजना के तहत राज्य सरकार चरणबद्ध तरीके से अपना वित्तीय योगदान बढ़ाएगी।
पूरे कार्यक्रम के लिए लगभग 42 करोड़ रुपये की सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई है।
नगरीय विकास एवं आवास विभाग के प्रस्ताव पर कैबिनेट ने नमो हरित-नगर योजना के लिए 100 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इस योजना के तहत अगले पांच वर्षों में प्रदेश के 65 नगरीय निकायों में नगर वन विकसित किए जाएंगे।
प्रत्येक नगर निकाय में कम से कम आधा एकड़ क्षेत्र में एक नगर वन तैयार करने का प्रयास होगा। इसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाना, स्वच्छ हवा उपलब्ध कराना, जैव विविधता को बढ़ावा देना और पर्यावरण संतुलन मजबूत करना है। योजना के लिए राशि तीन चरणों में संबंधित निकायों को जारी की जाएगी।
कैबिनेट ने लोक वित्त पोषित कार्यक्रमों, योजनाओं और परियोजनाओं की निरंतरता को भी मंजूरी दी है। 16वें केंद्रीय वित्त आयोग की अवधि यानी 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक इन योजनाओं के संचालन के लिए 543.09 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस राशि से एनसीसी से जुड़े प्रशासनिक कार्य, कर्मचारियों के वेतन, कार्यालय संचालन और कैडेट्स के प्रशिक्षण जैसी गतिविधियों का संचालन किया जाएगा।
जल संसाधन विभाग के प्रस्ताव पर कैबिनेट ने केन-बेतवा लिंक परियोजना, रूंज मध्यम सिंचाई परियोजना और मझगांव मध्यम सिंचाई परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन के लिए 202 करोड़ 50 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि मंजूर की है। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों को बेहतर पुनर्वास सुविधा उपलब्ध कराना और विकास कार्यों को बिना बाधा आगे बढ़ाना इसका मुख्य उद्देश्य है।
कैबिनेट ने पन्ना जिले की केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत पुनर्वास पैकेज के लिए निर्धारित कटऑफ तिथि बढ़ाने का फैसला किया है। पहले वर्ष 2022 की अधिसूचना के आधार पर 1,890 परिवारों को पात्र माना गया था। बाद में आबादी क्षेत्र और मकानों के अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ने पर प्रभावित परिवारों और जनप्रतिनिधियों की मांग को देखते हुए कटऑफ तिथि में संशोधन किया गया।
अब 313 अतिरिक्त परिवारों को भी विशेष पुनर्वास पैकेज का लाभ मिलेगा। इसके लिए लगभग 39.12 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि स्वीकृत की गई है। इसके बाद इस परियोजना के पुनर्वास पर कुल स्वीकृत राशि बढ़कर 439.32 करोड़ रुपये हो गई है।
कैबिनेट ने रूंज मध्यम सिंचाई परियोजना से प्रभावित 730 परिवारों को राहत देने का भी निर्णय लिया। पहले प्रत्येक परिवार को 5 लाख रुपये का पुनर्वास अनुदान दिया जाना तय था। अब केन-बेतवा परियोजना की तर्ज पर प्रत्येक पात्र परिवार को 7.50 लाख रुपये अतिरिक्त दिए जाएंगे। इस तरह कुल पुनर्वास सहायता 12.50 लाख रुपये प्रति परिवार के बराबर हो जाएगी। इस निर्णय के लिए 54 करोड़ 75 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि मंजूर की गई है।
मझगांव मध्यम सिंचाई परियोजना से प्रभावित 1450 परिवारों को भी पुनर्वास पैकेज बढ़ाने का फैसला लिया गया है। इन परिवारों को पहले 5 लाख रुपये की सहायता मिलनी थी, लेकिन अब प्रत्येक परिवार को 7.50 लाख रुपये अतिरिक्त दिए जाएंगे, जिससे कुल सहायता राशि 12.50 लाख रुपये प्रति परिवार के बराबर हो जाएगी। इसके लिए सरकार ने 108 करोड़ 75 लाख रुपये की अतिरिक्त मंजूरी दी है।
प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के बड़ी संख्या में खाली पदों को भरने के लिए कैबिनेट ने नई भर्ती व्यवस्था को मंजूरी दी है। सरकार के अनुसार वर्तमान व्यवस्था में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) के माध्यम से पर्याप्त संख्या में विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं हो पा रहे थे, जिससे कई स्वास्थ्य संस्थानों में विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद लंबे समय से रिक्त पड़े थे। अब मध्यप्रदेश लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा (राजपत्रित) सेवा भर्ती नियम-2022 के तहत विभागीय स्तर पर सीधे भर्ती की जाएगी।
नई व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक महीने की एक तारीख को विभाग उपलब्ध रिक्तियां एमपी ऑनलाइन पोर्टल पर जारी करेगा। इसके बाद 15 तारीख तक आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। आवेदन प्राप्त होने के बाद विभागीय चयन समिति अगले निर्धारित बैठक दिवस पर सभी पात्र अभ्यर्थियों का साक्षात्कार करेगी। साक्षात्कार के आधार पर चयनित उम्मीदवारों के नाम राज्य सरकार को भेजे जाएंगे, जिसके बाद सीधे नियुक्ति आदेश जारी किए जाएंगे।
नई भर्ती प्रक्रिया के तहत चयनित विशेषज्ञ चिकित्सकों की पहली नियुक्ति उन्हीं स्थानों पर की जाएगी, जहां रिक्तियां प्रकाशित की गई थीं। सरकार ने यह भी तय किया है कि ऐसे डॉक्टरों का पहले तीन वर्षों तक स्थानांतरण नहीं किया जाएगा, ताकि दूरस्थ और जरूरत वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं लगातार उपलब्ध रह सकें।
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