MP News: CM मोहन यादव का बड़ा प्लान- सांदीपनि मॉडल से बदलेंगे स्कूल, छात्रों को मिलेगा AI और व्यावसायिक प्रशिक्षण

Published : May 21, 2026, 04:41 PM IST
Mohan Yadav school department review meeting

सार

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में स्कूलों में AI स्किल्स, व्यावसायिक प्रशिक्षण, विक्रमादित्य की जीवनी और सांदीपनि मॉडल लागू करने के निर्देश दिए। साथ ही सरकारी स्कूलों में बढ़ते नामांकन और शिक्षा घर योजना पर भी जोर दिया।

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने 21 मई को स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई बड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में प्रदेश के स्कूलों का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा। स्कूल केवल शिक्षा देने वाले संस्थान नहीं रहेंगे, बल्कि ऐसे विद्यार्थियों को तैयार करेंगे जो भविष्य में अपने ही विद्यालय के विकास में योगदान दे सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश को विकसित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार आधुनिक सुविधाओं से युक्त सांदीपनि विद्यालयों के माध्यम से मजबूत शैक्षणिक आधार तैयार कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि 16 जून से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र से पहले सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर ली जाएं।

स्कूलों में होंगे पूर्व छात्र सम्मेलन, विकास में देंगे योगदान

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि स्कूलों में पूर्व छात्र-छात्रा सम्मेलन आयोजित किए जाएं। इससे ऐसे लोग, जिनका अपने विद्यालय से भावनात्मक जुड़ाव है, वे स्कूलों के विकास और विस्तार में सहयोग कर सकेंगे। उन्होंने प्रदेश के हर विद्यार्थी तक बेहतर शिक्षा, संसाधन और सुविधाएं समय पर पहुंचाने को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।

सांदीपनि विद्यालय मॉडल को जन-जन तक पहुंचाने की तैयारी

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सांदीपनि विद्यालय की अवधारणा और इसकी योजनाओं को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के जिन स्कूलों का परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत रहा है, उन्हें सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जाएगा। बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में 26 ऐसे स्कूल हैं जहां सभी विद्यार्थी परीक्षा में सफल हुए हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि 90 और 95 प्रतिशत से अधिक रिजल्ट देने वाले स्कूलों को भी सम्मानित किया जाए।

उन्होंने अधिकारियों से ऐसे जिलों की अलग सूची तैयार करने को कहा जहां सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जबकि जिन जिलों में भौतिक और मानव संसाधनों की कमी है, उन्हें अलग श्रेणी में रखा जाए ताकि सरकार वहां प्राथमिकता के आधार पर काम कर सके।

विक्रमादित्य की जीवनी और गुरु सांदीपनि पर बनेगी पुस्तक

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को सम्राट वीर विक्रमादित्य की जीवनी को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही भगवान श्रीकृष्ण के गुरु सांदीपनि के जीवन पर एक रोचक पुस्तक तैयार करने को भी कहा गया। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि उनकी ओर से पूर्व में की गई घोषणाओं को जल्द पूरा किया जाए और एक वर्ष से अधिक पुरानी कोई भी घोषणा लंबित न रहे।

अतिथि शिक्षकों की भर्ती और स्कूल तैयारियों पर जोर

मुख्यमंत्री ने स्कूल शिक्षा विभाग की वर्तमान में चल रही 14 योजनाओं को जारी रखने की सहमति दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के हित में सरकार हर जरूरी कदम उठाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया 1 जुलाई से पहले पूरी कर ली जाए और नए सत्र से पहले स्कूलों में सभी आवश्यक तैयारियां पूरी हों।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटे बच्चों के लिए प्रारंभिक शिक्षा का बेहतर वातावरण तैयार किया जाए। इसके लिए महिला एवं बाल विकास विभाग भी स्कूल शिक्षा विभाग के साथ मिलकर कार्य करेगा। प्रदेश में पहली बार दोनों विभाग मिलकर बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर काम करेंगे।

गुरु पूर्णिमा तक चलेगा शिक्षक वंदना कार्यक्रम

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि 1 जुलाई से गुरु पूर्णिमा यानी 29 जुलाई तक प्रदेश के स्कूलों में शिक्षक वंदना कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। इन कार्यक्रमों में अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने निजी विद्यालय खोलने के लिए सामाजिक संस्थाओं और संगठनों को भी प्रोत्साहित करने की बात कही।

स्कूलों में मिलेगा व्यावसायिक और रोजगारपरक प्रशिक्षण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जाए। हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्तर पर कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और अन्य रोजगार आधारित पाठ्यक्रमों को शामिल करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर क्षेत्रीय स्व-सहायता समूहों को भी स्कूलों और विद्यार्थियों से जोड़ा जाए।

कक्षा 8 से 12 तक AI स्किल्स जोड़ने की तैयारी

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कक्षा 8 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कौशल को शिक्षा प्रणाली में शामिल करने की योजना तैयार की जाए। इसके साथ ही एनसीसी, एनएसएस और अन्य सामाजिक सेवा गतिविधियों को भी स्कूलों में बढ़ावा देने को कहा गया। स्वास्थ्य परीक्षण, ड्राइविंग लाइसेंस कैंप और प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।

पास आउट विद्यार्थियों की होगी ट्रैकिंग

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी स्कूलों से पढ़ाई पूरी करने वाले विद्यार्थियों की आगे की गतिविधियों पर भी नजर रखी जाए। यह पता लगाया जाए कि 12वीं के बाद विद्यार्थी उच्च शिक्षा, रोजगार, कृषि, पारिवारिक व्यवसाय या कौशल प्रशिक्षण में से किस क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे सरकार के पास युवाओं का एक व्यवस्थित डाटाबेस तैयार होगा।

सरकारी स्कूलों में बढ़ी नामांकन दर

बैठक में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव ने बताया कि सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के लिए किए गए प्रयासों का सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है। वर्ष 2025-26 में कक्षा 1 में नामांकन में 32.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं कक्षा 9 से 12 तक के नामांकन में 4.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो पिछले वर्षों की तुलना में सबसे अधिक है।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष 1 अप्रैल को प्रदेशभर में प्रवेशोत्सव कार्यक्रम आयोजित किया गया था और अप्रैल महीने में ही 92 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थियों का स्कूलों में प्रवेश सुनिश्चित कर लिया गया।

संस्कृति विद्यालय और शिक्षा घर योजना को मिली मंजूरी

बैठक में जानकारी दी गई कि राजगढ़ जिले के भैंसवामाता और नरसिंहपुर जिले के गाडरवाड़ा में संस्कृति विद्यालय शुरू किए गए हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने “शिक्षा घर योजना” के प्रस्तुतीकरण की सराहना करते हुए इसे सैद्धांतिक मंजूरी दी। इस योजना के माध्यम से वे विद्यार्थी, जो किसी कारणवश अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर सके, उन्हें हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी परीक्षा पास करने का अवसर मिलेगा।

यह योजना उन किशोर-किशोरियों और युवाओं के लिए लाभकारी होगी जिन्होंने कक्षा 8 या उससे आगे की पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी। योजना का संचालन मध्यप्रदेश राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा किया जाएगा और इसका लाभ पूरे प्रदेश में मिलेगा।

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