
भोपाल/उज्जैन। मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर को वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 30 जुलाई को बसंत विहार क्षेत्र में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत निर्माणाधीन रेप्टाइल पार्क (सर्प उद्यान) और अनुसंधान केंद्र का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों से परियोजना की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने और इसे जन-जागरूकता तथा वन्यजीव संरक्षण का प्रभावी केंद्र बनाने पर जोर दिया।
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि होमगार्ड जवानों को सांपों को सुरक्षित पकड़ने और रेस्क्यू करने का विशेष प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई इलाकों में अक्सर रिहायशी क्षेत्रों में सांप निकलने की घटनाएं सामने आती हैं। ऐसे मामलों में प्रशिक्षित होमगार्ड जवान लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए सर्पों को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा सकेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे एक ओर आम लोगों में डर और घबराहट कम होगी, वहीं दूसरी ओर वन्यजीव संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
निर्माणाधीन रेप्टाइल पार्क को अत्याधुनिक सुविधाओं से विकसित किया जा रहा है। यहां आगंतुकों के लिए कई विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं ताकि वे सरीसृपों के बारे में बेहतर तरीके से जानकारी प्राप्त कर सकें। परियोजना के तहत निम्न सुविधाओं का निर्माण किया जा रहा है:
इसके अलावा परिसर में एक विशेष स्नेक पार्क भी विकसित किया जाएगा, जहां लोगों को सांपों के प्राकृतिक व्यवहार, उनके जीवन चक्र और संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जाएंगी।
इस रेप्टाइल पार्क का उद्देश्य केवल सांपों और अन्य सरीसृपों का प्रदर्शन करना नहीं है, बल्कि लोगों के बीच इनके प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना भी है। अक्सर सांपों को लेकर लोगों में कई तरह की भ्रांतियां और भय देखने को मिलता है। यह केंद्र लोगों को समझाएगा कि अधिकांश सांप पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और जैव विविधता के लिए बेहद उपयोगी हैं।
रेप्टाइल पार्क को शिक्षा और अनुसंधान के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। यहां बच्चों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों को विभिन्न सरीसृप प्रजातियों के वैज्ञानिक अध्ययन का अवसर मिलेगा। इसके माध्यम से वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता और प्राकृतिक आवासों के महत्व के बारे में व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
परियोजना में विकसित किए जा रहे अत्याधुनिक रेस्क्यू सेंटर के माध्यम से घायल, बीमार अथवा संकटग्रस्त सर्पों और अन्य सरीसृपों का उपचार किया जाएगा। इसके बाद उन्हें पुनर्वास की प्रक्रिया से जोड़कर उनके प्राकृतिक आवासों में सुरक्षित छोड़ा जाएगा। इससे संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
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