
भोपाल/गया। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जब जनता किसी राजनीतिक दल को पांच साल के लिए जनादेश देती है, तो विपक्ष की जिम्मेदारी होती है कि वह अपनी भूमिका निभाए, संगठन को मजबूत करे और इस बात पर आत्ममंथन करे कि जनता उससे दूर क्यों हो रही है। इसके बजाय राहुल गांधी और उनके साथी अगर अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश करते हैं, तो यह उचित नहीं है। मुख्यमंत्री ने ऐसे प्रयासों की निंदा की। उन्होंने ये बातें शनिवार को बिहार प्रवास के दौरान मीडिया से बातचीत में कहीं।
सीएम डॉ. यादव ने कांग्रेस से निर्वाचन आयोग को लेकर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा। उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस निर्वाचन आयोग का विरोध क्यों करती है, जबकि केरल में उसकी सरकार है। उनके मुताबिक, अगर कांग्रेस को निर्वाचन प्रक्रिया पर आपत्ति है, तो उसे अपने राजनीतिक फैसलों और रुख पर भी विचार करना चाहिए। उन्होंने तमिलनाडु में डीएमके से अलग होकर विजय के साथ खड़े होने जैसे राजनीतिक घटनाक्रमों का भी जिक्र किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में कांग्रेस की कमजोर होती स्थिति भी पार्टी के लिए आत्ममंथन का विषय है। दूसरों पर सवाल उठाने से पहले कांग्रेस को अपने भीतर झांकना चाहिए और यह समझना चाहिए कि उसकी राजनीतिक स्थिति कमजोर क्यों हो रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि गठबंधन की राजनीति के लंबे दौर के बाद देश ने एक दल के नेतृत्व में स्थिर सरकार का अनुभव किया है। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित होने के बाद नरेंद्र मोदी ने जनता का विश्वास हासिल किया और लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बने। उन्होंने इसे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनता के जनादेश का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया।
सीएम ने कहा कि आज भारत आर्थिक शक्ति के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है और अलग-अलग क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में विपक्ष को भी देश की उपलब्धियों पर सार्थक चर्चा करनी चाहिए। लोकतंत्र में विपक्ष की अपनी अहम भूमिका होती है और उसे सकारात्मक तथा रचनात्मक तरीके से अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
धार्मिक पर्यटन के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन धर्म में पितरों का विशेष महत्व है। उन्होंने मध्यप्रदेश की धार्मिक और आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए बौद्ध गया को भी बौद्ध धर्म की दृष्टि से महत्वपूर्ण आस्था का केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार राज्य में कई काम कर रही है।
सीएम डॉ. यादव के मुताबिक, सनातन धर्म से जुड़े धार्मिक स्थलों और तीर्थों के प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए भी सरकार प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री के आशीर्वाद से महाकाल महालोक के विकास के बाद मध्यप्रदेश में धार्मिक पर्यटन को नई गति मिली है। उन्होंने कहा कि बनारस, उज्जैन और सोमनाथ जैसे धार्मिक स्थलों को लेकर भी देश में बेहतर वातावरण बना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार अलग-अलग देवस्थानों पर प्रबंधन को बेहतर बनाने और नई व्यवस्थाएं विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने से श्रद्धालुओं को सुविधाएं उपलब्ध कराने और धार्मिक स्थलों की व्यवस्था को मजबूत करने के अवसर बढ़े हैं।
बिहार प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बिहार और मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के बीच रिश्ता हजारों साल पुराना है। करीब 2,200 साल पहले सम्राट अशोक के समय पाटलिपुत्र सत्ता का प्रमुख केंद्र था, जबकि उज्जैन में उनके युवराज की गद्दी थी। उन्होंने मगध और अवंती महाजनपदों के ऐतिहासिक संबंधों को भी याद किया।
मुख्यमंत्री ने भगवान कृष्ण के पुत्र श्याम के मंदिर का उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार और मध्यप्रदेश के बीच सांस्कृतिक और धार्मिक जुड़ाव काफी पुराना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों राज्यों के बीच बेहतर संबंधों के आधार पर धार्मिक पर्यटन को और मजबूती दी जा सकेगी। सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सभी को मिलकर देश को आगे बढ़ाने की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का जिक्र करते हुए कहा कि वे सभी को साथ लेकर चल रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वह मठ-मंदिरों की नगरी उज्जैन से आते हैं और मठ-मंदिरों का महत्व श्रद्धालुओं के लिए है। धार्मिक स्थलों पर आने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए और तीर्थों का प्रबंधन भी प्रभावी होना चाहिए। उन्होंने बिहार में फल्गु नदी के किनारे पितरों का तर्पण करने और मां वैष्णो देवी की पूजा का उल्लेख करते हुए धार्मिक आस्था के महत्व को रेखांकित किया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, बिहार और मध्यप्रदेश की साझा धार्मिक विरासत दोनों राज्यों के बीच पर्यटन और सांस्कृतिक सहयोग को आगे बढ़ाने का आधार बन सकती है।
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