
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में पर्यटन गतिविधियों को और प्रभावी बनाने के लिए पर्यटन विभाग को वन और संस्कृति विभाग के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करना होगा। उनका मानना है कि विभागों के बीच तालमेल बढ़ने से ग्रामीण और वन क्षेत्रों में संचालित होमस्टे को भी बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे।
मुख्यमंत्री ने मंत्रालय में मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम की गतिविधियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि पर्यटन से जुड़े निवेश और परियोजनाओं के लिए आवश्यक अनुमतियां समय पर जारी हों। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए और पूरी प्रक्रिया तेज, पारदर्शी तथा निवेशकों के अनुकूल बनाई जाए।
बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश बढ़ाने की जरूरत पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के प्रमुख शहरों में आधुनिक सुविधाओं से लैस कन्वेंशन सेंटर विकसित किए जाएं ताकि बड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों को आकर्षित किया जा सके। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के लिए ऐसी नीतियां बनाई जाएं, जिससे निवेशकों को बेहतर अवसर और सुविधाएं मिल सकें।
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य मार्गों और ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के आसपास विकसित किए जाने वाले मार्ग सुविधा केंद्रों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि इन केंद्रों में अस्पताल, ट्रामा सेंटर, पेट्रोल पंप, इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि इन सुविधाओं के संचालन के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विचार किया जाए, ताकि बेहतर प्रबंधन और सेवाएं सुनिश्चित की जा सकें।
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि धार्मिक पर्यटन मध्यप्रदेश की बड़ी ताकत है। ऐसे में प्रदेश के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंचने के लिए बेहतर सड़क, परिवहन और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है। उन्होंने निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए सभी धार्मिक स्थलों पर आवश्यक व्यवस्थाओं को मजबूत किया जाए।
मुख्यमंत्री ने आगामी सावन माह में शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा की तैयारियों की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि यात्रा मार्गों पर हर 15 से 20 किलोमीटर की दूरी पर भोजन-प्रसादी, पेयजल और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा श्रद्धालुओं के लिए सुविधा केंद्र स्थापित किए जाएं। उन्होंने धार्मिक संस्थाओं और स्थानीय समाज की भागीदारी को बढ़ावा देने की बात भी कही, ताकि व्यवस्थाएं और अधिक प्रभावी बन सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगोरिया मध्यप्रदेश की पहचान से जुड़ा एक अनूठा और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण उत्सव है। इसकी लोकप्रियता को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए अगले वर्ष आयोजित होने वाले भगोरिया उत्सव की तिथियां पहले से घोषित की जाएं। उन्होंने निर्देश दिए कि समय रहते प्रचार-प्रसार की रणनीति तैयार की जाए ताकि देशभर के पर्यटक इस आयोजन से जुड़ सकें और प्रदेश के पर्यटन को लाभ मिले।
बैठक के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि प्रदेश में पर्यटन क्षेत्र को उद्योग का दर्जा देने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई जारी है। सरकार का उद्देश्य पर्यटन को आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और निवेश आकर्षित करने वाले प्रमुख क्षेत्रों में शामिल करना है। बैठक में पर्यटन विकास निगम की विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई तथा उन्हें तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
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