MP Ken Betwa Link Project : मध्य प्रदेश के छतरपुर में आदिवासी परिवार पिछले 9 दिनों से 'चिता आंदोलन' कर रहे हैं. उनका आरोप है कि बिना मुआवज़ा दिए उन्हें उनकी ज़मीन से बेदखल किया जा रहा है। प्रशासन पर सुनवाई न करने का आरोप लगाते हुए परिवारों ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे पुल से फांसी लगा लेंगे।
छतरपुर (मध्य प्रदेश). छतरपुर जिले में केन-बेतवा नदी-जोड़ो प्रोजेक्ट को लेकर बवाल मचा हुआ है. इस प्रोजेक्ट से प्रभावित आदिवासी परिवार पिछले नौ दिनों से 'चिता आंदोलन' कर रहे हैं. उनका आरोप है कि बिना कोई मुआवज़ा दिए उन्हें उनकी ज़मीन से हटाया जा रहा है।ये प्रदर्शनकारी बराना नदी के पुल के नीचे इकट्ठा हुए हैं. उनका कहना है कि स्थानीय प्रशासन उनकी शिकायतों को नज़रअंदाज़ कर रहा है. प्रदर्शनकारियों ने ये भी दावा किया कि अधिकारियों ने पहले भी 'झूठे आश्वासन' देकर उनके आंदोलन को दबा दिया था।
आदिवासियों ने बयां किया दर्द
एक प्रदर्शनकारी ने बताया, “कई परिवारों को बिना मुआवज़े के विस्थापित किया जा रहा है. प्रशासन में कोई हमारी सुनने को तैयार नहीं है. इसीलिए हम पिछले नौ दिनों से इस बराना पुल के नीचे प्रदर्शन कर रहे हैं।”परिवारों ने प्रशासन पर गहरा अविश्वास जताया है. उन्होंने पुराने अनुभवों का ज़िक्र करते हुए कहा कि उन्हें पहले भी गुमराह करके आंदोलन खत्म करने के लिए मना लिया गया था।
प्रदर्शनकारी ने आगे कहा, "पिछली बार हम बेतवा नहर गए थे और बांध पर विरोध किया था. लेकिन प्रशासन ने हमें झूठे आश्वासन देकर हमारा आंदोलन खत्म करवा दिया. पर इस बार हम पीछे हटने वाले नहीं हैं और न ही झूठे वादों से डरेंगे।"
मांगे पूरी नहीं की तो हम एक साथ लगा लेंगे फांसी
आदिवासी परिवारों ने अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा है कि अगर उचित मुआवज़े और पुनर्वास की उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे कोई भी बड़ा कदम उठाने को तैयार हैं।
प्रदर्शनकारी ने चेतावनी देते हुए कहा, "हम प्रशासन को बताना चाहते हैं कि अगर इस बार हमारी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो हम इसी पुल के नीचे फांसी लगा लेंगे, लेकिन पीछे नहीं हटेंगे।"
क्या है केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट?
केन-बेतवा लिंक नेशनल प्रोजेक्ट देश की एक बड़ी सिंचाई परियोजना है, जिसमें ज़मीन के नीचे प्रेशराइज़्ड पाइप सिंचाई सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा।
यह प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना ज़िलों में केन नदी पर बन रहा है. इसके तहत पन्ना टाइगर रिज़र्व में केन नदी पर 77 मीटर ऊंचा और 2.13 किलोमीटर लंबा दौधन बांध बनाया जाएगा. साथ ही दो सुरंगें (ऊपरी स्तर 1.9 किमी और निचली स्तर 1.1 किमी) भी बनेंगी. बांध में 2,853 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी जमा किया जाएगा।
केन नदी का अतिरिक्त पानी 221 किलोमीटर लंबी लिंक नहर के ज़रिए बेतवा नदी में ट्रांसफर किया जाएगा, जिससे दोनों राज्यों में सिंचाई और पीने के पानी की सुविधा मिलेगी।
7 लाख किसान परिवारों को फायदा
सरकारी विज्ञप्ति के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट से 10 ज़िलों—पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, सागर, रायसेन, विदिशा, शिवपुरी और दतिया के 2 हज़ार गांवों की 8.11 लाख हेक्टेयर ज़मीन पर सिंचाई हो सकेगी. इससे करीब 7 लाख किसान परिवारों को फायदा होगा।
सरकार के अनुसार, इस प्रोजेक्ट से मध्य प्रदेश के 44 लाख और उत्तर प्रदेश के 21 लाख लोगों को पीने का पानी मिलेगा. इसके अलावा, प्रोजेक्ट से 103 मेगावाट पनबिजली और 27 मेगावाट सौर ऊर्जा भी पैदा होगी, जिसका पूरा फायदा मध्य प्रदेश को मिलेगा।
इस प्रोजेक्ट में चंदेल काल के ऐतिहासिक तालाबों को बचाने का काम भी शामिल है. मध्य प्रदेश के छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी ज़िलों में चंदेल काल के 42 तालाबों की मरम्मत करके बारिश का पानी जमा किया जा सकेगा. इससे ग्रामीण इलाकों को फायदा होगा और भूजल स्तर भी बढ़ेगा।
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