Omkareshwar Ekatma Parv: मध्यप्रदेश में आध्यात्मिक आयोजन, CM मोहन यादव का सनातन और एकात्मता पर बड़ा संदेश

Published : Apr 17, 2026, 03:05 PM IST
Omkareshwar Ekatma Parv

सार

ओंकारेश्वर में 5 दिवसीय एकात्म पर्व की शुरुआत सीएम मोहन यादव ने की। संतों ने एकात्मता, आत्मबोध और सनातन संस्कृति का संदेश दिया। कार्यक्रम में आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक एकता और आत्मिक सुख के महत्व पर जोर दिया गया।

भोपाल/खंडवा। धार्मिक दृष्टि से 17 अप्रैल का दिन मध्यप्रदेश के लिए बेहद खास रहा। खंडवा जिले के ओंकारेश्वर स्थित एकात्म धाम में 5 दिवसीय ‘एकात्म पर्व’ की भव्य शुरुआत हुई। कार्यक्रम के पहले दिन संतों के प्रवचनों की धारा बही, जिसमें मानव को एकात्म का महत्व समझाने का प्रयास किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर उन्होंने एकात्म पर्व पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। कार्यक्रम में श्री द्वारका शारदा पीठ के जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज सहित कई संत, विद्वान और शिष्य उपस्थित रहे।

सीएम मोहन यादव का संबोधन: मध्यप्रदेश की धरती को बताया धन्य

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान शंकराचार्य के कारण मध्यप्रदेश की धरती धन्य हुई है। ओंकारेश्वर धाम में आध्यात्मिक चेतना का अनुभव सहज रूप से होता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश एक अद्भुत भूमि है, जहां भगवान श्रीराम वनवास के दौरान चित्रकूट आए थे और यहां से आदर्श जीवन व शासन के सूत्र दिए। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण का उदाहरण देते हुए बताया कि कंस वध के बाद वे उज्जैन पहुंचे और सांदीपनि आश्रम में शिक्षा ग्रहण की। उनका कर्मप्रधान जीवन आज भी प्रेरणा देता है।

सीएम ने आदि गुरु शंकराचार्य का उल्लेख करते हुए कहा कि वे केरल से चलकर बालक रूप में इस धाम तक पहुंचे थे। हम उन्हें सदियों तक याद करते रहेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि आज सुशासन के साथ सनातन संस्कृति का समन्वय हो रहा है।

एकात्मवाद का संदेश: आत्मिक सुख को दिया महत्व

सीएम ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों में भी एकात्मवाद स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उन्होंने बताया कि जीवन में भौतिक सुख से अधिक आत्मिक सुख का महत्व है। सनातन संस्कृति हमेशा देने की भावना सिखाती है। उन्होंने कहा कि केवल पंचतत्वों से बना शरीर ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि आत्मा का बोध आवश्यक है। इस प्रकार के आयोजन समाज को जोड़ने और आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

जगदगुरु शंकराचार्य का संदेश: आत्मबोध ही जीवन का लक्ष्य

श्री द्वारका शारदा पीठ के जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि विविधता स्वाभाविक है, लेकिन एकता को समझना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य इस जीवन में आत्मा का ज्ञान प्राप्त कर लेता है तो यही सबसे बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि मानव जीवन दोबारा मिले यह जरूरी नहीं। उन्होंने बताया कि जो व्यक्ति सभी प्राणियों में परमात्मा को देखता है, वही अमरत्व को प्राप्त करता है। ब्रह्म, भगवान और आत्मा एक ही हैं।

उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे स्वयं को जानने का प्रयास करें- मैं कौन हूं, कहां से आया हूं और मेरा लक्ष्य क्या है। उन्होंने कहा कि यह संसार केवल भोग-विलास के लिए नहीं, बल्कि ईश्वर प्राप्ति के लिए है।

एकात्मता का वैज्ञानिक और सामाजिक महत्व: पद्मश्री निवेदिता भिड़े

आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास की न्यासी पद्मश्री निवेदिता भिड़े ने कहा कि आत्मा सबमें समान रूप से व्याप्त है और यही एकात्मता का आधार है। उन्होंने कहा कि मानव शरीर भी एकात्मता का सुंदर उदाहरण है, जहां विभिन्न अंग होते हुए भी चेतना एक रहती है। आज विज्ञान, विशेषकर क्वांटम फिजिक्स और पर्यावरणविद भी वेदों की बातों को समझने लगे हैं।

स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि समाज को सत्य के अनुसार ढलना चाहिए। एकात्मता ही अस्तित्व का मूल सत्य है। जब मानव इससे दूर होता है, तब समस्याएं उत्पन्न होती हैं। उन्होंने सभी से अपील की कि वे एक-दूसरे के साथ अपनेपन का व्यवहार करें और समाज को जोड़ने का कार्य करें, न कि तोड़ने का।

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