
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 25 सितंबर को सिंगरौली जिले में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को मुख्यमंत्री निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने किसानों को अनंत चतुर्दशी की शुभकामनाएं दीं और खेती में तकनीक, नवाचार और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने की बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हित में लगातार कदम उठा रही है। कोशिश है कि आधुनिक तकनीक और नए प्रयोगों के जरिए किसानों का फसल उत्पादन बढ़े और उनकी आमदनी में भी इजाफा हो।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंगरौली की उपजाऊ भूमि पर प्राकृतिक खेती का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता जताई कि जिले के 3,000 से अधिक किसान प्राकृतिक खेती से जुड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और किसान मिलकर सिंगरौली को कृषि के क्षेत्र में आगे ले जाएंगे। ऊर्जाधानी के रूप में पहचान रखने वाले सिंगरौली को अब प्राकृतिक खेती के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा।
किसानों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सिंचाई क्षमता को बढ़ाकर 100 लाख हेक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य है। इसके साथ ही उद्यानिकी का रकबा बढ़ाकर 30 लाख हेक्टेयर करने की योजना है। सरकार खाद्य प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को भी बढ़ावा देगी। इसके लिए एक जिला-एक उत्पाद (ODOP) के जरिए स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने और उनकी पहचान मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने पशुपालन और डेयरी को भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की बात कही। उनका कहना था कि खेती के साथ इन गतिविधियों से ग्रामीण परिवारों की आय के नए स्रोत तैयार किए जा सकते हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में खेती से जुड़े एक लाख किसानों, युवाओं और बेटियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र में उद्यमिता को बढ़ावा देना और कृषि उद्यमियों की नई पीढ़ी तैयार करना है। सरकार का जोर खेती को सिर्फ पारंपरिक गतिविधि तक सीमित रखने के बजाय उसे तकनीक, प्रसंस्करण और कारोबार से जोड़ने पर है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सोन और गोपद नदियों के संगम क्षेत्र वाला सिंगरौली जिला श्रीअन्न उत्पादन के मामले में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यहां कोदो और सामा जैसी फसलें प्रमुख रूप से उगाई जाती हैं। उन्होंने बताया कि सिंगरौली और डिंडोरी के किसानों की पहल को देखते हुए सरकार ने कोदो-कुटकी की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी का फैसला किया है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने सिंगरौली के प्रगतिशील किसानों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत भी की। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती, श्रीअन्न उत्पादन और खास तौर पर हल्दी की खेती के अनुभवों के बारे में जानकारी ली। किसानों ने बताया कि पारंपरिक खेती की तुलना में जैविक खाद के इस्तेमाल से प्राकृतिक खेती में बेहतर लाभ मिल रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंगरौली के किसान अब पारंपरिक खेती के साथ नई तकनीक और नई फसलों को भी अपना रहे हैं। जिले में उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में भी काफी संभावनाएं हैं। उन्होंने बताया कि सिंगरौली में आटा मिल, राइस मिल, ऑयल मिल, दुग्ध उत्पाद, बेकरी और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी कई नई इकाइयां स्थापित की गई हैं। इससे स्थानीय स्तर पर कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
खेती के लिए बिजली की उपलब्धता को लेकर भी मुख्यमंत्री ने जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसानों को दिन में 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराने के लिए फीडरों का विभक्तिकरण किया जा चुका है। इस व्यवस्था से कृषि कार्यों के लिए बिजली की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है। इससे किसान सिंचाई और अन्य कृषि गतिविधियों की योजना अधिक आसानी से बना सकेंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिंगरौली के किसानों से खेती में फसल विविधीकरण अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसान पारंपरिक फसलों के साथ उद्यानिकी और प्राकृतिक खेती में भी रुचि लें। उन्होंने किसानों को खेती के साथ पशुपालन और मछली पालन से जुड़ने का सुझाव दिया। सरकार का जोर कृषि से जुड़े अलग-अलग क्षेत्रों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़कर किसानों के लिए आय के अतिरिक्त अवसर तैयार करने पर है।
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