राजस्थान में कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: पहली बार नाबालिग से रेप के आरोपी पर 5.15 लाख जुर्माने के साथ 20 साल कैद

Published : Jan 31, 2023, 11:47 AM ISTUpdated : Jan 31, 2023, 11:50 AM IST
पोक्सो कोर्ट की सुनवाई

सार

राजस्थान के सीकर शहर से बड़ी खबर सामने आई है। यहां पोक्सो कोर्ट ने नाबालिग के साथ हुए रेप में आरोपी के खिलाफ ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। दरअसल आरोपी युवक को 20 साल की सजा के साथ 5.15 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। इस कारण से लगा इतना ज्यादा जुर्माना।

सीकर (sikar). राजस्थान के सीकर जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है। यहां के पोक्सो कोर्ट 2 ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने नाबालिग से रेप के मामले में आरोपी को 20 साल के कारावास की सजा सुनाई है। ताज्जुब की बात तो यह है कि आरोपी पर 5.15 लाख का जुर्माना लगाया गया है क्योंकि रेप के बाद ने बच्ची को जन्म दिया। ऐसे में दोनों मां बेटी के भरण पोषण के लिए कोर्ट ने आरोपी पर यह जुर्माना लगाया गया है। इतना ही नहीं इस मामले में पुलिस के ढीले इन्वेस्टिगेशन और लापरवाही के चलते तीन दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस के उच्चाधिकारियों को भी लिखा गया है।

ये थी पूरी घटना

आरोपी शिंभुराम पीड़िता के गांव में परचून की दुकान चलाता था। एक बार पीड़िता आरोपी की दुकान पर सामान लेने के लिए गई। यहां आरोपी ने उसे कोई नशीला पदार्थ पिला दिया। जिससे पीड़िता बेहोश हो गई। इसके बाद आरोपी ने उसके साथ रेप किया। इस घटना के करीब 5 महीने बाद जब 10 नवंबर 2014 की रात उसके घर पर आया और उसने कहा कि उसके साथ रेप की घटना के बारे में पूरे गांव में बताएगा और उसकी बदनामी कर देगा। आरोपी यहां से नाबालिग को अपने साथ डरा धमका कर घर ले गया।

जबरदस्ती अपने घर ले जाकर करता रहा दरिंदगी

घर पर आरोपी के परिवार वाले भी मौजूद थे। जो पीड़िता को घर से बाहर भी नहीं निकलने देते थे। यहां भी आरोपी ने उसके साथ कई बार रेप किया। दुकान में हुए रेप के बाद पीड़िता प्रेग्नेंट हो चुकी थी। जनवरी 2015 में उसने एक बच्ची को जन्म दिया। जिसकी डिलीवरी भी आरोपी के घर पर हुई। आखिरकार जैसे-तैसे पुलिस वालों ने जून 2015 में पीड़िता को उसकी बच्ची के साथ ढूंढ लिया। और आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस की लापरवाही आई सामने

इसके बाद आरोपी के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया गया लेकिन मामले में इन्वेस्टिगेशन करने वाले 3 पुलिस अफसरों ने इतनी लापरवाही बरती की ना तो पीड़िता की बच्ची के बारे में कोई जानकारी संबंधी कागज कोर्ट में पेश किया। न हो कोई नक्शा मौका और गवाहों के बयान लिए। इससे यह मामला 7 साल बाद सुलझ पाया है।

पीड़िता नाबालिग और उसकी बच्ची को मिलेंगे इतने रूपए

पुलिस के खिलाफ कोर्ट ने महानिदेशक पुलिस को पत्र लिखकर कहा है कि इस तरीके का अनुसंधान पुलिस लापरवाही का जीता जागता उदाहरण है। ऐसा इन्वेस्टिगेशन न्याय का गला घोटने के समान है। तीनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए क्योंकि इन्होंने रिपोर्ट दर्ज होने के 8 महीने बाद तक पीड़िता को ही नहीं ढूंढा। वही कोर्ट ने आरोपी शिम्भुराम पर 5.15 रुपए का जुर्माना लगाया है। इसमें से 5 लाख रुपए पीड़िता की बच्ची और 15 हजार रुपए पीड़िता को मिलेंगे।

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