अयोध्या में बड़ा आध्यात्मिक आयोजन: राम मंदिर में हुआ श्रीराम यंत्र स्थापना, राष्ट्रपति मुर्मु भी पहुंचीं

Published : Mar 20, 2026, 01:56 PM IST
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सार

अयोध्या में चैत्र नवरात्रि के पहले दिन श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठापना की गई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु कार्यक्रम में शामिल हुईं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या आज रामराज्य की अनुभूति का प्रतीक बन गई है।

चैत्र नवरात्रि के पहले दिन अयोध्या में एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम देखने को मिला। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर में श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठापना की गई। इस खास मौके पर देश की राष्ट्रपति Droupadi Murmu खुद अयोध्या पहुंचीं और विधि-विधान से श्रीराम यंत्र की स्थापना की। कार्यक्रम में Yogi Adityanath भी मौजूद रहे। उन्होंने इस मौके पर कहा कि आज दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और अशांति का माहौल है, लेकिन अयोध्या में हजारों लोग एक साथ बैठकर रामराज्य की अनुभूति कर रहे हैं।

चैत्र नवरात्रि के पहले दिन हुआ विशेष कार्यक्रम

चैत्र नवरात्रि के पहले दिन आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से साधु-संत, रामभक्त और कई गणमान्य लोग पहुंचे। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रीराम यंत्र की स्थापना को आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को भारतीय नवसंवत्सर की शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने कहा कि सरयू नदी का पवित्र जल अयोध्या धाम को सदियों से पवित्र करता रहा है और आज यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा पूरे देश को जोड़ने का काम कर रही है।

“नई पीढ़ी मंदिरों की ओर लौट रही है”

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी पहले से ज्यादा जागरूक हुई है। उन्होंने कहा कि अब लोग नए साल पर ऐसे टूरिस्ट डेस्टिनेशन नहीं जाते जहां सनातन के विरोध में कोई गतिविधि हो रही हो। मुख्यमंत्री के मुताबिक, आज कई परिवार नए वर्ष की शुरुआत मंदिर जाकर करते हैं। उन्होंने इसे भारतीय संस्कृति और आस्था की मजबूत वापसी बताया।

राम मंदिर आस्था और संघर्ष का प्रतीक

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि पूरे देश की आस्था और लंबे संघर्ष का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में राम मंदिर निर्माण से जुड़े कई ऐतिहासिक चरण पूरे हुए हैं—जैसे भूमि पूजन, रामलला की प्राण प्रतिष्ठा, राम दरबार की स्थापना और अब श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठापना। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग पहले राम मंदिर जैसे विषयों को अंधविश्वास बताते थे, वही लोग सत्ता के लिए अलग-अलग तरह के विश्वासों का सहारा लेते रहे। लेकिन 500 साल तक लगातार चली आस्था और संघर्ष अंततः अयोध्या को इस रूप में दुनिया के सामने लेकर आया।

“अयोध्या अब दुनिया के लिए आस्था का केंद्र”

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अयोध्या आज सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बन चुकी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश के धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों पर करीब 156 करोड़ श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचे। अयोध्या, काशी, प्रयागराज और मथुरा-वृंदावन में दर्शन करने आने वालों की संख्या कई देशों की आबादी से भी ज्यादा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बदलते भारत की तस्वीर है, जहां लोग अपनी जड़ों और आस्था से फिर से जुड़ रहे हैं।

संतों और रामभक्तों को किया नमन

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर आंदोलन में योगदान देने वाले संतों, रामभक्तों और कारीगरों को भी याद किया। उन्होंने आंदोलन के दौरान बलिदान देने वाले लोगों और विहिप नेता Ashok Singhal को भी श्रद्धांजलि दी। इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल Anandiben Patel, आध्यात्मिक गुरु Mata Amritanandamayi, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव Champat Rai समेत हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे। अयोध्या में आयोजित यह कार्यक्रम सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं था, बल्कि भारत की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने एक बार फिर दिखाने का अवसर भी बना।

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