CM योगी का मेगा प्लान! यूपी बनेगा देश का सबसे बड़ा AI और Data Center हब

Published : May 20, 2026, 04:58 PM IST
CM Yogi Adityanath Pushes UP AI Mission Project Ganga and Data Center Expansion

सार

UP Data Center Cluster: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी डाटा सेंटर क्लस्टर, प्रोजेक्ट गंगा और गेहूं प्रसंस्करण नीति की समीक्षा की। यूपी को एआई हब और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़ा केंद्र बनाने की तैयारी तेज, बुंदेलखंड से शुरू हो सकती है बड़ी परियोजना।

उत्तर प्रदेश अब केवल आबादी या कृषि के दम पर नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की ताकत पर नई अर्थव्यवस्था गढ़ने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को प्रदेश के भविष्य से जुड़ी तीन बड़ी योजनाओं, यूपी डाटा सेंटर क्लस्टर, प्रोजेक्ट गंगा और गेहूं प्रसंस्करण नीति की उच्च स्तरीय समीक्षा की। इस बैठक में साफ संकेत मिला कि सरकार आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश को टेक्नोलॉजी, डिजिटल सेवाओं और खाद्य प्रसंस्करण के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करना चाहती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी डाटा सेंटर क्लस्टर केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि प्रदेश के एआई मिशन की बुनियादी संरचना तैयार करने वाला मॉडल होगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस योजना को सिर्फ एनसीआर तक सीमित न रखा जाए, बल्कि प्रदेश के अन्य हिस्सों तक भी विस्तार दिया जाए। योगी आदित्यनाथ ने बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी बीडा क्षेत्र से इस परियोजना की शुरुआत का सुझाव दिया, जहां बड़े स्तर पर भूमि उपलब्ध है।

लखनऊ को “AI City” बनाने की तैयारी

बैठक में मुख्यमंत्री ने टाटा समूह समेत बड़ी टेक कंपनियों से संवाद बढ़ाने की बात कही और लखनऊ को “एआई सिटी” के रूप में विकसित करने पर जोर दिया। अधिकारियों ने प्रस्तुतीकरण में बताया कि उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर क्लस्टर का उद्देश्य राज्य को भारत और ग्लोबल साउथ का सबसे बड़ा एआई कंप्यूट पावर सेंटर बनाना है। सरकार की दीर्घकालिक रणनीति के तहत वर्ष 2040 तक 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था, 1.5 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार और 5 गीगावॉट एआई कंप्यूट कॉरिडोर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। बैठक में यह भी बताया गया कि भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक व्हीकल और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टरों के इर्द-गिर्द घूमेगी।

यूपी क्यों बन सकता है बड़ा टेक हब?

प्रस्तुतीकरण में उत्तर प्रदेश की पांच बड़ी ताकतों को रेखांकित किया गया। इनमें राज्य की भौगोलिक स्थिति, बड़ी युवा आबादी, विशाल भूमि उपलब्धता, तेजी से विकसित हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर और मजबूत प्रशासनिक नेतृत्व शामिल हैं। सरकार का दावा है कि यूपी का इनलैंड लोकेशन समुद्री तूफानों और चक्रवातों के जोखिम से सुरक्षित है। साथ ही एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और बिजली ढांचा लगातार मजबूत हो रहा है। आईआईटी कानपुर, एनआईटी प्रयागराज समेत 50 से अधिक इंजीनियरिंग संस्थानों के कारण तकनीकी प्रतिभा की भी कमी नहीं है। बैठक में यह भी बताया गया कि देश के ज्यादातर प्रमुख फाइबर नेटवर्क यूपी से होकर गुजरते हैं और राज्य भारत के सभी समुद्री केबल लैंडिंग पॉइंट्स से जुड़ा हुआ है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश को “एशिया का मोस्ट सिक्योर, स्केलेबल एंड कनेक्टेड इनलैंड एआई टेरिटरी” बताया गया।

प्रोजेक्ट गंगा से गांवों तक पहुंचेगा हाई-स्पीड इंटरनेट

मुख्यमंत्री ने “प्रोजेक्ट गंगा” की भी समीक्षा की। इस परियोजना का पूरा नाम “गवर्नमेंट असिस्टेड नेटवर्क फॉर ग्रोथ एंड एडवांसमेंट” है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों तक हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड नेटवर्क पहुंचाना है। योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए कि डिजिटल उद्यमियों के रूप में चुने जाने वाले युवाओं को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण दिया जाए और उन्हें शुरुआत से ही पर्याप्त इंसेंटिव उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के तेजी से विस्तार और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। सरकारी प्रस्तुतीकरण के मुताबिक, इस योजना के तहत 10 हजार से अधिक युवाओं को डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर (DSP) के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे करीब 50 हजार प्रत्यक्ष और 1 लाख से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की संभावना जताई गई है।

20 लाख घरों तक पहुंचेगा फाइबर नेटवर्क

प्रोजेक्ट गंगा के तहत 20 लाख से ज्यादा घरों को हाई-स्पीड इंटरनेट से जोड़ने का लक्ष्य तय किया गया है। हर डीएसपी अपने क्षेत्र में 200 से 300 घरों को कनेक्ट कर सकेगा। खास बात यह है कि इस योजना में महिला उद्यमिता को भी प्राथमिकता दी जा रही है और लगभग 50 प्रतिशत महिला डिजिटल उद्यमियों को शामिल करने की तैयारी है। बैठक में बताया गया कि केवल मोबाइल इंटरनेट के जरिए सीमित सेवाएं ही संभव हैं, जबकि एआई आधारित कृषि, टेलीमेडिसिन, वर्चुअल लैब, ड्रोन मॉनिटरिंग और स्मार्ट विलेज जैसी सुविधाओं के लिए मजबूत ब्रॉडबैंड इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी है। सरकार की योजना के मुताबिक डीएसपी केवल इंटरनेट सेवा प्रदाता नहीं होंगे, बल्कि वे गांवों में डिजिटल सेवाओं का पूरा नेटवर्क तैयार करेंगे। इनमें आईपीटीवी, ओटीटी एक्सेस, सीसीटीवी समाधान, पब्लिक वाई-फाई और साइबर सिक्योरिटी जैसी सेवाएं भी शामिल होंगी। प्रत्येक डीएसपी को 5 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण देने की भी योजना है।

गेहूं प्रसंस्करण पर भी सरकार का फोकस

मुख्यमंत्री ने गेहूं के इन-हाउस प्रसंस्करण को बढ़ावा देने की रणनीति पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने मंडी शुल्क व्यवस्था में सुधार और मंडियों को आधुनिक, स्वच्छ व आकर्षक बनाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने साफ-सफाई, रंगाई-पुताई, त्योहारों के दौरान लाइटिंग और अतिक्रमण हटाने जैसी व्यवस्थाओं को प्राथमिकता देने की बात कही। योगी आदित्यनाथ ने अल नीनो के संभावित असर का जिक्र करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में फसलों पर प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए राज्य के खाद्यान्न भंडार मजबूत और पर्याप्त होने चाहिए।

यूपी में सबसे ज्यादा गेहूं उत्पादन, फिर भी बाहर जा रहा फायदा

बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक राज्य है। वर्ष 2025-26 में राज्य में 372 लाख मीट्रिक टन गेहूं उत्पादन का अनुमान है, जबकि कुल उपलब्धता 407 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचती है। करीब 2.88 करोड़ किसान इस उत्पादन से जुड़े हुए हैं। इसके बावजूद सीमित प्रसंस्करण क्षमता के कारण बड़ी मात्रा में गेहूं दूसरे राज्यों में कच्चे रूप में भेजा जाता है। इससे रोजगार, जीएसटी राजस्व और मूल्य संवर्धन का फायदा यूपी से बाहर चला जाता है। प्रदेश में इस समय 559 रोलर फ्लोर मिल्स हैं, जिनकी कुल क्षमता 218.4 लाख मीट्रिक टन है, लेकिन वास्तविक उपयोग इससे काफी कम है। सरकार का मानना है कि यदि राज्य के भीतर ही बड़े स्तर पर गेहूं प्रसंस्करण बढ़ाया जाए तो खाद्य उद्योग, बिजली खपत, रोजगार और राजस्व में बड़ा विस्तार संभव है।

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