यूपी के बस्ती में इंजीनियरों पर AI से फर्जी तस्वीरें बना बांध मरम्मत के नाम पर करोड़ों के घोटाले का आरोप है। इस धांधली से 12 से ज़्यादा गांवों पर बाढ़ का खतरा है। मामले की जांच जारी है।
लखनऊ: सरकारी काम में धांधली के किस्से तो आपने बहुत सुने होंगे, लेकिन उत्तर प्रदेश के बस्ती मंडल से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो टेक्नोलॉजी के गलत इस्तेमाल की मिसाल है। यहां के इंजीनियरों पर आरोप है कि उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके एक बड़ा घोटाला कर दिया है। नालों की सफाई और बांध की मरम्मत जैसे काम कागजों पर दिखाने के लिए AI से तस्वीरें बनाई गईं और करोड़ों के बिल पास करा लिए गए।

आरोप है कि जिले में बांधों की मरम्मत के लिए आए बजट का 26% हिस्सा, यानी 1 करोड़ 3 लाख 81 हजार 62 रुपये, सिर्फ कागजों में ही खर्च कर दिया गया। हकीकत में जमीन पर कोई काम हुआ ही नहीं। जब इस मामले की पोल खुली तो पूरे महकमे में हड़कंप मच गया। इस घोटाले का खुलासा बीजेपी के मंडल महासचिव अमर बहादुर सिंह ने किया। उन्होंने बस्ती के मंडलायुक्त अखिलेश सिंह को एक शिकायती पत्र सौंपा है। इस पत्र में उन्होंने सीधे तौर पर प्रशासनिक अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत पर सवाल उठाए हैं।
शिकायत में क्या आरोप लगाए गए हैं?
अमर बहादुर सिंह ने अपने पत्र में लिखा है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए बाढ़ से बचाव और बांधों की मरम्मत के लिए एक बड़ा बजट पास हुआ था। लेकिन विभागीय अधिकारियों और कुछ खास ठेकेदारों ने मिलकर इस बजट का बड़ा हिस्सा सिर्फ एक ही उपखंड (चौथे उपखंड) के खाते में ट्रांसफर करा लिया। शिकायत के मुताबिक, 19 अगस्त 2025 और 24 नवंबर 2025 के बीच, जब बाढ़ का खतरा कम हो गया था, तब अलग-अलग वाउचर के जरिए यह रकम निकाल ली गई।
सबसे गंभीर बात यह है कि जिस काम के लिए पैसा निकाला गया, वो कभी हुआ ही नहीं। पहले, दूसरे और तीसरे उपखंड के तहत आने वाले कई अहम बांध आज भी टूटी-फूटी हालत में हैं। उनकी कोई मरम्मत नहीं हुई। अधिकारियों और ठेकेदारों के इस भ्रष्टाचार की वजह से मॉनसून में 12 से ज़्यादा गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।
बीजेपी नेता अमर बहादुर सिंह ने कहा, "कुछ ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए सारा पैसा एक ही जगह लगा दिया गया। पेमेंट प्रोसेस में कोई पारदर्शिता नहीं है। अगर सरकार इस मामले की उच्च-स्तरीय जांच नहीं कराती है, तो 12 से ज़्यादा गांवों के घर बाढ़ में बह जाएंगे और लोग बेघर हो जाएंगे।"
अधिकारियों ने आरोपों को नकारा
जब इस बारे में ड्रेनेज खंड के अधिशासी अभियंता (Executive Engineer) कृपाशंकर भारती से बात करने की कोशिश की गई, तो पहले तो उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। बाद में उन्होंने सभी आरोपों को गलत बताया और कैमरे से बचते नजर आए।
वहीं, गंडक सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता विकास सिंह ने बताया कि मुख्यालय के निर्देश पर एक जांच टीम पहले ही बनाई गई थी। कुछ दिन पहले एक तकनीकी सलाहकार समिति (TAC) की टीम ने भी मौके का दौरा किया था। उनका कहना है कि सारे काम नियमों के मुताबिक हुए हैं। फिर भी, आरोपों की जांच के लिए एक नई टीम बनाई गई है। अगर काम किए बिना बिल पास हुआ है, तो हम खुद मौके पर जाकर इसकी जांच करेंगे। एक अन्य इंजीनियर सुरेंद्र मोहन वर्मा ने भी इसे एक गंभीर आरोप बताते हुए उच्च-स्तरीय जांच की मांग की है।
