CSI NIC 2026: डॉ. शरत चंद्रा की कहानी, कैसे बदली यूपी की स्वास्थ्य व्यवस्था और इलाज की तस्वीर

Published : Apr 10, 2026, 05:16 PM IST
CSI NIC 2026 dr sharat chandra speech

सार

NIC-2026 सम्मेलन में डॉ. शरत चंद्रा ने 2005 की एक घटना साझा कर बताया कि कैसे पहले समय पर इलाज नहीं मिल पाता था। अब ‘हृदय सेतु’ और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से यूपी में दिल के मरीजों को तुरंत उपचार मिल रहा है।

लखनऊ। CSI के NIC-2026 सम्मेलन के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी के भरे हुए सभागार में जब डॉ. शरत चंद्रा ने बोलना शुरू किया, तो उनका स्वर सिर्फ एक डॉक्टर का नहीं, बल्कि एक बेटे का भी था। उन्होंने अपने अनुभव के जरिए स्वास्थ्य व्यवस्था की पुरानी सीमाओं और आज हुए बदलाव को सामने रखा।

2005 की घटना: जब रात में नहीं मिल पाया समय पर इलाज

डॉ. चंद्रा ने वर्ष 2005 की एक घटना साझा करते हुए बताया कि दिसंबर की एक रात करीब 10 बजे उनके चंदौसी स्थित घर से उनके पिता का फोन आया। उनके पिता ने कहा कि सीने में दर्द हो रहा है, क्या किया जाए? एक डॉक्टर बेटे के रूप में उन्होंने तुरंत सलाह दी कि पास में जाकर ईसीजी करा लें। लेकिन उनके पिता ने कहा कि रात में ईसीजी कहां हो पाएगा, सुबह ही कराएंगे।

उन्होंने कहा कि उस रात सिर्फ उनके पिता ही नहीं, बल्कि वे खुद भी पूरी रात जागते रहे। अगले दिन ईसीजी सामान्य आया, लेकिन उस घटना ने उनके मन में एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया—क्या हमारे पास समय पर इलाज की व्यवस्था है?

स्वास्थ्य सेवाओं में बदलाव: दो दशकों में बदली तस्वीर

डॉ. चंद्रा ने कहा कि आज, करीब 20 साल बाद, उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने भावुक होकर कहा कि अब दिल का दौरा पड़ने पर मरीज को सुबह का इंतजार नहीं करना पड़ता। अब तत्काल इलाज की सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे समय रहते मरीज की जान बचाई जा सकती है।

‘हृदय सेतु’ और टेलीमेडिसिन से जुड़ी बेहतर सुविधाएं

उन्होंने बताया कि ‘हृदय सेतु’ जैसे प्रयासों ने बड़े चिकित्सा संस्थानों- एसजीपीजीआई, केजीएमयू और डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज को जिला अस्पतालों से जोड़ दिया है। इससे अब छोटे शहरों और जिलों में भी गंभीर मरीजों को समय पर विशेषज्ञ सलाह और इलाज मिल पा रहा है।

अब छोटे जिलों में भी एंजियोप्लास्टी जैसी सुविधाएं

डॉ. चंद्रा ने कहा कि पहले एंजियोप्लास्टी जैसी उन्नत चिकित्सा सुविधाएं केवल बड़े शहरों तक सीमित थीं। लेकिन अब सुल्तानपुर, जौनपुर, बहराइच, गोंडा और बस्ती जैसे जिलों में भी ये सुविधाएं उपलब्ध हैं। इससे मरीजों को लंबी दूरी तय करने की जरूरत नहीं पड़ती और समय पर इलाज संभव हो पाता है।

भरोसे का बदलाव: नई स्वास्थ्य व्यवस्था की पहचान

अपने संबोधन के अंत में डॉ. चंद्रा ने कहा कि यह बदलाव केवल आंकड़ों का नहीं है, बल्कि लोगों के भरोसे का बदलाव है। उन्होंने कहा कि एक समय था जब रात में ईसीजी भी संभव नहीं था, और आज वही प्रदेश हर समय जीवन बचाने के लिए तैयार खड़ा है। यही बदला हुआ उत्तर प्रदेश है, जिसे अब ‘उत्तम प्रदेश’ कहा जा सकता है।

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