
लखनऊ। मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ ने स्मार्ट बिजली मीटर से जुड़ी उपभोक्ताओं की शिकायतों का संज्ञान लेते हुए गहन जांच के निर्देश दिए हैं। ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि आम उपभोक्ता ईमानदार होता है और यदि उसे सही समय पर सटीक बिल मिले तो वह भुगतान जरूर करता है। उन्होंने ओवरबिलिंग की समस्या की सच्चाई जानने के लिए विशेषज्ञों की समिति बनाने के निर्देश दिए और स्पष्ट किया कि यदि उपभोक्ता की गलती नहीं है, तो उसका बिजली कनेक्शन नहीं काटा जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में निर्बाध, गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऊर्जा क्षेत्र में सुधार का लाभ अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचे, इसके लिए विश्वसनीय सप्लाई, तकनीकी दक्षता और जवाबदेही जरूरी है। उन्होंने स्मार्ट मीटरिंग, लाइन लॉस में कमी, सेवाओं के डिजिटलीकरण और राजस्व सुधार को तेज करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि उपभोक्ताओं को समय पर और सही बिल मिले, इसके लिए मजबूत व्यवस्था बनाई जाए। स्मार्ट मीटरिंग सिस्टम को उपभोक्ता विश्वास के अनुरूप बनाने और शिकायतों के त्वरित व निष्पक्ष निस्तारण पर विशेष ध्यान देने को कहा गया। उन्होंने ऊर्जा मंत्री और पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारियों को फील्ड में जाकर निरीक्षण करने और समस्याओं का तुरंत समाधान करने के निर्देश दिए। साथ ही टोल फ्री हेल्पलाइन को सक्रिय रखने और शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने को कहा।
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2017 में 1.65 करोड़ बिजली उपभोक्ता थे, जो 2026 में बढ़कर 3.71 करोड़ से अधिक हो गए हैं। यह लगभग 126 प्रतिशत वृद्धि है। इसी अवधि में बिजली भार में 80 प्रतिशत और ऊर्जा बिक्री में 63 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान में कुल ऊर्जा बिक्री 1.27 लाख मिलियन यूनिट और कनेक्टेड लोड 84,000 मेगावाट से अधिक है। घरेलू उपभोक्ता 87 प्रतिशत हैं, जबकि राजस्व में सबसे अधिक योगदान वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्र का है।
मुख्यमंत्री ने डिस्कॉम्स के प्रदर्शन पर संतोष जताते हुए राष्ट्रीय रेटिंग में सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने ट्रांसफार्मर बदलने की प्रक्रिया तेज करने और नए बिजली पोल की गुणवत्ता व तकनीकी मानकों का पालन सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही बिजली लाइनों को चरणबद्ध तरीके से भूमिगत करने के कार्य को गति देने के निर्देश भी दिए गए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि फॉल्ट-फ्री बिजली आपूर्ति के लिए नियमित मेंटेनेंस जरूरी है। प्री और पोस्ट मानसून अभियानों के कारण वर्ष 2025-26 में पावर ट्रांसफॉर्मर क्षति में 80 प्रतिशत और बड़े वितरण ट्रांसफार्मरों की क्षति में 48 प्रतिशत की कमी आई है। प्रदेश में अब तक 84 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं और फीडर मीटरिंग में लगभग 95 प्रतिशत प्रगति हो चुकी है।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों में कम से कम 5 घरों वाले मजरों में भी बिजली पहुंचाई जाए। डबल ग्रुप सप्लाई और कृषि फीडर पृथक्करण के कार्यों को समयबद्ध पूरा करने को कहा गया, ताकि ओवरलोडिंग की समस्या दूर हो सके।
1912 कॉल सेंटर, ऑनलाइन पोर्टल, सोशल मीडिया और व्हाट्सएप के माध्यम से शिकायत निस्तारण को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए। साथ ही सिंगल विंडो सिस्टम को बड़े स्तर पर लागू करने पर जोर दिया गया।
मुख्यमंत्री ने सभी तापीय इकाइयों को पूरी क्षमता से संचालित करने और गर्मी के मौसम के लिए तैयारी सुनिश्चित करने को कहा। प्रदेश में वर्तमान में 12,247 मेगावाट तापीय और 526.4 मेगावाट जल विद्युत क्षमता है। वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच ₹3,143 करोड़ का लाभ अर्जित किया गया है। घाटमपुर की 660 मेगावाट इकाई अप्रैल में शुरू होगी, जबकि मेजा, ओबरा-डी और अनपरा-ई जैसी 5,600 मेगावाट परियोजनाओं को जल्द मंजूरी देने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। ‘पीएम सूर्य घर योजना’ के तहत 4.60 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर (1560 मेगावाट) लगाए जा चुके हैं। ‘पीएम कुसुम योजना’ के तहत सोलर पंपों के कार्य को समय पर पूरा करने को कहा गया। साथ ही ग्रीन हाइड्रोजन, बायो एनर्जी और ईवी चार्जिंग स्टेशनों के विकास को भी तेज करने पर जोर दिया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली जांच और विजिलेंस की कार्रवाई करते समय आम लोगों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। हर कदम पर संवेदनशीलता और पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है।
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