
लखनऊ। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में लखनऊ मेट्रो फेज-1बी ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर परियोजना के लिए बड़ा फैसला लिया गया। कैबिनेट ने भारत सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के बीच त्रिपक्षीय मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाने को मंजूरी प्रदान कर दी है। यह परियोजना चारबाग से वसंतकुंज तक विकसित की जाएगी।
वित्त मंत्री Suresh Kumar Khanna ने बताया कि इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को पहले ही मंजूरी मिल चुकी थी। अब 5801.05 करोड़ रुपये की लागत से इस परियोजना को लागू करने पर सहमति बनी है। परियोजना की लागत में केंद्र और राज्य सरकार की हिस्सेदारी बराबर यानी 50-50 प्रतिशत रहेगी।
लखनऊ मेट्रो का यह नया ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर राजधानी में सार्वजनिक परिवहन को और मजबूत करेगा। इसके शुरू होने से शहर के लोगों को तेज, सुरक्षित और आधुनिक परिवहन सुविधा मिल सकेगी। सरकार का मानना है कि इससे ट्रैफिक दबाव कम होगा और लोगों की यात्रा अधिक सुगम बनेगी।
गौरतलब है कि इस परियोजना की डीपीआर को 5 मार्च 2024 की कैबिनेट बैठक में मंजूरी दी गई थी। इसके बाद आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय, भारत सरकार ने 3 सितंबर 2025 को 5801.05 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को अंतिम स्वीकृति दी थी। केंद्र सरकार ने अपनी मंजूरी में यह शर्त रखी थी कि परियोजना के संचालन और क्रियान्वयन के लिए केंद्र, राज्य सरकार और उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के बीच त्रिपक्षीय एमओयू किया जाएगा।
न्याय विभाग की जांच और आवश्यक संशोधनों के बाद तैयार एमओयू प्रारूप को अब योगी कैबिनेट ने औपचारिक मंजूरी दे दी है। कैबिनेट के फैसले में राज्य सरकार की जिम्मेदारियों और दायित्वों को भी स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है।
मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में पशु चिकित्सा के छात्रों को बड़ा राहतभरा निर्णय मिला। सरकार ने इंटर्नशिप के दौरान मिलने वाले मासिक भत्ते को 4,000 रुपये से बढ़ाकर 12,000 रुपये प्रतिमाह करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
दुग्ध विकास एवं पशुपालन मंत्री Dharampal Singh ने बताया कि उत्तर प्रदेश में पशुधन की बड़ी संख्या होने के कारण पशु चिकित्सकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। पशुओं के स्वास्थ्य संरक्षण, महामारी नियंत्रण और नस्ल सुधार जैसे कार्यों में प्रशिक्षित पशु चिकित्सकों की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है।
सरकार के इस फैसले का लाभ प्रदेश के तीन प्रमुख कृषि एवं पशु चिकित्सा विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत छात्रों को मिलेगा। इनमें उत्तर प्रदेश पंडित दीन दयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान संस्थान, आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय शामिल हैं।
सरकार के अनुसार वर्तमान में छात्रों को 4,000 रुपये प्रतिमाह इंटर्नशिप भत्ता दिया जा रहा था, जिसे अब तीन गुना बढ़ाकर 12,000 रुपये किया गया है। इस निर्णय से लगभग 300 छात्रों को सीधा लाभ मिलेगा।
पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया कि हरियाणा, कर्नाटक और केरल जैसे राज्यों में दिए जा रहे इंटर्नशिप भत्ते का अध्ययन करने के बाद यह फैसला लिया गया है। इस योजना के लागू होने से सरकार पर लगभग 4.20 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा। यह राशि विश्वविद्यालयों को दिए जाने वाले गैर-वेतन मद के सरकारी अनुदान से उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का कहना है कि इससे छात्रों का मनोबल बढ़ेगा, पढ़ाई और प्रशिक्षण के प्रति उनकी रुचि मजबूत होगी तथा समानता के सिद्धांत को भी बढ़ावा मिलेगा।
योगी सरकार की कैबिनेट बैठक में उच्च शिक्षा क्षेत्र से जुड़ा एक और अहम निर्णय लिया गया। उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम 2019 के तहत “सरदार पटेल एपेक्स यूनिवर्सिटी, मीरजापुर” की स्थापना के लिए उसकी प्रायोजक संस्था को आशय पत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।
उच्च शिक्षा मंत्री Yogendra Upadhyay ने बताया कि वाराणसी स्थित एपेक्स वेलफेयर ट्रस्ट, जो वर्तमान में बड़े अस्पतालों का संचालन कर रहा है, अब शिक्षा क्षेत्र में भी कदम रख रहा है। ट्रस्ट ने मीरजापुर में निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने का प्रस्ताव सरकार को दिया था, जिसकी सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं।
प्रस्ताव के अनुसार यह विश्वविद्यालय मीरजापुर जिले की चुनार तहसील के समसपुर गांव में लगभग 50.45 एकड़ भूमि पर स्थापित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्र में उच्च शिक्षा के नए अवसर पैदा होंगे और स्थानीय विकास को भी गति मिलेगी।
उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या तेजी से बढ़ी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 तक प्रदेश में केवल 14 सरकारी विश्वविद्यालय थे, जबकि उसके बाद आठ नए सरकारी विश्वविद्यालय स्थापित किए जा चुके हैं।
इसी तरह लंबे समय तक 29 पर स्थिर रहने वाले निजी विश्वविद्यालयों की संख्या अब बढ़कर 52 हो गई है। इसके अलावा आठ अन्य संस्थानों को भी लेटर ऑफ इंटेंट जारी किया जा चुका है।
उत्तर प्रदेश में हो रही राजनीतिक हलचल, प्रशासनिक फैसले, धार्मिक स्थल अपडेट्स, अपराध और रोजगार समाचार सबसे पहले पाएं। वाराणसी, लखनऊ, नोएडा से लेकर गांव-कस्बों की हर रिपोर्ट के लिए UP News in Hindi सेक्शन देखें — भरोसेमंद और तेज़ अपडेट्स सिर्फ Asianet News Hindi पर।