UP News: नोएडा विवाद के बाद मजदूरी दरों में बदलाव, तीन श्रेणियों में तय हुआ नया वेतन

Published : Apr 18, 2026, 10:02 AM IST
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सार

उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यूनतम मजदूरी दरों में संशोधन कर नई दरें लागू की हैं। तीन श्रेणियों में विभाजन कर जीवन-यापन लागत के आधार पर मजदूरी तय की गई है, जिससे श्रमिकों को राहत मिलेगी।

लखनऊ/गौतमबुद्धनगर। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में हाल की घटनाओं के बाद उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए न्यूनतम मजदूरी दरों में संशोधन का निर्णय लिया है। इस फैसले को राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। इसके साथ ही नई मजदूरी दरें कानूनी रूप से लागू हो गई हैं और अब पूरे प्रदेश में इन्हें अनिवार्य रूप से पालन करना होगा।

वेतन विवाद सुलझाने के लिए बनी उच्च स्तरीय समिति

श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच वेतन वृद्धि को लेकर उत्पन्न विवाद को सुलझाने के लिए राज्य सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था। इस समिति ने स्थिति का अध्ययन कर तीन अलग-अलग श्रेणियों में मजदूरी दर तय करने की सिफारिश की। सरकार ने इन सिफारिशों के आधार पर अंतरिम राहत के तौर पर नई मजदूरी दरें लागू की हैं, जिससे अलग-अलग क्षेत्रों में जीवन-यापन की लागत के अनुसार संतुलन बनाया जा सके।

तीन श्रेणियों में बांटा गया प्रदेश: क्षेत्र के अनुसार मजदूरी तय

समिति की सिफारिश के अनुसार उत्तर प्रदेश को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है।

प्रथम श्रेणी (गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद):

यहां जीवन-यापन की लागत अधिक होने के कारण मजदूरी दरें भी ज्यादा रखी गई हैं।

  • अकुशल श्रमिक: 13,690 रुपये
  • अर्द्धकुशल श्रमिक: 15,059 रुपये
  • कुशल श्रमिक: 16,868 रुपये

द्वितीय श्रेणी (नगर निगम वाले अन्य जिले):

  • अकुशल श्रमिक: 13,006 रुपये
  • अर्द्धकुशल श्रमिक: 14,306 रुपये
  • कुशल श्रमिक: 16,025 रुपये

तृतीय श्रेणी (अन्य सभी जिले):

  • अकुशल श्रमिक: 12,356 रुपये
  • अर्द्धकुशल श्रमिक: 13,590 रुपये
  • कुशल श्रमिक: 15,224 रुपये

इन सभी मजदूरी दरों में मूल वेतन के साथ परिवर्तनीय महंगाई भत्ता (VDA) भी शामिल किया गया है।

लंबित संशोधन और महंगाई को ध्यान में रखकर लिया गया फैसला

वर्ष 2019 और 2024 में प्रस्तावित मजदूरी संशोधन लागू नहीं हो पाए थे, जिससे मजदूरी और महंगाई के बीच अंतर बढ़ गया था। अब उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार पर इस लंबित संशोधन को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया है।

सरकार का कहना है कि यह कदम श्रमिकों को राहत देने के साथ-साथ औद्योगिक शांति बनाए रखने और उत्पादन को सुचारु रखने के लिए जरूरी है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि नई दरों के लागू होने के बाद किसी भी प्रकार की अनियमितता या श्रमिकों के अधिकारों में कटौती पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच विवाद के बाद लिया गया निर्णय

यह फैसला उस समय लिया गया जब श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच वेतन बढ़ाने को लेकर विवाद बढ़ गया था और औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित होने लगी थीं। श्रमिकों का कहना था कि बढ़ती महंगाई और किराए के कारण जीवन यापन कठिन हो गया है। वहीं नियोक्ताओं ने वैश्विक आर्थिक दबाव, बढ़ती लागत और सप्लाई चेन में बाधाओं का हवाला दिया।

समिति ने सभी पक्षों से चर्चा कर तैयार किया संतुलित समाधान

स्थिति को संभालने के लिए बनाई गई समिति की अध्यक्षता अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार ने की। समिति में अपर मुख्य सचिव (MSME), प्रमुख सचिव श्रम एवं सेवायोजन विभाग और श्रमायुक्त उत्तर प्रदेश को सदस्य बनाया गया। इसके अलावा समिति में श्रमिकों के पांच और नियोक्ताओं के तीन प्रतिनिधि भी शामिल थे। समिति ने मौके पर जाकर सभी पक्षों से बातचीत की और एक संतुलित समाधान तैयार किया, जिसके आधार पर नई मजदूरी दरें तय की गईं।

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