Ghaziabad Murder Case : ईद के दिन आखिर गाजियाबाद में ऐसा क्या हुआ जो आरोपी ने मासूम को बकरे की तरह काट डाला? धोखे से बुलाया, फिर हुआ हमला? गाजियाबाद केस में उठ रहे बड़े सवाल? खोड़ा में किशोर की मौत का रहस्य: आखिर बुलाने के पीछे क्या थी मंशा?
Ghaziabad crime news : गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश): गाजियाबाद के खोड़ा पुलिस थाना इलाके से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। जहां एक युवक ने ईद के दिन चाकू मारकर नाबालिग बच्चे की हत्या कर दी। आरोपी हत्या करने के बाद फरार हो गया। इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। मासूम की बस गलती यह थी कि उसने बकरीद कुर्बानी पर बकरा को काटते हुए देख लिया था। इसी बात पर आरोपी ने बकरे की तरह बच्चे की भी बलि चढ़ा दी।

आखिर क्या है पूरा मामला?
इंदिरापुरम के एसीपी अभिषेक श्रीवास्तव ने शुक्रवार को बताया, "28 मई को दोपहर करीब 3.30 बजे खोड़ा थाने में सूचना मिली कि एक लड़के ने दूसरे लड़के को चाकू मार दिया है। सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और घायल लड़के को इलाज के लिए पास के अस्पताल में भर्ती कराया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिवार की तरफ से लिखित शिकायत मिली है और आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है। आरोपी लड़के की तलाश के लिए टीमें बना दी गई हैं।"
किशोर की मौत से पहले क्या हुआ था? मां के आरोपों ने चौंकाया
- वहीं, मृतक की मां ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे को बहला-फुसलाकर बुलाया गया और फिर उस पर हमला किया गया। मां ने बताया, "ईद के दिन अरशद नाम के एक लड़के ने मेरे बच्चे को धोखे से बुलाया। उससे पूछा गया कि क्या उसने कभी बकरा कटते देखा है, जिस पर उसने 'नहीं' कहा। इसके बाद मेरे बच्चे को चाकू मार दिया गया... मुझे इंसाफ चाहिए...।"
- घटना पर दुख जताते हुए और पुलिस की निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए मृतक की मां ने कहा, "मैं घर पर नहीं थी, ड्यूटी पर थी। किसी ने मुझे फोन करके बताया कि मेरे बेटे को चाकू मार दिया गया है। जब मैं आई, तो मैंने शाम 7 बजे के करीब अपने बेटे का चेहरा देखा। उसके बाद मुझे आधे दिन तक उसका चेहरा देखने को नहीं मिला। मुझे इंसाफ़ चाहिए। पुलिस कुछ नहीं कर रही है, वो सो रही है। अगर पुलिस ने समय पर कार्रवाई की होती, तो क्या वो उस शख्स को नहीं पकड़ पाती जिसने मेरे बेटे को 1 बजे चाकू मारा था? क्या वो उसे नहीं पकड़ पाते?"
हिंदू बच्चों को ऐसी बातों के बारे में क्या पता?
- अस्पताल पहुंचने के बाद जो कुछ देखा, उसे याद करते हुए मृतक की मौसी सुनीता ने कहा, "मैं सबसे पहले अस्पताल गई थी। मैंने उन्हें वहां देखा। वे यह साबित करना चाहते थे कि पहले बकरे की कुर्बानी दी और अब वे इंसान की कुर्बानी देंगे। बकरीद के दिन मेरे बच्चे को धोखे से घर से बुलाया गया। फिर उससे पूछा गया कि बकरा कैसे काटा जाता है। हिंदू बच्चों को ऐसी बातों के बारे में क्या पता? हमारे बच्चों ने कभी खून-खराबा नहीं देखा। वे क्या कहते? यही कहते कि उन्होंने कभी नहीं देखा। फिर उसके पेट में चाकू घोंप दिया गया और उसकी जिंदगी वहीं खत्म हो गई।"
- इंसाफ में देरी और गिरफ्तारी न होने पर गुस्सा जाहिर करते हुए सुनीता ने कहा, "24 घंटे से ज्यादा हो गए हैं और अभी तक इंसाफ नहीं मिला है। अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। 24 घंटे बाद भी प्रशासन और समय मांग रहा है। मेरे भाई का शव अभी भी अस्पताल में पड़ा है। बिजली भी काट दी गई है ताकि हम विरोध न कर सकें या इंसाफ के लिए अपनी आवाज न उठा सकें।"


