government job की बौछार! 2026-27 में डेढ़ लाख भर्तियां, योगी सरकार ने दिया बड़ा तोहफा

Published : May 03, 2026, 03:43 PM IST
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सार

योगी आदित्यनाथ ने दावा किया है कि उत्तर प्रदेश में पिछले 9 वर्षों में 9 लाख से अधिक युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरियां दी गई हैं, जो एक रिकॉर्ड है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले भर्ती प्रक्रियाएं भ्रष्टाचार और भेदभाव से प्रभावित थीं, लेकिन अब सख्त कानून लागू कर प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाया गया है। 

लखनऊ, 3 मई। “उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों में 9 लाख से अधिक नौजवानों को सरकारी नौकरी दी गई है। यह किसी भी राज्य में सर्वाधिक नियुक्तियों की प्रक्रिया को सकुशल एवं पारदर्शी तरीके से संपन्न करने का रिकॉर्ड है। सिर्फ अधीनस्थ चयन आयोग इस वर्ष 32 हजार से अधिक नियुक्तियों की प्रक्रिया संपन्न करेगा। शिक्षा चयन आयोग हजारों शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी करेगा। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को लगभग 15 हजार भर्तियां करनी है। इस प्रकार चालू वित्तीय वर्ष (2026-27) में डेढ़ लाख से अधिक सरकारी भर्तियों की प्रक्रिया संपन्न होनी है। प्रक्रिया में किसी प्रकार की सेंध न लगे, इसके लिए सख्त कानून भी बनाया है, जिसके तहत सेंधमारी करने वालों को आजीवन कारावास की सजा और उसकी पूरी संपत्ति को जब्त किया जाता है।”

बीमारू’ से बेहतर बना UP!

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को लोक भवन में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के लिए नवचयनित 357 कनिष्ठ विश्लेषकों (औषधि) तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के नवचयनित 252 दंत स्वास्थ्य विज्ञानियों को नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में कहीं। अपने संबोधन के पहले मुख्यमंत्री ने नवचयनित अभ्यर्थियों को नियुक्त पत्र वितरित किए। युवाओं के सपने का टूटना आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ धोखा मुख्यमंत्री ने कहा कि हर माता-पिता की इच्छा होती है कि उनका बच्चा अच्छी शिक्षा प्राप्त कर एक सुरक्षित और बेहतर भविष्य की ओर आगे बढ़े। इसके लिए वे हरसंभव प्रयास करते हैं, लेकिन जब अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते, तो न केवल उस युवा के सपने टूटते हैं, बल्कि उसके माता-पिता और परिवार से जुड़े अन्य लोगों की उम्मीदें भी चकनाचूर हो जाती हैं। किसी युवा के सपनों का टूटना केवल एक व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ धोखा है। उत्तर प्रदेश की ‘बीमारू राज्य’ के रूप में पहचान बनाने में चयन प्रक्रियाओं में भेदभाव, बेईमानी और भ्रष्टाचार की भूमिका थी। भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताएं इतनी अधिक थीं कि न्यायालय को बार-बार हस्तक्षेप करना पड़ता था।

फर्जी डिग्री वाले लोग करते थे चयन प्रक्रिया का नेतृत्व 

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले लगभग हर नियुक्ति प्रक्रिया पर कहीं न कहीं कोर्ट स्टे लगते थे, न्यायालय से कड़ी टिप्पणियां मिलती थीं। स्थिति यह थी कि जो व्यक्ति पात्र नहीं था, वह भी आयोग का चेयरमैन बन जाता था। यहां तक कि फर्जी डिग्री वाले लोग चयन प्रक्रिया का नेतृत्व कर रहे थे। पैसे के लेनदेन के कारण भर्तियां प्रभावित होती थीं और योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिल पाता था। वर्तमान समय में कई युवा उस दौर से अनभिज्ञ हैं, क्योंकि वे तब नाबालिग थे। वर्ष 2017 के बाद भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाया गया है। इसका परिणाम यह है कि अब तक पुलिस विभाग में 2,20,000 से अधिक भर्तियां सफलतापूर्वक की जा चुकी हैं। गत 9 वर्षों में हम लोगों ने निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से रिकॉर्ड 9 लाख से अधिक युवाओं की भर्तियां कीं।

 मंडल स्तर पर ए ग्रेड की लैब मौजूद

 सीएम ने कहा कि अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा 4 और 6 मई को नियुक्त पत्र वितरिण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। ये लगातार चलेगा। सरकार बिना भेदभाव पिछले नौ वर्षों में कोरोना महामारी के बावजूद प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय तीन गुना करने में सफल रही है। प्रदेश में आज देश का सबसे अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर, एक्सप्रेसवे, हाइवे आदि मौजूद हैं। आज वे विभाग अच्छा काम कर रहे हैं, जिन्हें पहले लोग जानते तक नहीं थे। लगभग हर जनपद में मेडिकल कॉलेज हैं, दो एम्स कार्यरत हैं। 2017 से पहले सब भगवान भरोसे था, परिणाम भी उसी प्रकार से आते थे। उस दौरान पूरा सिस्टम ही बीमारू था। खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग के पास दवा की क्वालिटी एवं खाद्य पदार्थों में मिलावट जांचने के उपकरण व लैब्स नहीं थीं। अब विभाग के पास जांच के लिए मंडल स्तर पर ए-ग्रेड की लैब हैं। प्रशिक्षित मैनपॉवर है, जो समय-सीमा में जांच के नतीजे बता देंगे। वर्ष 2017 से पहले पांच प्रयोगशालाएं थीं, आज आधुनिक उपकरणों के साथ 18 प्रयोगशालाएं हैं।

कनिष्ठ विश्लेषकों (खाद्य) की भर्ती भी जल्द

 सीएम ने कहा कि पहले 5 प्रयोगशालाओं में 12,000 नमूने प्रतिवर्ष लिए जाते थे। अब इनकी संख्या बढ़कर 55,000 हो गयी है। आज 357 कनिष्ठ विश्लेषकों (औषधि) की भर्ती प्रक्रिया संपन्न हुई है, जिसके साथ ही इनकी संख्या 44 से बढ़कर 401 हो गयी है। वर्तमान में कनिष्ठ विश्लेषकों (खाद्य) की संख्या अभी केवल 58 है। हमने 417 पदों के लिए अधियाचन भेजा है, जो उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में विचाराधीन है। जल्द ही भर्ती प्रक्रिया संपन्न होगी। वर्तमान में 36 हजार खाद्य नमूने प्रतिवर्ष लिये जाते हैं। भर्ती प्रक्रिया संपन्न होने से इनकी संख्या बढ़कर प्रतिवर्ष 1,08,000 से अधिक हो जाएगी। आज 252 डेंटल हाइजीनिस्ट को भी नियुक्ति पत्र वितरित किए गए हैं।

बेईमान राजनीतिज्ञों और भ्रष्ट नौकरशाहों को रोकना 

सीएम ने कहा कि आज प्रदेश में सुरक्षा का बेहतर वातावरण बना, दंगामुक्त और गुंडामुक्त प्रदेश हुआ, जिससे अच्छे निवेश आए। पिछले दिनों फार्मा सेक्टर में 17 निवेशकों को पत्र जारी किए हैं, जो राज्य के अंदर ही प्रोडक्शन और मैन्युफैक्चरिंग करेंगे। वर्ष 2017 से पहले भर्ती बोर्ड के चेयरमैन एक ओर बैठते थे और चाचा-भतीजे की जोड़ी वसूली के लिए निकल पड़ती थी। बेईमान राजनीतिज्ञों और भ्रष्ट नौकरशाहों को रोकना है, तो इसकी शुरुआत अपने आप से करनी होगी।

इस अवसर पर डिप्टी सीएम बृजेश पाठक, आयुष मंत्री एवं खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के राज्य मंत्री दया शंकर मिश्रा दयालु, चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग के राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य अमित घोष, प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग एम देवराज, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के सचिव एवं आयुक्त रोशन जैकब आदि उपस्थित थे।

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