
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले 9 वर्षों में सुशासन (गुड गवर्नेंस) को केंद्र में रखकर ‘ईज ऑफ लिविंग’ को मजबूत करने पर व्यापक काम किया गया है। सरकारी योजनाओं की प्रगति और आंकड़े बताते हैं कि अब प्रदेश में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के लिए लोगों को बाहर जाने की जरूरत कम हुई है। पारदर्शी व्यवस्था और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन से यूपी अब एक मजबूत, आत्मनिर्भर और तेजी से विकसित होता राज्य बन रहा है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में 2017 के बाद बड़ा विस्तार हुआ है।
आयुष्मान भारत योजना के तहत 5.64 करोड़ लोगों को गोल्डन कार्ड दिया गया है, जिससे उन्हें 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल रहा है।
शिक्षा क्षेत्र में भी बड़े बदलाव देखने को मिले हैं।
इससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा मिला है।
कौशल विकास के क्षेत्र में भी सरकार ने कई कदम उठाए हैं।
इन योजनाओं से युवाओं को स्वरोजगार और रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं।
सामाजिक सुरक्षा योजनाओं ने लोगों के जीवन में स्थिरता लाई है।
पेंशन राशि ₹300 से बढ़ाकर ₹1000 की गई और अप्रैल 2026 से ₹1500 होगी।
इसके अलावा:
DBT के जरिए 31 विभागों की 191 योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंच रहा है।
महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए कई योजनाएं लागू की गईं:
ग्रामीण आजीविका मिशन से 1.06 करोड़ महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं, जबकि 18.55 लाख महिलाएं ‘लखपति’ बन चुकी हैं।
डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव हुआ है।
इससे करीब 10 हजार रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं।
योगी सरकार के 9 वर्षों में स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और डिजिटल सेवाओं में सुधार से उत्तर प्रदेश में ‘ईज ऑफ लिविंग’ बेहतर हुआ है। इन प्रयासों ने प्रदेश को आत्मनिर्भर और विकसित राज्य बनने की दिशा में मजबूत बनाया है।
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