जिस तालाब को लोग भूल चुके थे, वहां बना शानदार जल-सृष्टि पार्क! देहरादून को मिला नया ठिकाना

Published : Aug 20, 2026, 08:16 PM IST
Dehraduns Miyanwala Gets New Jal Srishti Park After 8 63 Crore Makeover of Old Pond

सार

देहरादून के मियांवाला में 8.63 करोड़ रुपये की लागत से पुराने जौहड़ और तालाब का कायाकल्प कर जल-सृष्टि पार्क बनाया गया है। यहां पहाड़ी शैली का गेट, योग डेक, वॉकिंग ट्रैक, नौकायन, हरियाली और कई जनसुविधाएं विकसित की गई हैं।

देहरादून में विकास की रफ्तार के बीच अब पुराने जलस्रोतों को बचाने और उन्हें लोगों के लिए उपयोगी बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। मियांवाला में वर्षों से उपेक्षित पड़े जौहड़ और पुराने तालाब की तस्वीर अब बदल गई है। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने करीब 8.63 करोड़ रुपये की लागत से यहां जल-सृष्टि पार्क विकसित किया है। अब यह जगह सिर्फ जलस्रोत नहीं, बल्कि हरियाली, योग, वॉकिंग, मनोरंजन और सुकून का नया सार्वजनिक स्थल बन गई है।

पुराने जौहड़ से तैयार हुआ आधुनिक जल-सृष्टि पार्क

पंचायत घर गन्ना सेंटर के पास स्थित जौहड़ की भूमि लंबे समय से उपेक्षित थी। एमडीडीए ने यहां पुराने तालाब को संरक्षित करने के साथ आसपास के क्षेत्र का व्यवस्थित विकास किया है। जलस्रोत और जलीय जीवों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। इसके अलावा लोगों के लिए नौकायन जैसी गतिविधियों की भी व्यवस्था की गई है। पार्क में जलीय फूल, मछलियां, पक्षी और हरियाली इसे प्राकृतिक रूप देते हैं। तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच किसी पुराने जलस्रोत को खत्म करने के बजाय उसे संरक्षित कर जनसुविधा से जोड़ने की यह पहल खास मानी जा रही है।

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पहाड़ी शैली का गेट, योग डेक और वॉकिंग ट्रैक

जल-सृष्टि पार्क को सिर्फ हरियाली तक सीमित नहीं रखा गया है। यहां उत्तराखंड की पारंपरिक पहाड़ी शैली में मुख्य प्रवेश द्वार बनाया गया है। लोगों के लिए योग डेक, योग से जुड़ी मूर्तिकला, गजीबो, वॉकिंग ट्रैक और गार्डन बेंच तैयार किए गए हैं। इसके साथ कैंटीन, स्वच्छ शौचालय और तालाब के आसपास सुरक्षा रेलिंग भी लगाई गई है। इस तरह पार्क को परिवारों, बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों के लिए एक सुविधाजनक सार्वजनिक स्थान के रूप में विकसित किया गया है।

सिटी फॉरेस्ट के बाद पर्यावरण संरक्षण की नई पहल

एमडीडीए के मुताबिक, यह परियोजना शहर के विकास को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सिटी फॉरेस्ट के बाद जल-सृष्टि पार्क को भी देहरादून में हरित क्षेत्रों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की पहल के तौर पर देखा जा रहा है। एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने पार्क का निरीक्षण किया और परिसर में रुद्राक्ष का पौधा भी लगाया। उन्होंने कहा कि पुराने जलस्रोतों को बचाना और उन्हें जनोपयोगी बनाना प्राथमिकता है। उनके मुताबिक, परियोजना का उद्देश्य केवल सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि जलस्रोत का संरक्षण और लोगों को बेहतर सार्वजनिक स्थान उपलब्ध कराना भी है।

एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने भी इसे विकास और पर्यावरण संरक्षण का उदाहरण बताया। उनका कहना है कि योग, वॉकिंग और नौकायन जैसी सुविधाओं के जरिए लोगों को प्रकृति से जोड़ने का प्रयास किया गया है। मियांवाला का जल-सृष्टि पार्क इसलिए भी अहम है क्योंकि यहां एक पुराने और उपेक्षित जलस्रोत को खत्म करने के बजाय उसे संरक्षित करते हुए आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा गया है। आने वाले समय में यदि ऐसे अन्य जलस्रोतों का भी इसी तरह पुनर्जीवन होता है, तो देहरादून के बढ़ते शहरी दबाव के बीच हरियाली और प्राकृतिक जल संरक्षण दोनों को मजबूती मिल सकती है।

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