Uttarakhand Monsoon: CM पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को किया अलर्ट, बोले- लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी

Published : Jul 18, 2026, 09:40 AM IST
Uttarakhand Monsoon: CM पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को किया अलर्ट, बोले- लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी

सार

उत्तराखंड के CM पुष्कर सिंह धामी ने मॉनसून, चार धाम यात्रा और डेंगू को लेकर एक बड़ी बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को 24x7 अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया और साफ कहा कि लोगों की सुरक्षा में कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास पर सभी जिलों के अधिकारियों के साथ एक बड़ी बैठक की। इस बैठक में मॉनसून की मौजूदा स्थिति, भारी बारिश, चार धाम यात्रा, डेंगू की रोकथाम और पूरे उत्तराखंड में आपदा की तैयारियों का जायजा लिया गया।

मीटिंग के दौरान मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया कि लोगों की सुरक्षा सरकार की पहली प्राथमिकता है और इस मामले में किसी भी स्तर पर कोई लापरवाही, ढिलाई या सुस्ती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को सिर्फ समीक्षा बैठकें करने के बजाय, जमीन पर जाकर व्यवस्थाओं को परखने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी विभागों और जिला प्रशासनों को मॉनसून के दौरान 24x7 अलर्ट पर रहने को कहा। धामी ने जोर देकर कहा कि किसी भी आपदा या इमरजेंसी के दौरान राहत और बचाव कार्यों में कोई देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि हर बड़ी घटना की सूचना तुरंत मुख्यमंत्री कार्यालय और राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र को दी जाए और समय पर राहत और पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए।

चार धाम यात्रा का भी लिया जायजा

चार धाम यात्रा की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने जिलेवार सड़कों की हालत, भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों, तीर्थयात्रियों की आवाजाही और चारों धामों में की गई व्यवस्थाओं पर अपडेट लिया। उन्होंने कहा कि यह तीर्थयात्रा लाखों लोगों की आस्था के साथ-साथ उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था से भी जुड़ी है। इसलिए तीर्थयात्रियों की सुरक्षा, सुचारू यातायात, स्वास्थ्य सेवा, पीने का पानी, साफ-सफाई और पूरी व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

अधिकारियों ने बैठक में बताया कि इस साल अब तक 44.65 लाख से ज्यादा श्रद्धालु चार धाम यात्रा कर चुके हैं। धामी ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों का आना उत्तराखंड में उनके विश्वास को दिखाता है और इस बात पर जोर दिया कि हर तीर्थयात्री एक सुरक्षित और संतोषजनक अनुभव के साथ घर लौटना चाहिए।

आपदा से निपटने की तैयारी

उपकरण और टेक्नोलॉजी की तैनाती

मुख्यमंत्री ने विभागों को निर्देश दिया कि भूस्खलन की आशंका वाली जगहों पर JCB, पोकलैंड मशीनें, तकनीकी टीमें और अन्य उपकरण पहले से तैनात किए जाएं ताकि सड़कें बंद होने पर उन्हें तुरंत खोला जा सके। उन्होंने अधिकारियों से संवेदनशील इलाकों में GPS और आधुनिक संचार प्रणालियों का प्रभावी ढंग से उपयोग करने को भी कहा।

विभागों के बीच तालमेल

धामी ने NDRF, SDRF, पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, बिजली, पेयजल और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभागों सहित सभी विभागों को पूरे तालमेल के साथ काम करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि भारी बारिश या भूस्खलन के कारण बाधित हुई बिजली, पानी और संचार सेवाओं को प्राथमिकता के आधार पर बहाल किया जाए और जहां भी जरूरी हो, अतिरिक्त टीमें तैनात की जाएं। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि दूर-दराज और संवेदनशील इलाकों में अनाज, दवाएं, ईंधन और अन्य जरूरी चीजों का पर्याप्त स्टॉक पहले से ही सुनिश्चित कर लिया जाए, ताकि सड़कें बंद होने पर स्थानीय लोगों को कोई कमी न हो।

कमजोर समूहों की सुरक्षा

गर्भवती महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों और गंभीर रूप से बीमार मरीजों सहित कमजोर समूहों की सुरक्षा पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासनों को निर्देश दिया कि जहां भी आवश्यक हो, संवेदनशील क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं को पहले से ही सुरक्षित स्थानों या चिकित्सा सुविधाओं में शिफ्ट कर दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि आपातकालीन बचाव और राहत कार्यों के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर सेवाएं स्टैंडबाय पर रहेंगी।

डेंगू को लेकर तैयारी

डेंगू की तैयारियों की समीक्षा करते हुए धामी ने शहरी स्थानीय निकायों और ग्राम पंचायतों को नियमित रूप से फॉगिंग, लार्वा-रोधी स्प्रे, सफाई अभियान और जलभराव को साफ करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि सभी स्वास्थ्य सुविधाओं में टेस्टिंग किट, दवाएं, खून, अस्पताल के बिस्तर और मेडिकल स्टाफ की पर्याप्त उपलब्धता हो।

बेहतर रिस्पॉन्स के लिए अन्य निर्देश

मुख्यमंत्री ने मॉनसून के दौरान पुलों का सुरक्षा ऑडिट करने, जलभराव को रोकने के लिए नालों की गहन सफाई करने और दूर-दराज के इलाकों में वैकल्पिक संचार प्रणाली विकसित करने का भी आदेश दिया ताकि आपदा प्रतिक्रिया में कोई रुकावट न आए। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को नियमित रूप से फील्ड विजिट करने, बचाव कार्यों के दौरान "गोल्डन आवर" सिद्धांत का पालन सुनिश्चित करने और जमीनी स्तर पर आपदा प्रतिक्रिया में सुधार के लिए जनप्रतिनिधियों, गैर सरकारी संगठनों और स्थानीय संगठनों के साथ समन्वय को मजबूत करने का भी निर्देश दिया।

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एशियानेट न्यूज एडिटोरियल स्टाफ ने एडिट नहीं किया है और यह एक सिंडिकेटेड फीड से प्रकाशित हुई है।)

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