Uttarakhand News: धामी सरकार की योजना से 106 युवाओं को विदेश में मिली नौकरी, जानें पूरी योजना

Published : Oct 09, 2026, 03:50 PM IST
pushkar singh dhami global jobs language training

सार

उत्तराखंड में धामी सरकार की वैश्विक रोजगार योजना से 106 युवाओं को विदेश में नौकरी मिली। प्रदेश में जर्मन-जापानी भाषा के 158 ट्रेनिंग सेंटर चल रहे हैं।

उत्तराखंड के युवाओं के लिए विदेश में नौकरी पाने का रास्ता खुल रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर शुरू की गई मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना के तहत अब तक प्रदेश के 106 युवा विदेश में रोजगार हासिल कर चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा 75 युवा जापान में काम कर रहे हैं। वहीं, एक युवा जर्मनी और 30 युवा सऊदी अरब में विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

युवाओं को विदेश में नौकरी के लिए तैयार करने के उद्देश्य से प्रदेश में विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए जर्मन और जापानी भाषा के कुल 158 प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। सरकार की योजना इस नेटवर्क का और विस्तार करने की है। इसके तहत उत्तरकाशी और टिहरी जिले में भी जल्द विदेशी भाषा प्रशिक्षण केंद्र खोले जाएंगे।

Uttarakhand Global Employment Scheme: 106 युवाओं को मिली विदेश में नौकरी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर मई 2023 में मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना को मंजूरी दी गई थी। योजना को जमीन पर उतारने के लिए कौशल एवं सेवायोजन विभाग के तहत विदेश रोजगार प्रकोष्ठ बनाया गया है। सरकार का मकसद उत्तराखंड के युवाओं को अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरूरतों के मुताबिक तैयार करना और उन्हें विदेश में रोजगार के ज्यादा अवसर उपलब्ध कराना है। इसके लिए युवाओं को जरूरी कौशल के साथ विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। योजना के तहत अब तक 106 युवा विदेश में नौकरी हासिल कर चुके हैं। इनमें 75 युवा जापान, एक जर्मनी और 30 युवा सऊदी अरब में कार्यरत हैं। ये युवा हेल्थ, हॉस्पिटेलिटी और दूसरे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।

German-Japanese Language Training: प्रदेश में चल रहे 158 प्रशिक्षण केंद्र

विदेश में रोजगार पाने के लिए भाषा का ज्ञान अहम माना जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड सरकार ने जर्मन और जापानी भाषा के प्रशिक्षण केंद्र शुरू किए हैं। फिलहाल प्रदेश में कुल 158 केंद्र संचालित हैं। जिलेवार केंद्रों की बात करें तो देहरादून में जर्मन भाषा के 75 और जापानी भाषा के 45 प्रशिक्षण केंद्र चल रहे हैं। अल्मोड़ा में जर्मन भाषा के 22 और बागेश्वर में जापानी भाषा के 16 केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। विदेश रोजगार प्रकोष्ठ से मिली जानकारी के मुताबिक, वर्तमान में देहरादून में जर्मनी के लिए चार बैच और जापान के लिए दो बैच में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वहीं, अल्मोड़ा में जर्मनी के लिए एक और बागेश्वर में जापान के लिए एक बैच संचालित है।

प्रशिक्षण केंद्रों का उद्देश्य युवाओं को विदेशी भाषा में दक्ष बनाने के साथ उन्हें विदेश में काम करने के लिए तैयार करना है। सरकार अब उत्तरकाशी और टिहरी में भी ऐसे केंद्र खोलने की तैयारी कर रही है, जिससे इन जिलों के युवाओं को भी प्रशिक्षण का अवसर मिल सके।

Dhami Government Jobs Plan: दूसरे देशों में भी रोजगार के अवसर तलाश रही सरकार

धामी सरकार की कोशिश सिर्फ जापान और जर्मनी तक सीमित नहीं है। प्रदेश के युवाओं के लिए दूसरे देशों में भी रोजगार के अवसर तलाशे जा रहे हैं। इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में उत्तराखंड आए जमैका में भारत के उच्चायुक्त मयंक जोशी, इथियोपिया में भारत के राजदूत देवेश उत्तम और जाम्बिया में भारत के उच्चायुक्त आलोक रंजन झा के साथ बैठक की।

बैठक में तीनों देशों में रोजगार की संभावनाओं और वहां कुशल मानव संसाधन की जरूरत पर विशेष रूप से चर्चा हुई। इसके बाद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन देशों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड के युवाओं को प्रशिक्षित करने की कार्ययोजना तैयार की जाए। इस पहल का उद्देश्य ऐसे युवाओं को तैयार करना है, जिनके पास संबंधित देश और क्षेत्र की मांग के अनुरूप कौशल हो। इससे विदेश में रोजगार के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है।

CM Pushkar Singh Dhami: वैश्विक मांग के अनुरूप तैयार होंगे युवा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना प्रदेश सरकार की कसौटी पर खरी उतरी है। योजना की सफलता को देखते हुए विदेशी भाषा प्रशिक्षण केंद्रों की संख्या बढ़ाई गई है। उन्होंने कहा कि युवाओं को वैश्विक मांग के अनुरूप आवश्यक कौशल और प्रशिक्षण देकर दक्ष बनाया जा रहा है। इसके लिए अधिकारियों को कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

सरकार का जोर इस बात पर है कि उत्तराखंड के युवा केवल देश के भीतर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी रोजगार के अवसर हासिल कर सकें। विदेशी भाषा प्रशिक्षण केंद्रों का विस्तार और नए देशों में रोजगार की संभावनाएं तलाशने की पहल इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं।

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