Uttarakhand News: हरि सेवा आश्रम संत सम्मेलन में CM पुष्कर सिंह धामी का बड़ा संदेश, सनातन पर जोर

Published : Jun 22, 2026, 07:54 PM IST
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सार

हरि सेवा आश्रम में संत सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और उत्तराखंड के विकास पर जोर दिया।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी सोमवार को हरि सेवा आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ एवं विशाल संत सम्मेलन में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित संत-महात्माओं का अभिनंदन किया और आश्रम द्वारा समाज सेवा, संस्कार निर्माण तथा जनजागरण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह समाज को आध्यात्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों और जीवन के वास्तविक उद्देश्य से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि ऐसी कथाएं समाज में सकारात्मक ऊर्जा और सांस्कृतिक जागरूकता का संचार करती हैं।

संत समाज का राष्ट्र निर्माण और संस्कृति संरक्षण में अहम योगदान

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि संत समाज भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा और राष्ट्र चेतना का प्रमुख वाहक रहा है। उन्होंने कहा कि इतिहास के विभिन्न कालखंडों में संतों और मनीषियों ने समाज को सही दिशा देने के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और उसके मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में संत समाज का योगदान अतुलनीय रहा है। समाज में नैतिकता और आध्यात्मिकता को बनाए रखने में भी संतों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सांस्कृतिक पुनर्जागरण का दौर

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश वर्तमान समय में सांस्कृतिक पुनर्जागरण के नए युग का साक्षी बन रहा है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम का विकास, उज्जैन में महाकाल लोक परियोजना और केदारनाथ धाम के पुनर्विकास जैसे कार्य भारत की आध्यात्मिक विरासत को नई ऊर्जा प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन पहलों के माध्यम से देश की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिल रही है और भारत अपनी प्राचीन परंपराओं के साथ आधुनिक विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनाने की दिशा में प्रयास

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक पहचान और सनातन मूल्यों की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य के तहत राज्य में धर्मांतरण विरोधी कानून, समान नागरिक संहिता (यूसीसी) और भू-कानून जैसे महत्वपूर्ण फैसले लागू किए गए हैं। इसके साथ ही सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने तथा कानून व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए भी प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।

युवाओं को सनातन परंपराओं से जोड़ने पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और दर्शन से जोड़ने के लिए राज्य सरकार कई महत्वपूर्ण पहल कर रही है। उन्होंने बताया कि दून विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज की स्थापना की गई है, जहां भारतीय दर्शन, संस्कृति और सभ्यता से जुड़े विषयों पर उच्च स्तरीय अध्ययन एवं शोध कार्य किए जाएंगे। इसके अलावा हरिद्वार में प्राच्य शोध संस्थान की स्थापना की प्रक्रिया भी चल रही है, जो भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

संतों के आशीर्वाद से उत्तराखंड को सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने का संकल्प

मुख्यमंत्री धामी ने स्वामी हरिचेतानंद जी महाराज का आभार व्यक्त करते हुए संत समाज से राज्य और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद देने का आग्रह किया। उन्होंने विश्वास जताया कि संतों के आशीर्वाद और जनता के सहयोग से उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने का संकल्प अवश्य पूरा होगा। इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती रितु खंडूरी भूषण, कैबिनेट मंत्री श्री सतपाल महाराज, श्री प्रदीप बत्रा सहित अनेक संत-महात्मा और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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