
टेक न्यूज. माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म Twitter पर अब दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क (Elon Musk) का हक हो गया है। मस्क ने कोर्ट की तय डेडलाइन से पहले ही ट्विटर को अपने कंट्रोल में ले लिया है। ट्विटर के ओनर बनते ही मस्क ने कंपनी के भारतीय मूल के सीईओ पराग अग्रवाल (Parag Agrawal) और चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर नेड सेगल (Ned Segal) समेत कई बड़े अफसरों को भी निकाल दिया है। इस फेहरिस्त में विजया गद्दे (Vijaya Gadde) का भी नाम शामिल है। बता दें कि विजया गद्दे कंपनी की लीगल हेड थीं। यह भी कहा जाता है कि पिछले साल अमेरिका के कैपिटल हिल में हुई हिंसा के बाद अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ट्विटर अकाउंट पर रोक लगाने के पीछे भी विजया गद्दे की अहम भूमिका थी। इस खबर में जानिए विजया के बारे में...
निकाले जाने के वक्त दोनों हेडक्वार्टर में ही मौजूद थे
Reuters की एक रिपोर्ट के मुताबिक जिस वक्त डील साइन हुई उस वक्त अग्रवाल और सेगल ट्विटर के सैन फ्रांसेस्को स्थित हेडक्वार्टर में ही मौजूद थे। इसके बाद दोनों को कंपनी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। हालांकि ट्विटर, एलन मस्क या किसी अधिकारी की ओर से इस संबंध में कोई भी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।आपको बता दें कि एलन मस्क ने पराग अग्रवाल के बीच पहले से ही विवाद चल रहा था। मस्क ने पराग पर आरोप लगाया था कि उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी खातों की संख्या को लेकर मस्क और ट्विटर निवेशकों को पूरी तरह से गुमराह किया था।
इसलिए बाहर हुईं विजया गद्दे
पराग अग्रवाल के साथ ही मस्क ने ट्विटर की लीगल हेड विजया गद्दे को भी बाहर का रास्ता दिखाया है। विजया ने साल 2011 में ट्विटर ज्वाइन किया था और वे कंपनी के सभी पॉलिसी, लीगल और सेफ्टी इशूज जैसे अहम डिपार्टमेंट्स देखती थी। एलन मस्क और ट्विटर के बीच हुई डील में भी विजया ने ही अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि बाद में मस्क और विजया के बीच लीगल मुद्दों पर कुछ मतभेद हो गए थे, इसलिए मस्क ने उन्हें भी कंपनी से बाहर किया है। बता दें कि ट्विटर में सबसे अधिक वेतन पाने वाले अधिकारियों में से एक विजया का जाना लगभग तभी तय माना जा रहा था जबसे मस्क ने कंपनी को खरीदने की घोषणा की थी।
ट्विटर की एक्जीक्यूटिव टीम की 'सबसे ताकतवर महिला' थीं
साल 2020 में विजया गद्दे उस समय सुर्खियों में आई थीं, जब उन्होंने अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के समय ट्विटर पर राजनीतिक विज्ञापनों पर रोक लगा दी थी। इसके अलावा विजया ने ही कथित तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के बेटे हंटर बाइडन के लैपटॉप से बरामद हुई कुछ फाइलों के आधार पर लिखी गई न्यूयॉर्क पोस्ट की ख़बर को ट्विटर पर शेयर होने से रोका था। इसके आलवा विजया को 2014 में फॉर्च्यून ने ट्विटर की एक्जीक्यूटिव टीम की 'सबसे ताकतवर महिला' बताया था।
यह है मस्क का प्लान
इस टेक ओवर के साथ, एलन मस्क का टारगेट सर्विस कंटेंट के मॉडरेशन रूल्स को लूज करके ट्विटर को बदलना, इसके एल्गोरिदम को अधिक ट्रांसपेरेंट बनाना और सब्सक्रिप्श बिजनेस को बेहतर करना है। इसके साथ ही साथ वे कर्मचारियों की छंटनी भी करेंगे।
कोर्ट की डेडलाइन से पहले ही किया टेकओवर
बता दें कि इसके साथ ही मस्क और ट्विटर के बीच पिछले कई महीने से चल रहा विवाद भी खत्म हो गया है। मस्क ने ट्विटर की खरीदने के लिए 44 अरब डॉलर का ऑफर दिया था। लेकिन बाद में वह इससे मुकर गए थे। इसके बाद ट्विटर ने उन्हें कोर्ट में घसीट लिया था। अगर मस्क शुक्रवार तक इस डील को आगे नहीं बढ़ाते तो कोर्ट में इस मामले की सुनवाई शुरू हो जाती। अब कोर्ट की तय डेडलाइन से पहले ही टेस्ला के CEO मस्क ने माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ट्विटर को टेक ओवर कर लिया है।
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