
टेक डेस्क। केरल सरकार ने गरीबों को मुफ्त इंटरनेट सेवा मुहैया कराने के लिए अपने प्रोजेक्ट के बारे में घोषणा कर दी है। इसे इस साल दिसंबर तक शुरू किया जा सकता है। इस प्रोजेक्ट का नाम केरल फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क (K-FON) है। केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन ने शुक्रवार को सरकार के इस फैसले की जानकारी दी। इसके पहले उन्होंने प्रोजेक्ट को लागू करने वाले कंसोर्टियम की कंपनियों के प्रमुख संचालकों से बातचीत की।
इंटरनेट बना मौलिक अधिकार
मुख्यमंत्री पी. विजयन ने कहा कि केरल पहला राज्य है, जिसने इंटरनेट की सुविधा को नागरिकों के मौलिक अधिकार के तौर पर घोषित किया है। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट का मकसद गरीबों को गुणवत्ता के साथ मुफ्त इंटरनेट सुविधा मुहैया कराना है। उन्होंने यह भी कहा कि दूसरे लोगों को यह किफायती दर पर उपलब्ध कराया जाएगा।
लॉकडाउन के चलते हुई देर
मुख्यमंत्री पी. विजयन का कहना था कि लॉकडाउन को चलते इस प्रोजेक्ट में देर हुई, लेकिन कंसोर्टियम के प्रमुख BEL के सीएमडी एमवी गौतम का कहना है कि इस प्रोजेक्ट को इस साल दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। कंसोर्टियम में पब्लिक सेक्टर की कई कंपनियां शामिल हैं। इसमें भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और Railtel के साथ निजी कंपनियां SRIT और एलएस केबल्स भी है। प्रोजेक्ट का काम केरल स्टेट इन्फ्रास्ट्रक्चर और केरल इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड कर रहा है। ऑप्टिकल फाइबर बिछाने के लिए KSEB पोस्ट्स का इस्तेमाल किया जा रहा है।
बढ़ेगा इंटरनेट का इस्तेमाल
मुख्यमंत्री पी. विजयन का कहना है कि इस प्रोजेक्ट से राज्य को काफी फायदा होगा। K-FON नेटवर्क से स्कूलों, सरकारी ऑफिसों, अस्पतालों और दूसरे संस्थानों को इंटरनेट कनेक्शन मुहैया कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के बाद जो हालात बन रहे हैं, उसे देखते हुए शिक्षा और बैंकिंग सेक्टर में इंटरनेट का इस्तेमाल बढ़ जाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट से राज्य को दुनिया का बड़ा औद्योगिक, शैक्षणिक और पर्यटन स्थल बनने में मदद मिलेगी।
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