
नई दिल्ली। भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) ने नए सिम कार्ड नियम को 1 दिसंबर से लागू कर दिया है। इसे इसी साल अगस्त में पेश किया गया था। यूजर्स की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सिम कार्ड नियम में कई बदलाव किए गए हैं।
थोक सिम कार्ड बेचने पर प्रतिबंध लगाया गया है। सिम बेचने वालों के लिए रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। उन्हें पुलिस से सत्यापन करना होगा। इन बदलावों से ऑनलाइन फ्रॉड रोकने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही सिम कार्ड का दुरुपयोग भी रोका जा सकेगा।
नए सिम कार्ड नियम की मुख्य बातें
1- टेलीकॉम एजेंट्स के लिए रजिस्ट्रेशन
नए नियम के अनुसार PoS (point-of-sale) एजेंट्स को टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर के साथ एक एग्रीमेंट पर साइन करना होगा। इसका मकसद PoS एजेंट्स द्वारा की जाने वाली अवैध गतिविधियों को रोकना है। अगर कोई PoS एजेंट अवैध गतिविधी करता पाया गया तो उसपर 10 लाख रुपए जुर्माना लगाया जा सकता है और उसकी सेवा को तीन साल के लिए रोका जा सकता है।
2- KYC नियम
नए सिम कार्ड खरीदने या मौजूदा नंबर पर नए सिम के लिए आवेदन करने के लिए ग्राहक को अपने बारे में जानकारी देनी होगी। सिम कार्ड खरीदने वाले व्यक्ति के आधार कार्ड पर मौजूद QR कोड को स्कैन कर डिटेल लिया जाएगा। पिछले ग्राहक द्वारा 90 दिनों तक डिस्कनेक्ट रखने के बाद ही नए व्यक्ति को वह मोबाइल नंबर दिया जाएगा। ग्राहक को सिम बदलने के लिए पूरी केवाईसी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
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3- सिम की थोक खरीदारी पर रोक
सरकार ने डिजिटल धोखाधड़ी को रोकने के लिए सिम कार्ड की थोक बिक्री रोक दी है। बिजनेस, कॉरपोरेट्स या इवेन्ट्स के लिए सिम कार्ड लिया जा सकेगा। हर सिम कार्ड के लिए केवाईसी भरना होगा। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अगस्त में कहा था, “पहले, लोग थोक में सिम कार्ड खरीदते थे। इस प्रावधान को खत्म करने का फैसला लिया गया है। हम एक उचित व्यावसायिक कनेक्शन प्रावधान लाएंगे। यह धोखाधड़ी वाली कॉल को रोकने में मदद करेगा।"
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