
काबुल. तालिबान की क्रूरता की कहानियां चौंकाने वाली हैं। अफगानिस्तान ही नहीं, दुनिया भर में इसके पीड़ित हैं। आज तक तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया है तब वे अपने साथ क्रूरता की कहानियां बता रही हैं। ऐसी ही एक कहानी वेल्स में अफगान अफगान शरणार्थी शहनाज हाकिम की है, जिसके सामने ही तालिबान ने उनके भतीजों की हत्या कर दी गई थी। शहनाज का परिवार काबुल में फंसा है और वे अपने परिवार को बचाने के लिए मदद मांग रही हैं।
'तालिबान जंगली जानवरों से भी बदतर हैं'
शहनाज ने कहा, तालिबान लोगों के घरों में जा रहे हैं। वे मेरे भतीजे के घर गए और पूछा है कि क्या उसके पास हथियार है। मेरे रिश्तेदार मौत के डर से छिप रहे हैं। कोई भी तालिबान पर भरोसा नहीं कर सकता, वे जंगली जानवरों से भी बदतर हैं।
"जब वे पहली बार अफगानिस्तान में सत्ता में आए तो मैंने अपने दो भतीजों को खो दिया। तालिबान ने उन्हें एक साथ मार दिया। ऐसा लगता है कि इतिहास दोहराया जा रहा है। यह बहुत दर्दनाक है।"
'मुझे अफगानिस्तान छोड़कर भागना पड़ा'
शहनाज ने कहा, एक महिला कभी भी तालिबान के शासन में नहीं रह सकती हैं। मुझे भागना पड़ा। आप तालिबान पर विश्वास नहीं कर सकते हैं। भले ही वह कहें कि वे बदल गए हैं।
उन्होंने कहा, कार्डिफ में यहां का हर अफगान परिवार, मैं जिसके संपर्क में हूं वह अपने परिवारों को लेकर बहुत परेशान है। निराश है। तनाव में है। क्या ब्रिटिश सरकार हमारी मदद कर सकती है? क्या वह मेरे भाई-बहनों और परिवार को बचा सकती है? ब्रिटिश सरकार से मैं अफगान लोगों की मदद करने की भीख मांगती हूं। अफगान लोगों को पीछे मत छोड़ो।
कार्डिफ के शहनाज को टीचिंग असिस्टेंट की नौकरी मिल गई। उन्हें अपने परिवार की याद आती है। वे याद करती है तालिबान के दहशत को। वे बताती हैं कि वे काबुल में अपनी बालकनी से बिना हेडस्कार्फ के एक पड़ोसी से बात कर रही थी। तभी एक तालिबानी ने उन्हें देख लिया और मशीन गन से गोली चला दी। गोलियां दीवार में लगीं। वे बाल-बाल बच गईं।
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