
ट्रेंडिंग डेस्क। इस घटना के बारे में आज भी देख-सुन और पढ़कर दिल कांप जाता है। पूरी दुनिया को हिला देने वाली इस घटना में दावा किया गया कि दो हजार 996 लोगों की मौत हो गई थी। हालांकि, इस घटना को लेकर बाद में कई हैरान करने वाले तथ्य भी सामने आए। इसमें एक था कि यह घटना 11 सितंबर 2001 को अंजाम नहीं दी जानी थी।
जी हां, आपने सही पढ़ा। दरअसल, यह भयावह घटना तो इस हमले से भी करीब आठ साल पहले यानी 26 फरवरी 1993 को अंजाम दी जानी थी। हालांकि, तब आतंकियों की सारी प्लानिंग ऐन वक्त पर फेल हो गई। तब यानी 26 फरवरी 1993 को न्यूयॉर्क सिटी में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के पास एक हमला हुआ जरूर, मगर वहां पास में खड़ी वैन में धमाका हुआ था।
साढ़े छह सौ किलो विस्फोटक से टॉवर को गिराना था
आतंकियों ने उस वैन में करीब साढ़े छह सौ किलो विस्फोटक रखा था। वे चाहते थे कि विस्फोट करके पूरा टॉवर उड़ा दिया जाए, मगर ऐसा हो न सका और टॉवर सही सलामत रही। मगर इस दर्दनाक घटना में छह लोगों की मौत हो गई थी और लगभग एक हजार लोग घायल हुए थे। इस घटना के बाद वर्ल्ड ट्रेड सेंटर को कुछ दिनों के लिए बंद कर दिया गया था। बाद में सुरक्षा एजेंसियों ने जांच में पता किया कि इस हमले का मास्टरमाइंड रेमजी युसुफ था। सुरक्षाकर्मियों ने चार लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया और उनसे रेमज के बारे में पूछताछ की, मगर तब तक देर हो चुकी थी।
रेमजी को दो साल बाद इस्लामाबाद से पकड़ा गया था
अपने लोगों को पकड़े जाने की खबर मिलते ही रेमजी युसुफ अमरीका छोड़कर पाकिस्तान भाग गया। हालांकि, दो साल बाद ही अमरीकी सुरक्षा एजेंसियों ने उसे पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से गिरफ्तार कर लिया था। दिलचस्प यह है कि उस पर मुकदमा चला और दोषी पाए जाने पर उसे 240 साल कैद की सजा सुनाई गई। रेमजी वर्ल्ड ट्रेड सेंटर बिल्डिंग को गिराना चाहता था, मगर असफल रहा। तब उसके मामा खालिद शेख मोहम्मद ने ये जिम्मेदारी ली। दरअसल, 11 सितंबर को हमले की प्लानिंग खालिद ने ही की थी और इसमें वह सफल भी हो गया।
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