
ट्रेंडिंग डेस्क। मार्केट में नया माल आया है। यह जानने के बाद पुलिस ने इसकी पड़ताल की तो पता चला इसका नाम है ब्लैक कोकीन। यह बेहद खतरनाक ड्रग होती है और ऐसी गजब की भी कि बम तक सूंघ लेने वाले कुत्ते भी इसका पता नहीं लगा पाते। भारत में हाल ही में इसका पहला सामने आया है। बोलीविया की एक महिला जब मुंबई आई और एयरपोर्ट पर उसकी जांच हुई, तो उसके पास से कुछ अलग काले रंग का पावडर मिला। सख्ती से पूछताछ हुई तो उसने बताया कि ये ब्लैक कोकीन है। जांच टीम के लिए यह नाम नया था, मगर इसके बारे में जब ज्यादा पता किया तो अधिकारी चौंक गए। महिला की तुरंत और तलाशी ली गई, तब उसके पास से तीन किलो 200 ग्राम ब्लैक कोकीन मिली और इस तरह भारत में मुंबई के रास्ते ब्लैक कोकीन पहुंचा था।
एक्सपर्ट्स की मानें तो ब्लैक कोकीन नॉर्मल कोकीन से अलग और काफी खतरनाक होती है। यह कई केमिकल को मिलाकर बनाई जाती है। कुछ-कुछ चारकोल की तरह दिखती है। इसे कोकीन हाइड्रोक्लोराइड और कोकीन बेस के नाम से भी जानते हैं। यह कोबाल्ट, कोयला, आयरन सॉल्ट या एक्टिवेटेड कॉर्बन जैसी चीजों से मिलकर बनाया जाता है। कुछ दक्षिणी अमरीकी ड्रग तस्कर इसे भारत में पहुंचा रहे हैं। यह बेहद नशीले श्रेणी का ड्रग माना जाता है। इसे लेने से उल्टी होती है। तेज सिर दर्द होता है। बैक्टेरियल इन्फेक्शन, हार्ट अटैक, हेपेटाइटिस बी और सी जैसी कई और दिक्कतें सामने आती हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1980 के मध्य में चिली के तानाशाह अगस्तो पिनोचेट ने अपनी सेना को कुछ गुप्त लैब बनाने का आदेश दिया और ब्लैक कोकीन बनाने को कहा, जिससे दूसरे देशों की कानून और प्रवर्तन एजेंसियां इसे नहीं पकड़ सकें और इस तरह पहली बार कोकीन बनाई गई, वो भी चिली में और वहां की तत्कालीन सरकार यानी तानाशाह के आदेश पर।
कुत्ते क्यों नहीं सूंघ पाते, अधिकारी भी नहीं समझ पाते
तस्करों ने इसका रंग बदल दिया है, जिससे यह पहचान में नहीं आए। इसमें कोकीन की तरह गंध भी नहीं होती, क्योंकि कुछ खास केमिकल मिलाकर इसे खत्म कर दिया जाता है और इसी लिए स्निफर डॉग इसे सूंघ नहीं पाते। एयरपोर्ट या अन्य किसी भी जगह जब इसकी जांच होती है टीम इसे पकड़ नहीं पाती। एक बार जब यह टारगेट के पास पहुंच जाती है, तब केमिकल प्रॉसेस के जरिए कोकीन बेस को अलग कर देते हैं और फिर यह इस्तेमाल करने लायक हो जाती है। यह अब तक का सबसे महंगा ड्रग है और तमाम रईसजादे और हाई क्लास सोसाइटी के लोग इसका इस्तेमाल करते हैं। भारत में यह दक्षिण अमरीकी देश के तस्करों द्वारा पहुंचाई जा रही है। एनसीबी के मुताबिक, भारत में मुंबई इसका केंद्र है और यहां से दूसरे शहरों में भेजी जाती है।
ड्रग की पहचान कैसे करते हैं कुत्ते
सबसे पहले कुत्तों को नारोटिक्स के खास सेंटर में ले जाया जाता है। यहां तमाम ड्रग्स इन्हें सूंघाई जाती है और फिर उसे कुछ चीजों जैसे, खिलौने, कपड़े, दवा के पैकेट और अन्य संदिग्ध जगहों पर इसे छिपाया जाता है और कुत्तों को इसे खोजने के लिए कहा जाता है। जिन चीजों को सूंघने की ट्रेनिंग दी जाती है, उनमें कोकीन, एचसीएल, क्रैक कोकीन, हेरोइन, कैनबिस, मारिजुआना, एक्सटसी, केटामाइन, एमडीएमए जैसे खतरनाक और तेज नशे वाले ड्रग्स शामिल होते हैं। कुत्ते इसे कड़ी दर कड़ी जोड़ते हुए सूंघते हुए इसके पास पहुंच जाते हैं और पता लगा लेते हैं।
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