कानपुर: डॉ. रिजवान मामले में पुलिसकर्मियों पर लगे वसूली के आरोप, कॉल डिटेल से खुल सकता है अहम राज

Published : Jan 09, 2023, 02:32 PM IST
कानपुर: डॉ. रिजवान मामले में पुलिसकर्मियों पर लगे वसूली के आरोप, कॉल डिटेल से खुल सकता है अहम राज

सार

यूपी के कानपुर से पकड़े गए बांग्लादेशी नागरिक डॉ. रिजवान मामले में कथित वसूली का खेल सामने आया था। बताया गया था कि एक इंस्पेक्टर और डीसीपी को इस बात की जानकारी पहले से थी कि रिजवान बांग्लादेशी नागरिक है।

कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर से पकड़े गए बांग्लादेशी नागरिक डॉ. रिजवान मामले में बड़े राज का खुलासा हो सकता है। डॉ. रिजवान से कथित वसूली के मामले में जांच टीम कुछ मोबाइल नंबरों की डिटेल खंगाल रही है। हालांकि पुलिस बिचौलिए के साथ नरम है। पुलिस ने अब तक बिचौलिए से विस्तार से पूछताछ नहीं की गई है। इस मामले पर पुलिस अफसर भी पूरी तरह से बेफिक्र नजर आ रहे हैं। बता दें कि जांच के नाम पर खानीपूर्ति की जा रही है। ऐसे में जांच के बाद क्या तथ्य सामने आते हैं और पुलिस द्वारा क्या कार्रवाई की जाएगी। यह देखने लायक होगा। 

वसूली का भी खेल आया था सामने
बता दें कि 11 दिसंबर को पुलिस ने बांग्लादेशी नागरिक डॉ. रिजवान व उसके परिवार वालों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। मामले की जांच के दौरान कथित वसूली का भी खेल सामने आया था। बताया गया था कि एक इंस्पेक्टर व एक एडिशनल डीसीपी को यह जानकारी पहले से थी कि रिजवान बांग्लादेशी है। जिसके बाद एक बिचौलिए के माध्यम से सभी ने बड़ी वसूली भी की। पुलिस कमिश्नर ने डीसीपी क्राइम को मामले की जांच सौंपी है। जिसके बाद बिचौलिए के मोबाइल नंबर की सीडीआर खंगाली जा रही है। जांच में पता चलेगा कि बिचौलिया संबंधित पुलिसकर्मियों के संपर्क में रहा है। फिलहाल इस मामले की जांच में तेजी नहीं दिखाई जा रही है। 

गोपनीय तरीके से की जा रही जांच
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पहले ही मौखिक रूप से सभी को क्लीन चिट दे दी गई है। बस अब कागजी कार्रवाई करना बाकी है। बता दें कि पुलिस अधिकारी अब आमतौर पर व्हाट्सएप कॉल पर बात करते हैं। इस तरह से अफसर बिचौलिए से सूझबूझ से संपर्क रखते हैं। ऐसे में अफसर या तो किसी के माध्यम से बात करते हैं या फिर व्हाट्सएप कॉल पर बातचीत की जाती है। इस मामले में अहम जानकारी मिली है कि जिस बिचौलिए का नाम सामने आया है उसी ने बांग्लादेशी नागरिक रिजवान को पकड़वाया भी है। यह मामला तब सामने आया जब उच्चाधिकारियों ने जांच कराने की बात को सिरे से खारिज कर दिया था। लेकिन गोपनीय तरीके से मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं।

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