राम मंदिर ट्रस्ट में पुराने लोगों को शामिल नहीं करने पर नाराज संत समाज, बोले जरूरत पड़ी तो आंदोलन करेंगे

Published : Feb 06, 2020, 01:34 PM IST
राम मंदिर ट्रस्ट में पुराने लोगों को शामिल नहीं करने पर नाराज संत समाज, बोले जरूरत पड़ी तो आंदोलन करेंगे

सार

राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट का ऐलान होने के बाद से राम जन्मभूमि से जुड़े संत नाराज हैं। संत समाज का कहना है कि ट्रस्ट में ऐसे लोगों को जगह दी गई है जिनका इस आंदोलन से कोई लेना देना नहीं था। उन्होंने अयोध्या के राजा विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र को ट्रस्ट में शामिल किए जाने का विरोध किया। वहीं, संघ प्रमुख मोहन भागवत को ट्रस्ट में शामिल न किए जाने पर तपस्वी छावनी के महंत परमहंस दास अनशन पर बैठ गए हैं।

अयोध्या (Uttar Pradesh). राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट का ऐलान होने के बाद से राम जन्मभूमि से जुड़े संत नाराज हैं। संत समाज का कहना है कि ट्रस्ट में ऐसे लोगों को जगह दी गई है जिनका इस आंदोलन से कोई लेना देना नहीं था। उन्होंने अयोध्या के राजा विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र को ट्रस्ट में शामिल किए जाने का विरोध किया। वहीं, संघ प्रमुख मोहन भागवत को ट्रस्ट में शामिल न किए जाने पर तपस्वी छावनी के महंत परमहंस दास अनशन पर बैठ गए हैं। बता दें, दिगम्बर अखाड़े के महंत सुरेश दास ने गुरुवार को संतों की बैठक बुलाई है, माना जा रहा है कि इसमें अहम फैसला लिया जा सकता है।

महंत ने कहा, जरूरत पड़ी तो आंदोलन होगा
श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास ने कहा, ट्रस्‍ट में अयोध्‍या के संतों के साथ अन्‍याय हुआ है। राम मंदिर अब वो लोग बनाएंगे जिन्‍हें कुछ पता ही नहीं। वहीं, दिगम्बर अखाड़े के महंत सुरेश दास ने कहा, सरकार ने संतो का अपमान किया है। हमने एक बैठक बुलाई है, जिसमें सभी संत शामिल होंगे। पूरे देश के संत फोन कर रहे हैं। हम बैठक में आगे की कार्यवाही की रणनीति तय करेंगे। अगर जरूरत पड़ी तो आंदोलन होगा। 

प्रयागराज के संत ट्रस्ट के ऐलान से खुश
दूसरी तरफ संगम नगरी प्रयागराज में संत इस बात को लेकर संतुष्ट हैं कि ट्रस्ट में ऐसे लोगों को शामिल किया गया है जिनका राजनीति से कोई लेना देना नहीं है। 

ट्रस्ट में इन लोगों का नाम शामिल
5 फरवरी को पीएम नरेंद्र मोदी ने संसद में राम मंदिर निर्माण के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का ऐलान किया। ट्रस्ट के सदस्यों में सुप्रीम कोर्ट में रामलला विराजमान की पैरवी करने वाले सीनियर वकील केशवन अय्यंगार परासरण, जगतगुरु शंकराचार्य, जगतगुरु माधवानंद स्वामी, युगपुरुष परमानंद जी महाराज, पुणे के गोविंद देव गिरि, अयोध्या के डॉक्टर अनिल मिश्रा, अयोध्या के राजा विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र, कामेश्वर चौपाल और निर्मोही अखाड़ा के धीरेंद्र दास का नाम शामिल है।

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