उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया है कि परीक्षा शुल्क केवल शासनादेश में तय दरों के अनुसार ही लिया जाए। अधिक फीस वसूलने वाले विश्वविद्यालयों की ऑडिट कर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। सरकार शिक्षा को सस्ता और छात्र हितैषी बनाने पर जोर दे रही है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था को अधिक सुलभ, सस्ती और पारदर्शी बनाने के लिए लगातार कदम उठा रही है। इसी दिशा में प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि परीक्षा शुल्क केवल शासनादेश में तय दरों के अनुसार ही लिया जाए। यदि कोई विश्वविद्यालय निर्धारित शुल्क से अधिक फीस वसूलता पाया गया तो उसकी ऑडिट कराई जाएगी और आवश्यक कार्रवाई भी की जा सकती है।

लखनऊ विश्वविद्यालय में फीस को लेकर हुई समीक्षा बैठक

सोमवार को उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने विधानसभा स्थित अपने कार्यालय में लखनऊ विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध महाविद्यालयों द्वारा शासनादेश से अलग फीस लेने के मामले में समीक्षा बैठक की। इस बैठक में विश्वविद्यालयों की फीस संरचना, परीक्षा शुल्क और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों और विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों ने भी अपनी बात रखी।

निर्धारित शुल्क से अधिक लेने पर होगी कार्रवाई

बैठक के दौरान मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि सभी राज्य विश्वविद्यालयों को शासनादेश के अनुसार ही परीक्षा शुल्क लेना अनिवार्य है। यदि कोई संस्थान निर्धारित शुल्क से अधिक फीस वसूलता है, तो उसकी वित्तीय ऑडिट कराई जा सकती है और दोषी पाए जाने पर उचित कार्रवाई भी की जाएगी। उन्होंने विश्वविद्यालयों को वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के निर्देश भी दिए।

छात्रहित सर्वोपरि, अनावश्यक फीस वृद्धि से बचें विश्वविद्यालय

उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार शिक्षा को छात्र हितैषी बनाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि फीस में अनावश्यक बढ़ोतरी से आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को पढ़ाई जारी रखने में मुश्किल होती है। इसलिए विश्वविद्यालयों को फीस तय करते समय छात्रों के हित को प्राथमिकता देनी चाहिए।

विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए तय किया गया परीक्षा शुल्क

शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार राज्य विश्वविद्यालयों में परीक्षा शुल्क को एक समान रखने के लिए अलग-अलग पाठ्यक्रमों के लिए प्रति सेमेस्टर शुल्क तय किया गया है। बीए, बीएससी, बीकॉम, बीबीए, बीसीए, बीएड, बीपीएड, बीजेएमसी, बीएफए और बीवोक जैसे पाठ्यक्रमों के लिए प्रति सेमेस्टर 800 रुपये परीक्षा शुल्क निर्धारित किया गया है।

वहीं एलएलबी, बीएससी एग्रीकल्चर (ऑनर्स), बीटेक और बायोटेक जैसे कोर्स के लिए 1000 रुपये प्रति सेमेस्टर फीस तय की गई है। इसके अलावा बीडीएस, नर्सिंग, बीएएमएस और बीयूएमएस जैसे पाठ्यक्रमों के लिए प्रति सेमेस्टर 1500 रुपये परीक्षा शुल्क निर्धारित किया गया है।

विश्वविद्यालयों को आत्मनिर्भर बनने पर भी दिया जोर

मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि विश्वविद्यालयों को शासनादेश का पूरी तरह पालन करना चाहिए और वित्तीय अनुशासन बनाए रखना चाहिए। साथ ही उन्होंने संस्थानों को अपने संसाधनों को मजबूत करने, नए पाठ्यक्रम शुरू करने और बेहतर वित्तीय प्रबंधन की दिशा में काम करने की सलाह दी, ताकि विश्वविद्यालय आत्मनिर्भर बन सकें।

बैठक में अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने रखे सुझाव

बैठक के दौरान अधिकारियों और विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालयों की वित्तीय स्थिति, परीक्षा संचालन से जुड़ी समस्याओं और उनके संभावित समाधान पर भी अपने सुझाव दिए। मंत्री ने कहा कि योगी सरकार विश्वविद्यालयों की वास्तविक जरूरतों को समझते हुए हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार है, लेकिन शासनादेशों का पालन सभी संस्थानों के लिए अनिवार्य रहेगा। इस बैठक में एमएलसी उमेश द्विवेदी, अवनीश कुमार सिंह, प्रमुख सचिव एम. पी. अग्रवाल, सचिव अमृत त्रिपाठी, लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जय प्रकाश सैनी सहित कई अधिकारी और विश्वविद्यालय प्रतिनिधि उपस्थित रहे।