किस्सा यूपी का: जब जेल से रिहा होकर सीधे हाथरस में सभा करने पहुंचे कल्याण सिंह, जानिए क्या था पूरा किस्सा

किस्सा यूपी का: जब जेल से रिहा होकर सीधे हाथरस में सभा करने पहुंचे कल्याण सिंह, जानिए क्या था पूरा किस्सा

Published : Feb 15, 2022, 06:08 PM ISTUpdated : Feb 15, 2022, 06:22 PM IST

पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह इमरजेंसी में 28 माह तक जेल में रहने के बाद 1977 में रिहा हुआ। जेल से रिहा होते ही वह सीधा हाथरस पहुंच गए। यहां पहुंचकर उन्होंने एक जनसभा भी की। जनसभा के दौरान जब कल्याण सिंह ने चंदा मांगा तो चादर छोटी पड़ गई। उनकी जरा सी बात पर पलभर में लाखों रुपए इकट्ठा हो गए। उसे पार्टी फंड में जमा करवाया गया। 

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर लगातार चुनाव प्रचार जारी है। इसी बीच राजनीतिक पार्टियां अपने प्रचार-प्रसार में जुटी हुई हैं। यूपी चुनाव पूर्व राज्यपाल और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बिना अधूरा सा है। आज हम हमको उनके जीवन से जुड़ा एक किस्सा बताने जा रहे हैं।
 
पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह इमरजेंसी में 28 माह तक जेल में रहने के बाद 1977 में रिहा हुआ। जेल से रिहा होते ही वह सीधा हाथरस पहुंच गए। यहां पहुंचकर उन्होंने एक जनसभा भी की। जनसभा के दौरान जब कल्याण सिंह ने चंदा मांगा तो चादर छोटी पड़ गई। उनकी जरा सी बात पर पलभर में लाखों रुपए इकट्ठा हो गए। उसे पार्टी फंड में जमा करवाया गया। 

पार्टी के नेता बताते हैं कि 1977 में इमरजेंसी में सारे दल एकजुट थे। उसके बाद भारतीय जनता पार्टी का गठन हुआ। इमरजेंसी में कल्याण सिंह 28 महीने  तक जेल में रहें। इसके बाद जैसे ही वह जेल से रिहा हुआ तो अतरौली नहीं गए। वह सीधे हाथरस पहुंचे और रामलीला मैदान में उनके द्वारा सभा की गई। सभा में कल्याण सिंह पहुंचे और उन्होंने चंदा देने के बात कही। इसके बाद पदाधिकारियों ने सभा में ही चादर डाल दिया। थोड़ी ही देर में चादर कम पड़ गई। लाखों रुपए कुछ ही देर में इकट्ठा हो गए। इन पैसों को भाजपा के कोष में जमा करवाया गया। कल्याण सिंह जिन चारों विधानसभा प्रत्याशियों के समर्थन में जनसभा करने आए थे वह सभी अच्छे मतों से चुनाव जीतें। इसके बाद से राजनीति बिल्कुल बदल गई। 

हाथरस जिला बनने के बाद भी कल्याण सिंह का यहां दबदबा कायम रहा। हाथरस लोकसभा क्षेत्र में भी कल्याण सिंह के हिसाब से ही भाजपा आलाकमान टिकट देता था और उनकी वजह से प्रत्याशी जीतकर संसद में पहुंच जाता था। वर्ष 2014 में तो लोकसभा चुनाव में कल्याण सिंह खुद तत्कालीन प्रत्याशी राजेश दिवाकर का नामांकन कराने के लिए गए थे। यही स्थिति विधानसभा चुनावों में भी रहती थी। हालांकि इस बार का यूपी चुनाव कल्याण सिंह की गैरमौजूदगी में हो रहा है।
 

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