अखाड़े में सैकड़ों वर्ष बाद लड़कियों को मिली एंट्री, लड़कों की तरह ही सीख रहीं कुश्ती, देखें पूरी रिपोर्ट

अखाड़े में सैकड़ों वर्ष बाद लड़कियों को मिली एंट्री, लड़कों की तरह ही सीख रहीं कुश्ती, देखें पूरी रिपोर्ट

Published : Aug 02, 2022, 05:23 PM ISTUpdated : Aug 02, 2022, 07:11 PM IST

यूपी के वाराणसी जिले में 478 साल पुरानी रीति को तोड़ते हुए चार साल पहले नई शुरूआत हुई थी। जहां एक अखाड़े में लड़कों के अलावा लड़कियों का भी प्रवेश शुरू हो गया है। अब यहां लड़कियां भी आकर कुश्ती सीख जाती है। 

वाराणसी: दंगल फिल्म आपने देखी होगी और दंगल फिल्म में किस तरह से लड़कियों का दांव पेज दिखाया गया है, यह भी आपने देखा होगा। लेकिन यूपी के वाराणसी के तुलसी घाट पर रियल लाइफ में यह दंगल नजर आता है। इस अखाड़े ने 478 साल पुरानी कवायत को तोड़ते हुए लड़कियों के लिए पहलवानी का रास्ता खोल दिया है। नागपंचमी के दिन स्वामीनाथ अखाड़े में महिला पहलवानों को लड़ाने की नई परंपरा की शुरुआत हुई है। इस आंकड़े में पिछले 4 वर्षों से लड़कियां दंगल लड़ रही हैं और इस अखाड़े से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने दांव आजमा चुकी हैं।

काशी में तुलसी घाट पर अखाड़े में सैकड़ों वर्ष बाद महिलाओं को एंट्री मिली थी। गौरतलब है कि इस अखाड़े में गोस्वामी तुलसीदास भी रियाज किया करते थे। तुलसी घाट पर स्टेटस अखाड़े में पहले पुरुष पहलवानी करते हुए दिखते थे, लेकिन संकट मोचन के महंत प्रो. विशम्भर नाथ मिश्रा ने समाज के मिथक को तोड़ते हुए महिलाओं को इस अखाड़े में एंट्री दिलाई थी। अखाड़े में लड़ने वाली कशिश यादव ने बताया कि मुझे यहां लड़ना बड़ा अच्छा लगता है और मेरे खून में ही है मुझे पहलवानी ही करनी है। कशिश ने बताया कि मुझे 3 साल हो गया यहां पहलवानी करते हुए। कशिश ने बताया मैंने पट धोबी पछाड़ जैसे तमाम दांव पर सीखे हैं। मुझे बहुत ही खुशी है कि बनारस का पहला अखाड़ा है, जहां लड़कियां कुश्ती लड़ती हैं और मैं सौभाग्यशाली हूं कि इसकी शुरुआत मुझसे ही हुई थी। 

प्रोफेसर विशंभर नाथ मिश्रा ने कहा कि आज नागपंचमी का दिन है और एक प्रकार से अखाड़े का एनुअल मीट है। आज अखाड़े का विधिवत पूजा होता है यहां हनुमान जी का विग्रह जो संकट मोचन मंदिर से यहां लाया जाता है। यहां हनुमान जी का विधिवत पूजा होती है और जो भी लड़के यहां अखाड़े में सीखते हैं उनका एक प्रदर्शन भी हम लोग देखते हैं। इसमें हम याद देखते हैं कि कौन कहां कमजोर है और किसमें ठीक है। उन्होंने कहा कि यहां पहले सिर्फ लड़के लड़ा करते थे लेकिन 5 वर्ष पहले यहां पर लड़कियों को भी स्थान दिया गया। यहां लड़कियां भी लड़कों की तरह प्रदर्शन कर रही हैं उन्होंने कहा कि वह वुमन एंपावरमेंट कि जो बात करते हैं और जहां काम करने की बात आती है। वहां कदम पीछे हटाते हैं लेकिन हम पीछे नहीं हटते हैं और यहां लड़कियां लड़कों के सामान कुश्ती सीखते हैं और तमाम मंच पर वा प्रतिभाग भी करती हैं।

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