काशी तमिल संगमम् कार्यक्रम में आई तेलंगाना की गर्वनर, प्रधानमंत्री के यूनिक आईडिया को ह्रदय से दिया धन्यवाद

काशी तमिल संगमम् कार्यक्रम में आई तेलंगाना की गर्वनर, प्रधानमंत्री के यूनिक आईडिया को ह्रदय से दिया धन्यवाद

Published : Nov 25, 2022, 06:49 PM IST

यूपी के जिले वाराणसी में काशी तमिल संगमम् कार्यक्रम में तेलंगाना की गर्वनर आई और उन्होंने प्रधानमंत्री के यूनिक आईडिया को दिल से धन्यवाद दिया है। उनका कहना है कि काशी और तमिल के बीच एक पुरान संबंध है। 

वाराणसी: उत्तर प्रदेश के जिले वाराणसी में तेलंगाना की गवर्नर और पुद्दुचेरी की लेफ्टिनेंट गवर्नर डॉ. तमिलसाई सौंदरराजन पहुंची। इस दौरान उन्होंने कहा कि मैं यहां इस कार्यक्रम में आकर वास्तव में बहुत प्रसन्न हूं। कार्यक्रम में आज का विषय वर्दी था और काशी वर्दी एक बहुत देशभक्त स्थान के लिए जाना जाता है। जहां बहुत सारे भारतीय भाषाओं के लोग निवास करते हैं ‌और उन्होंने पुडुचेरी की स्वतंत्रता के लिए मिलकर ब्रिटिश सत्ता के विरूद्ध संघर्ष किया था। वर्दी स्टेट 10 सालों से पुडुचेरी में हैं। वर्दी एक भिन्न भारत का बदला हुआ तस्वीर दिखाता है। यह तमिलनाडु के लिए बहुत ही लाभकारी हैं। 

उन्होंने आगे कहा कि मैं प्रधानमंत्री को काशी तमिल संगमम् के इस यूनिक आईडिया के लिए ह्रदय से धन्यवाद देते हैं। काशी और तमिल के बीच बहुत ही महान और पूराना संबंध है । प्रधानमंत्री ने इसे नया स्वरूप दिया। मैं बहुत प्रसन्न हूं कि प्रधानमंत्री ने यहां बीएचयू में महान कवि सुब्रमण्यम भारती के नाम से चेयर स्थापित किया है। मैं यहां 20 साल बाद काशी आई हूं और यहां गंगा में काफी बदलाव देखा। इसके साथ ही शहर और दंगा दोनों ही स्वच्छ है। गंगा को बेहतर ढंग से स्वच्छ रखने के लिए मैं प्रधानमंत्री के प्रति काफी धन्यवाद ज्ञापित करती हूं। यह बहुत ही महान विचार है कि तमिल और काशी दोनों लोगों के लिए।

इस आयोजन के माध्यम से उत्तर और दक्षिण दोनों की संस्कृतियां, भाषाएं, परंपराएं आपस में मिल रही है। जैसा कि हमारे तमिलनाडु में "तेन काशी और शिव काशी" जैसे शहर हैं। पुडुचेरी में भी काशी विश्वनाथ मंदिर है और आपको जानना चाहिए तमिलनाडु के अनेक गांव में काशी विश्वनाथ के मंदिर बने हुए हैं। यह तमिलनाडु और काशी एक दूसरे से अच्छी तरह से संबंध है। जब भी मंदिरों की बात आती है काशी और रामेश्वर का जिक्र एक साथ होता है, किसी अन्य स्थान का नहीं। इस तरह से यह दोनों स्थान बहुत ही अच्छी तरह से एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। यहां के आध्यात्मिकता मंदिर सभी एक दूसरे से जुड़े हुए हैं और काशी का तो आत्मीय संबंध है।

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