Massive Protest in Nepal: नेपाल में राजशाही समर्थकों के हिंसक प्रदर्शन के बाद पुलिस ने दो
लोगों को गिरफ्तार किया है। हिंसा और आगजनी में दो लोगों की मौत हो गई है।
Massive Protest in Nepal: नेपाल में राजशाही समर्थकों के हिंसक प्रदर्शन के बाद पुलिस ने क्रैकडाउन शुरू किया है। अब तक कम से कम 51 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। शुक्रवार को पुलिस ने 17 प्रमुख लोगों को भी गिरफ्तार किया जिनमें राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के वाइस चेयरमैन रबिंद्र मिश्रा भी शामिल हैं। पार्टी के महासचिव सुमशेर राणा को भी गिरफ्तार किया गया है। राजशाही समर्थक कार्यकर्ता स्वागत नेपाल, शेफर्ड लिंबू और संतोष तमांग के अलावा कई और नेताओं को हिंसा फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
शुक्रवार को हुई हिंसा और आगजनी में कई लोगों की मौत हुई है। कई निजी संपत्तियों को आग लगा दी गई और दुकानों को लूट लिया गया। नेपाल के गृह मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के हवाले से स्थानीय मीडिया ने बताया है कि राजशाही समर्थक आंदोलन के मुख्य संयोजक नवाराज सुबेदी को घर में निगरानी में रखा गया है। सुरक्षा बल राजशाही समर्थक आंदोलन के चीफ कमांडर दुर्गा परसाई को खोज रहे हैं। सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक उनका फोन बंद है और उन्हें तलाशा जा रहा है।
गृह मंत्रालय के मुताबिक कई प्रमुख लोगों के अलावा कुल 51 लोगों को शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया है। सरकार के एक मंत्री के मुताबिक नेपाल सरकार राजशाही और हिंदू राष्ट्र की मांग करने वालों के सभी प्रदर्शनों और कार्यक्रमों को रोकने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। काठमांडु के कोटेश्वर के पास तिनकुने इलाके में शुक्रवार को हुए प्रदर्शन के बाद बड़े पैमाने पर आगजनी और हिंसा हुई थी। एक शीर्ष सुरक्षा अधिकारी ने नेपाल की मीडिया से कहा- हमारे पास ये जानकारी थी कि राजशाही समर्थक शुक्रवार को कानून व्यवस्था बिगाड़ सकते हैं। हमने इसी हिसाब से सुरक्षा तैयारियां भी की थीं।
एक अधिकारी ने कहा- “शुक्रवार को हुई आगजनी, तोड़फोड़ और हत्याओं के बाद से राजशाही समर्थकों के लिए जनता का समर्थन तेजी से गिरा है। शुक्रवार के घटनाक्रम के बाद हिंदू राष्ट्र समर्थक और राजशाही समर्थक समूहों के बीच गहरे मतभेद पैदा हो सकते हैं। अब हम उनकी गतिविधियों को सीमित करने के लिए हर संभव कदम उठाएंगे।” नेपाल में राजशाही की वापसी और देश को फिर से हिंदू राष्ट्र घोषित करने के लिए आंदोलन जोर पकड़ रहा है। 9 मार्च को पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह जब पोखरा से काठमांडु आये तो इन समूहों ने उनका स्वागत किया।
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राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के अलावा कई हिंदूवादी समूह भी इस आंदोलन में शामिल है। इसका नेतृत्व 86 वर्षीय सुबेदी कर रहे हैं जो 1980 के दौर में राष्ट्रीय पंचायत के चेयरमैन थे। ये पार्टी विहीन पंचायत व्यवस्था के दौर में नेपाल का विधानमंडल था। वहीं, राष्ट्रीय पंचायत पार्टी के संपर्क विभाग के प्रमुख उद्धव राज भेटुवाल ने इन गिरफ्तारियों को अवैध बताते हुए सभी को तुरंत रिहा करने की मांग की है। वहीं सरकार के प्रवक्ता सुब्बा गुरुंग ने शुक्रवार को हुई अहम कैबिनेट बैठक की जानकारी देते हुए कहा कि इस बैठक में आगजनी, हत्याओं और लूटमार की आलोचना की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार सभी घायलों का मुफ्त इलाज कराएगी। गुरुंग के मुताबिक सरकार ने शुक्रवार की घटना में शामिल सभी लोगों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। गृह मंत्रालय के मुताबिक इस आगजनी में 9 सरकारी और 6 निजी वाहन जला दिए गए थे। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने घरों, रेस्त्रां और सार्वजनिक स्थलों समेत 13 इमारतों को आग लगा दी थी। हिंसक झड़पों में नेपाल पुलिस के 53 कर्मचारी, 22 आर्म्ड पुलिस के जवान और 33 प्रदर्शनकारी घायल हुए थे।