रूस का दावा- भारत के लोकसभा चुनाव में हस्तक्षेप की कोशिश कर रहा अमेरिका

Published : May 09, 2024, 11:25 AM ISTUpdated : May 09, 2024, 11:26 AM IST
Vladimir Putin

सार

रूस ने दावा किया है कि अमेरिका भारत के लोकसभा चुनाव में हस्तक्षेप की कोशिश कर रहा है। अमेरिका को भारत की राष्ट्रीय मानसिकता की समझ नहीं है। वह भारत में आंतरिक राजनीतिक स्थिति को 'असंतुलित' करने की कोशिश कर रहा है। 

मॉस्को। भारत में लोकसभा चुनाव 2024 चल रहे हैं। सात चरणों में हो रहे चुनाव के तीन चरण के मतदान हो गए हैं। इस बीच रूस ने दावा किया है कि अमेरिका भारत में हो रहे चुनाव में हस्तक्षेप की कोशिश कर रहा है। वह भारत के आंतरिक राजनीतिक स्थिति को "असंतुलित" करने की कोशिश कर रहा है।

रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने यह दावा किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने अभी तक खालिस्तानी अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नून के खिलाफ नाकाम हत्या की साजिश में भारतीय नागरिकों की संलिप्तता का विश्वसनीय सबूत नहीं दिया है।

धार्मिक स्वतंत्रता के बारे में आरोप भारत का अपमान

भारत में धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिका की रिपोर्ट का हवाला देते हुए जखारोवा ने कहा कि यूएस में भारत की राष्ट्रीय मानसिकता और इतिहास की समझ का अभाव है। अमेरिका भारत में धार्मिक स्वतंत्रता के बारे में बिना आधार के आरोप लगा रहा है। यह भारत के लिए अपमानजनक है। अमेरिका की इन कोशिशों का मकसद भारत में आंतरिक राजनीतिक स्थिति को असंतुलित करना और आम चुनाव को जटिल करना है।

गुरपतवंत सिंह पन्नुन की हत्या की साजिश मामले में अमेरिका ने नहीं दिए सबूत

जखारोवा ने अमेरिका के इन आरोपों को खारिज किया कि एक भारतीय खुफिया अधिकारी ने गुरपतवंत को मारने की योजना बनाई थी। उन्होंने कहा, "हमारे पास मौजूद जानकारी के अनुसार, वाशिंगटन ने अभी तक पन्नुन की हत्या की तैयारी में भारतीय नागरिकों की संलिप्तता का कोई विश्वसनीय सबूत नहीं दिया है। सबूत के अभाव में इस विषय पर अटकलें नहीं लगाई जानी चाहिए। यह अस्वीकार्य हैं।"

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अमेरिकी आयोग ने रिपोर्ट में कहा- भारत में धार्मिक स्वतंत्रता का हो रहा उल्लंघन

दरअसल, अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग (USCIRF) ने अपनी नई रिपोर्ट में आरोप लगाया है कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन किया जा रहा है। रिपोर्ट में भारत को ऐसे 16 देशों के साथ रखा गया है जहां धर्म या विश्वास की स्वतंत्रता के अधिकार का गंभीर उल्लंघन होता है। इस रिपोर्ट पर भारत के विदेश मंत्रालय ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और रिपोर्ट को पक्षपातपूर्ण बताया है।

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