देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार, वैगनआर, की बिक्री धीमी है, जून में सिर्फ 3 यूनिट्स बिकीं। यह E20 से E85 इथेनॉल पर चलती है और पेट्रोल मॉडल से ₹86,000 महंगी है। इथेनॉल पर जागरूकता की कमी और गलतफहमियां इसकी धीमी बिक्री का कारण हैं।
नई दिल्लीः देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार, वैगनआर फ्लेक्स फ्यूल, को बाजार में उम्मीद के मुताबिक खरीदार नहीं मिल रहे हैं। मारुति सुजुकी के इस नए मॉडल की जून महीने में सिर्फ तीन यूनिट्स ही बिक पाईं। इस गाड़ी की एक्स-शोरूम कीमत करीब 7.23 लाख रुपये है, जो इसके रेगुलर पेट्रोल मॉडल से लगभग 86,000 रुपये ज्यादा है।

मारुति सुजुकी की वैगनआर फ्लेक्स फ्यूल को भारत में इथेनॉल आधारित ट्रांसपोर्ट सिस्टम की तरफ एक बड़े कदम के तौर पर देखा जा रहा है। यह गाड़ी E20 (20% इथेनॉल) से लेकर E85 (85% इथेनॉल) तक के पेट्रोल-इथेनॉल मिक्स पर चलने में सक्षम है। कुछ खास परिस्थितियों में इसे E100 यानी 100% इथेनॉल पर भी चलाने के लिए डिजाइन किया गया है।
लेकिन बाजार में ग्राहकों का रिस्पॉन्स काफी ठंडा रहा है। माना जा रहा है कि इसकी सबसे बड़ी वजह आम लोगों में इथेनॉल फ्यूल को लेकर जानकारी की कमी और कुछ गलतफहमियां हैं। इसके अलावा, पिछले कुछ दिनों में सोशल मीडिया पर E20 फ्यूल को लेकर कई निगेटिव बातें भी फैलीं, जिसका असर इसकी बिक्री पर पड़ा हो सकता है।
फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों में एक खास तरह का इंटरनल कंबशन इंजन होता है, जो पेट्रोल और इथेनॉल के अलग-अलग मिक्स पर चल सकता है। भारत में फिलहाल ज्यादातर गाड़ियां E20 फ्यूल के हिसाब से ट्यून की गई हैं, लेकिन यह नई वैगनआर ज्यादा इथेनॉल वाले फ्यूल पर भी आराम से चलने के लिए बनी है।
इसके लिए गाड़ी के फ्यूल सिस्टम में कई बड़े बदलाव किए गए हैं। इथेनॉल की केमिकल प्रॉपर्टीज की वजह से इसके लिए मजबूत फ्यूल लाइन्स, खास डिजाइन वाले इंजेक्टर्स, नमी से बचाने वाले सील्स और एक खास तौर पर कैलिब्रेट किया गया इंजन मैनेजमेंट सिस्टम लगाया गया है।
इस प्रोजेक्ट को बढ़ावा देने के लिए, गाड़ी की पहली डिलीवरी इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी सेक्टर से जुड़े प्रतिनिधियों को दी गई। इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) जैसी संस्थाएं इथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रही हैं। ISMA के एग्जीक्यूटिव सदस्यों ने ही इस कार की पहली डिलीवरी ली थी। भले ही यह लॉन्च देश को ग्रीन एनर्जी की तरफ ले जाने में एक अहम कदम है, लेकिन मारुति के सामने सबसे बड़ी चुनौती बाजार में ग्राहकों का भरोसा जीतना है।
फ्लेक्स-फ्यूल कार क्या होती है?
एक फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ी (FFV) में ऐसा इंजन होता है जो पेट्रोल और इथेनॉल के अलग-अलग मिश्रण पर चल सकता है। भारत की सड़कों पर दौड़ने वाली ज्यादातर गाड़ियां E20 (20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल) पर चलने के लिए बनी हैं। लेकिन मारुति की यह नई पेशकश E100 (यानी 100% शुद्ध इथेनॉल) जैसे हाई-ब्लेंड पर भी आराम से चलने के लिए डिजाइन की गई है।
इसके लिए इंजीनियरों ने गाड़ी के अंदरूनी सिस्टम को पूरी तरह से बदला है। इथेनॉल, पेट्रोल के मुकाबले ज्यादा असर करने वाला केमिकल है और यह हवा से नमी सोख लेता है। इसलिए, एक सामान्य फ्यूल टैंक इसके लिए काफी नहीं है। मारुति के इस फ्लेक्स-फ्यूल प्रोटोटाइप में पूरी तरह से नए डिजाइन वाले इंजेक्टर, मजबूत फ्यूल लाइन, ज्यादा चलने वाले सील और एक खास इंजन मैनेजमेंट सिस्टम है, जो इथेनॉल के इन खास गुणों को बिना किसी परेशानी के संभाल सके।
