आपने भी देखा होगा कि बाइक पर ड्राइवर की सीट से पीछे वाली सीट ऊंची होती है। कई लोग इसे सिर्फ स्टाइल समझते हैं, लेकिन असल में इसके पीछे इंजीनियरिंग, सुरक्षा और आराम से जुड़े कई बड़े कारण हैं।

नई दिल्लीः आपने भी गौर किया होगा कि ज़्यादातर बाइक्स में ड्राइवर की सीट के मुकाबले पीछे बैठने वाली (Pillion) सीट थोड़ी ऊंची होती है। कई लोगों, खासकर बुज़ुर्गों के लिए तो इस पर चढ़ना भी मुश्किल हो जाता है। फिर भी लगभग सभी बाइक कंपनियां यही डिज़ाइन क्यों अपनाती हैं? इसकी वजह सिर्फ स्टाइल नहीं, बल्कि इसके पीछे इंजीनियरिंग, सेफ्टी और आरामदायक सफ़र का पूरा साइंस छिपा है।

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यह सिर्फ लुक के लिए नहीं है

बहुत से लोग ऊंची पिछली सीट को बाइक के स्पोर्टी लुक से जोड़कर देखते हैं। लेकिन असल में यह डिज़ाइन बाइक की परफॉर्मेंस को बेहतर बनाने में अहम रोल निभाता है। हर बाइक के डिज़ाइन के पीछे कई तकनीकी वजहें होती हैं।

बाइक का बैलेंस बनाने के लिए ज़रूरी

बाइक के अगले और पिछले पहियों पर वज़न का सही तरीके से बंटा होना बहुत ज़रूरी है। जब पिछली सीट ऊंची होती है, तो पीछे बैठे यात्री का वज़न बाइक के सेंटर के ज़्यादा करीब रहता है। इससे वज़न बैलेंस रहता है और बाइक को कंट्रोल करना आसान हो जाता है। मोड़ों पर और तेज़ रफ़्तार में यह ज़्यादा स्थिरता देता है।

पीछे बैठे व्यक्ति को भी सड़क साफ़ दिखती है

ऊंची सीट होने से पीछे बैठे व्यक्ति को भी सड़क साफ़ दिखाई देती है। उसे सिर्फ आगे वाले ड्राइवर का हेलमेट ही नहीं देखना पड़ता, जिससे सफ़र ज़्यादा आरामदायक हो जाता है।

सुरक्षा में भी बड़ा रोल

पिछली सीट ऊंची होने से यात्री के पैर या कपड़े, बाइक की चेन, पिछले पहिये या दूसरे घूमने वाले हिस्सों में फंसने का खतरा कम हो जाता है। साथ ही, तेज़ रफ़्तार में हवा के दबाव से बैलेंस बिगड़ने का डर भी घटता है।

हवा का दबाव होता है कम

जब पीछे बैठा यात्री ऊंची सीट पर होता है, तो वह स्वाभाविक रूप से थोड़ा आगे की ओर झुककर बैठता है। इससे हवा का दबाव (Aerodynamics) कम होता है। खासकर हाईवे पर तेज़ रफ़्तार में बाइक पर हवा का खिंचाव कम होता है, जिससे राइडर को बेहतर कंट्रोल मिलता है।

सस्पेंशन की परफॉर्मेंस भी बेहतर होती है

खराब सड़कों, गड्ढों या स्पीड ब्रेकर्स से गुज़रते समय सस्पेंशन सिस्टम पीछे बैठे यात्री को झटकों से बचाता है। ऊंची सीट इस सिस्टम को काम करने के लिए सही जगह देती है, जिससे सफ़र ज़्यादा स्मूथ होता है और कमर दर्द जैसी दिक्कतें भी कम होती हैं।

मैकेनिकल पार्ट्स के लिए ज़रूरी जगह

आजकल की मॉडर्न बाइक्स में पीछे की तरफ सस्पेंशन, पिछला पहिया, एग्जॉस्ट जैसे कई मैकेनिकल पार्ट्स लगे होते हैं। सीट को ऊपर उठाकर इन पार्ट्स के लिए ज़रूरी जगह बनाई जाती है। कुल मिलाकर, बाइक की पिछली सीट का ऊंचा होना सिर्फ फैशन या स्टाइल के लिए नहीं है। बेहतर बैलेंस, सुरक्षा, आरामदायक सफ़र, एयरोडायनामिक्स और अच्छी हैंडलिंग के लिए यह डिज़ाइन अपनाया जाता है। तो अगली बार अगर कोई पूछे कि "ये सीट इतनी ऊंची क्यों है?", तो आप बता सकते हैं कि यह स्टाइल नहीं... बल्कि साइंस और इंजीनियरिंग का कमाल है।