कहां तो इन्टरनेट के जरिए 26 लाख से ज्यादा लोगों को आज 11.30 बजे नीतीश की वर्चुअल रैली से जोड़ने का इंतजाम किया गया था, मगर सोशल मीडिया और तमाम प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीमिंग गायब दिखी। 

पटना। कोरोना की वजह से बिहार में 243 विधानसभा सीटों के लिए डिजिटल कैम्पेन उतना आसान नहीं होने जा रहा जितना समझा जा रहा था। खासकर छोटी पार्टियों के लिए। इसका उदाहरण साधन सम्पन्न और तमाम तैयारियों के बावजूद सीएम नीतीश कुमार की पहली वर्चुअल रैली में ही दिख गया। कहां तो इन्टरनेट के जरिए 26 लाख से ज्यादा लोगों को आज 11.30 बजे नीतीश की वर्चुअल रैली से जोड़ने का इंतजाम किया गया था, मगर सोशल मीडिया और तमाम प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीमिंग गायब दिखी। 

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जेडीयू के पेज पर नहीं दिखी रैली 
जेडीयू पार्टी चीफ के अभियान के लिए काफी दिन से तैयारी की गई थी। पार्टी की योजना थी कि ऐप के अलावा फेसबुक, ट्विटर और यूट्यब पेज पर इसका सीधा प्रसारण होगा। लेकिन तकनीकी दिक्कतों के जरिए नीतीश की पहली डिजिटल रैली कई प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीम ही नहीं हो पाई। 

पार्टी की वेबसाइट https://jdulive.com पर भी योजना नाकाम हो गई। तय प्रोग्राम के तहत रैली को 11.30 बजे लाइव होना था मगर यह 11:48 AM बजे स्ट्रीम हुई और पार्टी के फेसबुक पेज https://www.facebook.com/jduonline पर दिखी। स्वाभाविक है कि जितना दावा किया गया था उतने लोगों तक नीतीश की पहली डिजिटल रैली के जरिए बातें नहीं पहुंच पाई हैं। पार्टी ने दावा किया था कि 26 लाख से ज्यादा लोगों को वर्चुअल रैली से जोड़ा जाएगा। 

नीतीश की रैली निश्चय संवाद को यहां सुन सकते हैं:- 

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तकनीकी दिक्कत से निपटना चुनौती 
इस बात की आशंका पहले ही थी कि बीजेपी के अलावा बिहार में डिजिटल कैम्पेन दूसरे दलों खासकर छोटी पार्टियों के लिए मुसीबत बन सकती है। दरअसल, पार्टियों का आंतरिक संगठन पहले से इसके लिए तैयार नहीं है। ज़्यादातर दलों का आईटी विभाग कमजोर है और उनके पास तकनीकी सुविधाएं भी नहीं हैं। राज्य में करीब 30 प्रतिशत आबादी तक ही स्मार्टफोन की पहुंच है। बीजेपी ने एलईडी सकीं के जरिए काफी पहले ही अमित शाह की एक वर्चुअल रैली की थी। बीजेपी और जेडीयू ने कई डिजिटल रथ भी चुनाव के लिए बानवाएं हैं। 

क्या करेंगी छोटी पार्टियां? 
ऐसे में पार्टियों ने एलईडी स्क्रीन के जरिए जनता तक अपनी बात पहुंचाने की तैयारी की थी। अब देखना होगा कि साधन सम्पन्न होने के बावजूद जेडीयू को पहली रैली में काफी परेशानी हुई तो एसएलएसपी, वीआईपी, हम, जन अधिकार पार्टी जैसे दल कैसे इस तकनीकी चुनौती का सामना करेंगी। बताते चलें कि कांग्रेस भी आज से ही समूचे राज्य में अपने अभियान की शुरुआत कर रही है।