ये बिहार के इतिहास में पहला बड़ा विधानसभा चुनाव होगा जब आरजेडी चीफ लालू यादव बाहर होंगे। लालू भ्रष्टाचार के एक मामले में जेल में बंद हैं और इस वजह से पार्टी और महागठबंधन का पूरा दारोदार तेजस्वी यादव के कंधों पर है। 

पटना। बिहार में 243 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव आयोग की ओर से शेड्यूल की घोषणा होने से पहले तेजस्वी यादव ने राज्य में नीतीश कुमार की सरकार के कामकाज पर हमला और तेज कर दिया है। चुनाव में युवाओं को मुद्दा बनाते दिख रहे तेजस्वी ने नीतीश के 15 साल के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने राज्य में चौपट उद्योगधंधों और बेरोजगारी को लेकर एनडीए सरकार पर निकम्मेपन का आरोप लगाया। आज सीएम नीतीश की वर्चुअल रैली के शुभारंभ से पहले तेजस्वी ने ये सवाल पूछे हैं। 

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नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आज एक ट्वीट में नीतीश से पूछा, "बिहार के युवाओं को नीतीश कुमार की रूढ़िवादी, बासी, उबाऊ और 15 वर्षों की घिसी-पिटी नकारात्मक बातों में नहीं आना चाहिए। बिहार के युवा इतिहास के बासी पन्ने नहीं बल्कि सुनहरा वर्तमान और भविष्य चाहते है। CM (नीतीश) बताएं उन्होंने 15 वर्षों में नौकरी-रोजगार क्यों नहीं दिया? उद्योग-धंधे क्यों नहीं लगाए?"

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एक दूसरे ट्वीट में तेजस्वी ने कई और सवाल पूछा। उन्होंने नीतीश के 15 साल के शासन को लेकर बेरोज़गारी, गरीबी और पलायन, बदहाल कानून व्यवस्था, दलितों के खिलाफ अत्याचार, फिसड्डी शिक्षा-स्वास्थ्य व्यवस्था, भ्रष्टाचार-घोटाले और लूट-हत्या-बलात्कार में राज्य के सबसे आगे होने को लेकर भी सवाल पूछे। 

लालू के बिना पहला बड़ा विधानसभा चुनाव 
ये बिहार के इतिहास में पहला बड़ा विधानसभा चुनाव होगा जब आरजेडी चीफ लालू यादव इसके बाहर होंगे। लालू भ्रष्टाचार के एक मामले में जेल में बंद हैं और इस वजह से पार्टी और महागठबंधन का पूरा दारोदार तेजस्वी यादव के कंधों पर है। तेजस्वी ही चुनाव में सबसे बड़ा चेहरा हैं। वो लगातार एनडीए की केंद्र और राज्य सरकार पर सवाल उठा रहे हैं और हमला कर रहे हैं। साफ दिख रहा है कि तेजस्वी आरजेडी की पुरानी राजनीति को भुलाकर भविष्य के राजनीति की वकालत कर रहे हैं। उनका एजेंडा आर्थिक और बेरोजगारी मुद्दे पर हरवर्ग के युवाओं को साथ जोड़ना दिख रहा है। 

महागठबंधन ने जीत का बनाया है ऐसा प्लान 
2020 के विधानसभा चुनाव के लिए आरजेडी के नेतृत्व में महागठबंधन ने बड़ा प्लान बनाया है। महागठबंधन में आरजेडी के अलावा कांग्रेस, उपेंद्र कुशावाहा की आरएलएसपी, मुकेश साहनी की वीआईपी और कई वामपंथी पार्टियां शामिल बताई जा रही हैं। कहा जा रहा है कि सहयोगी दलों के साथ सीटों का बंटवारा कर लिया गया है और जल्द ही मोर्चे के नेता एक साथ महागठबंधन के स्वरूप और सीटों की शेयरिंग का ऐलान करेंगे। कोरोना की वजह से इस बार चुनाव अभियान डिजिटल ही रहने वाला है।