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Bihar: Muzaffarpur में आंखों की रोशनी छीनने वाला अस्पताल सील, 27 लोगों की रोशनी गई, 16 की आंखें निकालनी पड़ीं

बिहार (Bihar) के मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) के एक अस्पताल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन (cataract surgery) के बाद 27 लोगों की आंखों में गंभीर संक्रमण हो गया, जिसके चलते 16 मरीजों की आंखें निकलनी पड़ी। घटना 22 नवंबर को शहर के जुरान छपरा इलाके के एक नेत्र अस्पताल में हुई। घटना के बाद अस्पताल को अब सील कर दिया गया है, लेकिन गुनहगार डॉक्टर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
 

Bihar Muzaffarpur SKMCH Eye Hospital sealed 27 people lost eyesight 16 eyes removed UDT
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Muzaffarpur, First Published Dec 2, 2021, 8:47 AM IST
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मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर में आई हॉस्पिटल (Muzaffarpur Eye Hospital) में 16 मरीजों की आंख निकालने और 27 लोगों को अंधा बना देने के मामला गरमा गया है। बिहार स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद कैंप से जुड़े मामले की जांच रिपोर्ट जिला स्वास्थ्य प्रशासन से मांगी है। जिसे लेकर बुधवार को सिविल सर्जन डॉ. विनय कुमार शर्मा ने मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल और एसकेएमसीएच (SKMCH) में भर्ती मरीजों से पूछताछ की। उन्होंने कहा कि शुरुआती जांच में मामला लापरवाही का लग रहा। साथ ही उन्होंने बताया कि अस्पताल को अभी फिलहाल बंद कर दिया गया है। जिन लोगों के आंखें खराब हुई हैं, उन्होंने एक संस्था के जरिए संचालित मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद का ऑपरेशन (cataract surgery) करवाया था।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने इस घटना को लेकर बुधवार को बिहार सरकार को नोटिस भेजा है। एनएचआरसी ने एक बयान में कहा कि उसने मीडिया में आई एक खबर पर स्वत: संज्ञान लिया है कि 22 नवंबर को मुजफ्फरपुर नेत्र अस्पताल में हुई मोतियाबिंद सर्जरी के बाद ‘श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसकेएमसीएच) में मरीजों की आंखें निकालनी पड़ीं।’ बयान में कहा गया है यदि मीडिया में आईं खबरें सही हैं तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन का एक गंभीर मुद्दा है। आयोग ने कहा- चिकित्सा नियमों के अनुसार एक डॉक्टर अधिकतम 12 सर्जरी कर सकता है, लेकिन इस मामले में डॉक्टर ने 65 मरीजों की सर्जरी की। इस तरह चिकित्सा नियमों का उल्लंघन कर लापरवाह तरीके से आंखों की सर्जरी करना गंभीर चिंता का मामला है। आयोग ने बिहार सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

आंखों में दवा डाली और संक्रमण फैल गया
शिवहर जिले के सोनवर्षा गांव के मूल निवासी पीड़ित राम मूर्ति सिंह की बाईं आंख में गंभीर संक्रमण हो गया है। उन्होंने कहा- ‘हमें पता चला कि 22 नवंबर को अस्पताल ने एक मेगा नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया है। मैं अस्पताल आया, जहां डॉक्टरों ने कहा कि मुझे मोतियाबिंद है। उन्होंने एक आंख का ऑपरेशन किया। चार घंटे के बाद ही मेरी आंख में दर्द होने लगा, जब मैंने डॉक्टरों से संपर्क किया तो उन्होंने मुझे दर्द निवारक गोली दी और एक इंजेक्शन भी दिया। दर्द निवारक इंजेक्शन ने मुझे अस्थायी राहत दी। कुछ घंटों के बाद मेरी आंख में फिर से दर्द शुरू हो गया।’

डॉक्टर ने आंख हटाने का सुझाव दिया
मुजफ्फरपुर के मुशारी इलाके की रहने वाली मीना देवी ने कहा- ‘ऑपरेशन के बाद मुझे अपनी आंख में बहुत दर्द हुआ। जब मैंने डॉक्टरों से संपर्क किया तो उन्होंने मुझे दर्द निवारक इंजेक्शन दिया। अगले दिन मुझे छुट्टी दे दी, जब मैं अगले दिन (24 नवंबर) अस्पताल गई तो डॉक्टर ने मुझे लापरवाही के लिए फटकार लगाई। जब मैंने विरोध किया तो उन्होंने संक्रमित आंख को हटाने का सुझाव दिया। चूंकि मेरे परिवार में कोई नहीं है, इसलिए मैंने उन्हें आंख हटाने की अनुमति दी।’

पटना में आंख निकालने का सुझाव दिया
राम मूर्ति शर्मा के एक रिश्तेदार हरेंद्र रजक ने कहा- ‘गंभीर संक्रमण वाले 9 मरीज जांच के लिए पटना गए थे। वहां डॉक्टरों ने हमें बताया कि गंभीर संक्रमण गलत ऑपरेशन प्रक्रिया के कारण हुआ था। उन्होंने ऑपरेशन की गई आंख को हटाने का भी सुझाव दिया। अन्यथा यह दूसरी आंख या मस्तिष्क में और जटिलताएं पैदा कर देगा।’

आंखों में पस बहने लगा
वैशाली जिले के रहने वाले भरत पासवान ने बताया कि घर में 6 बेटियां है। 4 की शादी किसी तरह तो करा दी, लेकिन अब भी दो बेटियां हैं। अकेले मेरे कमाने से घर का खर्च चलाता है। आंख में मोतियाबिंद की परेशानी थी। आई हॉस्पिटल में इलाज करवाने पहुंचे थे। यहां ऑपरेशन किया गया, लेकिन उसके बाद आंखों में दर्द शुरू हो गया। पस बहने लगा। अब डॉक्टर कह रहे हैं कि आंख निकालनी पड़ेगी।

अस्पताल प्रबंधन पर केस
मामले में अस्पताल प्रबंधन पर बुधवार देर शाम प्राथमिकी दर्ज कर ली गई। सिविल सर्जन (CS) और एडिशनल चीफ मेडिकल ऑफिसर (ACMO) ने संयुक्त रूप से आई हॉस्पिटल प्रबंधन की लापरवाही से अब तक 16 लोगों के आंख की रोशनी जाने को लेकर नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है। सिविल सर्जन डॉ. विनय कुमार शर्मा ने ACMO के नेतृत्व में जांच टीम का गठन कर तीन दिनों में जाच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश जारी किया. वहीं पीड़ित मरीजों को  SKMCH में इलाज कराने की व्यवस्था भी की गई।

Muzaffarpur Eye Hospital: एक दिन में हुआ था 65 लोगों का ऑपरेशन, 16 की निकालनी पड़ी आंखें

 

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