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बिहार पुलिस पर पथराव केस: जब जज ने देखी देशभक्ति तो आरोपी को मेडल देख दी रिहाई, जानें क्या है पूरा मामला

बिहार (Bihar) के नालंदा (Nalanda) में अक्सर अपने अनूठे फैसले (Unique Decision) के लिए पहचाने जाने वाले जज मानवेंद्र मिश्र (Judge Manvendra Mishra) एक बार फिर चर्चा में हैं। उन्होंने गणेश उत्सव में पुलिस पर पथराव मामले में आरोपी नाबालिग लड़के को यह कहकर रिहाई दे दी कि उसका इस केस के अलावा कोई क्रिमनल रिकॉर्ड नहीं है। 

Bihar Nalanda Judge Manvendra Mishra Released After Seeing Medal NDA Pass Juvenile Accused Attack on Police Case UDT
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Nalanda, First Published Nov 24, 2021, 12:14 PM IST
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नालंदा। बिहार (Bihar) के नालंदा (Nalanda) में अक्सर अपने अनूठे फैसले (Unique Decision) के लिए पहचाने जाने वाले जज मानवेंद्र मिश्र (Judge Manvendra Mishra) एक बार फिर चर्चा में हैं। उन्होंने गणेश उत्सव में पुलिस पर पथराव मामले में आरोपी नाबालिग लड़के को यह कहकर रिहाई दे दी कि उसका इस केस के अलावा कोई क्रिमनल रिकॉर्ड नहीं है। बच्चे ने एनडीए (NDA) परीक्षा पास की है। कई मेडल जीते हैं। उसकी देशभक्ति और प्रतिभा भी देखना चाहिए। जज मिश्र के इस फैसले ने नाबालिग को करियर संवारने का अवसर दे दिया। इसके साथ ही उन्होंने एसपी को निर्देश दिया कि भविष्य में बच्चे के चरित्र प्रमाण पत्र में इस केस का जिक्र नहीं किया जाए।

दरअसल, नालंदा में नूरसराय के प्रह्लादपुर गांव में बीते 13 सितंबर को गणेश पूजा के दौरान कोविड प्रोटोकॉल का उल्लंघन कर सांस्कृतिक कार्यक्रम में नाच-गाना हो रहा था। इस दौरान पुलिस पहुंची और भीड़ को हटाने की कोशिश की तो लोगों ने पुलिस पर हमला कर दिया। मामले में पुलिस 17 साल के नाबालिग लड़के समेत 200 लोगों के खिलाफ आर्म्‍स ऐक्ट, मारपीट और पथराव के आरोप में केस दर्ज किया। आरोपी नाबालिग को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजीबी) ने दोषमुक्त करार दे दिया। जज ने अपने आदेश में उल्लेख किया है कि नाबालिग ने एनडीए (NDA) की परीक्षा उत्तीर्ण की है। NCC में सीडीटी (CDT) रैंक फायरिंग में पहला स्थान प्राप्त किया है। साइंस ओलंपियाड में भी जिले में प्रथम स्थान पर रहा है। इस आरोप के अलावा उस पर कभी कोई दूसरा केस दर्ज नहीं हुआ है। ऐसे में उसके भविष्य को देखते हुए इस केस को खत्म करने का आदेश दिया जाता है।

इस उम्र में खेल-तमाशे की तरफ आकर्षित होना स्वभाविक
जज मिश्र ने आदेश में टिप्पणी की है कि केस दर्ज होने के समय नाबालिग की उम्र सिर्फ 17 साल थी। इस उम्र के लड़के का कहीं हो रहे खेल-तमाशे या नाच-गान की तरफ आकर्षित या झुकाव होना स्वभाविक है। हां, इस तरह के आयोजन में कोरोना गाइडलाइंस का उल्लंघन करना गलत है। जज ने कहा कि उसकी उम्र तो देखिए, नाच-गाना तो उसे पसंद आएगा ही। उसकी देशभक्‍त‍ि और प्रतिभा को भी तो देखिए। जज ने नाबालिग के अभिलेखों का निरीक्षण किया और उसकी प्रतिभा को देखकर मुकदमे में आगे की कार्रवाई बंद कर दी। 

नाबालिग ने कहा था- जज सर, मेरी नियुक्ति रद्द हो जाएगी
नाबालिग ने कोर्ट में जज से कहा था- सर, उसे हर समय इस बात का डर रहता है कि इस केस के चक्कर में कहीं उसकी नियुक्ति रद्द ना हो जाए। उसने कभी कोई अपराध नहीं किया है। ना ही किसी तरह के नशे की लत है। ये भी कहा कि वह डांस वाले दिन बिहारशरीफ में अपने कमरे में था। पुलिस ने दूसरे के इशारे पर पढ़ाई में बाधा डालने के उद्देश्य से उसे फंसाया है। जज ने नाबलिग की साफगोई और देशभक्ति के जज्बे को देखा और दोषमुक्त करार दे दिया। जज ने एसपी को निर्देश दिया कि भविष्य में बच्चे के चरित्र प्रमाण पत्र में इस केस का जिक्र नहीं किया जाए। उसे आदर्श नागरिक बनने के लिए एक अवसर देने का समर्थन किया।

ये है मामला
13 सितंबर 2021 की रात में नूरसराय थाना क्षेत्र के एक गांव में गणेश पूजा के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम हो रहा था। यहां सूचना मिलने पर थानाध्यक्ष विरेंद्र चौधरी पहुंचे और उन्होंने कार्यक्रम को बंद करने की अपील की। कोरोना गाइडलाइन का पालन करने की बात कही। इस बीच कुछ ग्रामीण उग्र हो गए और पुलिस से कहासुनी हो गई। इसके बाद कुर्सियां और पत्थर फेंकने लगे। इसमें कुछ पुलिसकर्मी जख्मी हो गए थे। इस मामले में 46 नामजद व्यक्तियों के अलावा 200 अज्ञात पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। नामजद में किशोर का नाम भी शामिल था।

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